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Aligarh News: तीन घंटे की सर्जरी से निकाला ट्यूमर, महिला के दोनों गुर्दे सुरक्षित
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जेएन मेडिकल कॉलेज।
- फोटो : samvad
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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के जेएन मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने तीन घंटे तक चली सर्जरी में 65 वर्षीय महिला के किडनी से कैंसरग्रस्त ट्यूमर को निकाल दिया। अब महिला ठीक है, उसे छुट्टी दे दी गई है। उसके दोनों गुर्दे सुरक्षित हैं।
सर्जरी विभाग की अध्यक्ष प्रो. अतिया जका उर रब के निर्देशन में डॉ. परवेज आलम ने ऑपरेशन को अंजाम दिया। रामपुर की नूरजहां जन्म से हॉर्स शू किडनी नामक दुर्लभ स्थिति से पीड़ित थीं, जिसमें दोनों किडनी आपस में जुड़ी होती हैं।
मरीज में कैंसरयुक्त ट्यूमर दोनों किडनी के जुड़े हुए हिस्से में विकसित हो गया था, जिसका ऑपरेशन बेहद जोखिमपूर्ण था। दो में से एक किडनी में रक्त का बहाव हो रहा था। महिला को तीन महीने पहले पेट में तेज दर्द उठा था। परिजनों ने महिला का अल्ट्रासाउंड कराया, जिसमें किडनी आपस में जुड़ी थी और ट्यूमर भी था।
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अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट को परिजनों ने रामपुर, मुरादाबाद सहित अन्य जिलों के डॉक्टरों को दिखाया, लेकिन सभी ने ऑपरेशन करने से मना कर दिया। थक-हारकर परिजन महिला को लेकर जेएन मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग ले आए, जहां डॉक्टरों ने महिला की जांच की। रिपोर्ट के आधार पर सर्जरी से पहले एक योजना बनाई।
अत्यंत सावधानी और सटीक तकनीक के साथ सर्जरी कर ट्यूमर को पूरी तरह हटाया गया, जबकि दोनों किडनी का रक्त का बहाव और कार्यक्षमता सुरक्षित रखी गई। डॉ. परवेज आलम ने बताया कि हॉर्सशू किडनी में कैंसर होना अत्यंत दुर्लभ माना जाता है। इस जटिल शल्यक्रिया में नर्सिंग स्टाफ के सदस्य फिरोज, हरपाल और शहनवाज ने महत्वपूर्ण सहयोग दिया, जबकि एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व डॉ. निदा ने किया।
क्या है हॉर्सशू किडनी हॉर्सशू
किडनी एक दुर्लभ जन्मजात विकृति है, जिसमें दोनों किडनियां नीचे की ओर आपस में जुड़ जाती हैं और घोड़े की नाल जैसी आकृति बना लेती हैं। सामान्यतः इससे जीवनभर कोई परेशानी नहीं होती, लेकिन संक्रमण, पथरी या कैंसर जैसी स्थिति होने पर उपचार बेहद जटिल हो जाता है। जेएन मेडिकल कॉलेज की यह सफलता ऐसे दुर्लभ मामलों के उपचार में संस्थान की उच्च स्तरीय विशेषज्ञता का उदाहरण मानी जा रही है।
65 साल तक सहा दर्द
रामपुर की 65 वर्षीय नूरजहां ने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा पेट के दर्द के साथ गुजार दिया। उम्र बढ़ने के साथ दर्द भी बढ़ता गया, लेकिन उन्हें कभी पता नहीं चला कि इसके पीछे एक दुर्लभ जन्मजात बीमारी छिपी है। उन्होंने इस तकलीफ को अपनी किस्मत मानकर सहना सीख लिया था। जांच में पता चला कि उनकी दोनों किडनी सामान्य लोगों की तरह अलग-अलग नहीं थीं, बल्कि जन्म से ही आपस में जुड़ी हुई थीं।
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सर्जरी विभाग की अध्यक्ष प्रो. अतिया जका उर रब के निर्देशन में डॉ. परवेज आलम ने ऑपरेशन को अंजाम दिया। रामपुर की नूरजहां जन्म से हॉर्स शू किडनी नामक दुर्लभ स्थिति से पीड़ित थीं, जिसमें दोनों किडनी आपस में जुड़ी होती हैं।
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मरीज में कैंसरयुक्त ट्यूमर दोनों किडनी के जुड़े हुए हिस्से में विकसित हो गया था, जिसका ऑपरेशन बेहद जोखिमपूर्ण था। दो में से एक किडनी में रक्त का बहाव हो रहा था। महिला को तीन महीने पहले पेट में तेज दर्द उठा था। परिजनों ने महिला का अल्ट्रासाउंड कराया, जिसमें किडनी आपस में जुड़ी थी और ट्यूमर भी था।
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अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट को परिजनों ने रामपुर, मुरादाबाद सहित अन्य जिलों के डॉक्टरों को दिखाया, लेकिन सभी ने ऑपरेशन करने से मना कर दिया। थक-हारकर परिजन महिला को लेकर जेएन मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग ले आए, जहां डॉक्टरों ने महिला की जांच की। रिपोर्ट के आधार पर सर्जरी से पहले एक योजना बनाई।
अत्यंत सावधानी और सटीक तकनीक के साथ सर्जरी कर ट्यूमर को पूरी तरह हटाया गया, जबकि दोनों किडनी का रक्त का बहाव और कार्यक्षमता सुरक्षित रखी गई। डॉ. परवेज आलम ने बताया कि हॉर्सशू किडनी में कैंसर होना अत्यंत दुर्लभ माना जाता है। इस जटिल शल्यक्रिया में नर्सिंग स्टाफ के सदस्य फिरोज, हरपाल और शहनवाज ने महत्वपूर्ण सहयोग दिया, जबकि एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व डॉ. निदा ने किया।
क्या है हॉर्सशू किडनी हॉर्सशू
किडनी एक दुर्लभ जन्मजात विकृति है, जिसमें दोनों किडनियां नीचे की ओर आपस में जुड़ जाती हैं और घोड़े की नाल जैसी आकृति बना लेती हैं। सामान्यतः इससे जीवनभर कोई परेशानी नहीं होती, लेकिन संक्रमण, पथरी या कैंसर जैसी स्थिति होने पर उपचार बेहद जटिल हो जाता है। जेएन मेडिकल कॉलेज की यह सफलता ऐसे दुर्लभ मामलों के उपचार में संस्थान की उच्च स्तरीय विशेषज्ञता का उदाहरण मानी जा रही है।
65 साल तक सहा दर्द
रामपुर की 65 वर्षीय नूरजहां ने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा पेट के दर्द के साथ गुजार दिया। उम्र बढ़ने के साथ दर्द भी बढ़ता गया, लेकिन उन्हें कभी पता नहीं चला कि इसके पीछे एक दुर्लभ जन्मजात बीमारी छिपी है। उन्होंने इस तकलीफ को अपनी किस्मत मानकर सहना सीख लिया था। जांच में पता चला कि उनकी दोनों किडनी सामान्य लोगों की तरह अलग-अलग नहीं थीं, बल्कि जन्म से ही आपस में जुड़ी हुई थीं।