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अनोखी ड्यूटी: 12 हजार की सैलरी पर कॉलेज में गोलू लंगूर रखा गार्ड के रूप में, ड्यूटी सुबह आठ से शाम पांच बजे तक
नितिन गुप्ता, अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Updated Thu, 23 Apr 2026 03:01 AM IST
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सार
गोलू अब सिर्फ एक लंगूर नहीं, बल्कि कैंपस का हीरो बन चुका है। सभी छात्र छात्राएं उसे देखकर मुस्कुराते हैं और उसकी मौजूदगी से राहत महसूस करते हैं। कॉलेज प्रबंधन ने कागजों पर गोलू लंगूर को एक गार्ड के रूप में तैनाती दी है।
डीएस कॉलेज में बंदरों को भगाता गार्ड गोलू
- फोटो : संवाद
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विस्तार
कैंपस में कभी बंदरों की उछल-कूद से डरकर रास्ता बदलने वाले छात्र अब बेफिक्र होकर क्लास तक पहुंच रहे हैं। वजह बहजोई से अलीगढ़ आया गोलू है। जी हां गोलू, जिसे देखते ही बंदर भागने लगते हैं। गोलू को अलीगढ़ के डीएस डिग्री कॉलेज में तैनात किया है।
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इसे हर महीने 12 हजार रुपये की सैलरी पर रखा गया है ताकि बंदरों से विद्यार्थियों को बचाया जा सके। कॉलेज का यह नया कर्मचारी सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चाएं बटोर रहा है। सेल्फी विद गोलू और लंगूर गार्ड हैशटैग के साथ स्नैपचैट पर तस्वीरें पोस्ट की जा रही हैं।
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कई छात्राओं ने यहां तक कहा कि गोलू अब सिर्फ एक लंगूर नहीं, बल्कि कैंपस का हीरो बन चुका है। सभी छात्र छात्राएं उसे देखकर मुस्कुराते हैं और उसकी मौजूदगी से राहत महसूस करते हैं। कॉलेज प्रबंधन ने कागजों पर गोलू लंगूर को एक गार्ड के रूप में तैनाती दी है। ये रोजाना सुबह 8 बजे अपनी ड्यूटी ज्वाइन करता है और शाम पांच बजे ड्यूटी खत्म होने के बाद वह अपने घर चला जाता है जो कॉलेज के ही एक पेड़ पर बनाया हुआ है। ड्यूटी के दौरान गोलू परिसर में गश्त करता है। जैसे ही बंदरों का झुंड नजर आता है, गोलू की मौजूदगी भर से वे भाग खड़े होते हैं।
प्राचार्य डॉ. मुकेश भारद्वाज के मुताबिक, यह व्यवस्था पिछले छह महीनों से चल रही है और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। अब परिसर में बंदरों का उत्पात काफी कम हो गया है और छात्र-छात्राएं खुद को पहले से ज्यादा सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। बहरहाल कम खर्च में बड़ा समाधान के तौर पर गोलू ने दिखा दिया कि कभी-कभी अनोखे तरीके ही सबसे कारगर साबित होते हैं।

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