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UP: ओपीडी में ‘उधार का बच्चा’, डॉक्टर ने पूछा- अम्मी कौन?; बच्चे ने दरवाजे की तरफ उंगली दिखाते हुए कही ये बात
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: Sharukh Khan
Updated Wed, 20 May 2026 01:53 PM IST
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सार
अलीगढ़ के मलखान सिंह जिला अस्पताल की ओपीडी में बिना मरीज के पर्चा लेकर दवा ले जाने का खेल चल रहा है। बच्चे की मासूमियत ने पोल खोल दी। इसके बाद डॉक्टरों महिला को समझाया।
बिना मरीज के पर्चा लेकर पहुंची महिला को समझाते डॉक्टर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
अलीगढ़ के मलखान सिंह जिला अस्पताल की ओपीडी में सोमवार सुबह मरीजों की लंबी लाइन थी। कोई खांस रहा था, कोई पर्ची हाथ में लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहा था। इसी बीच एक महिला तेजी से डॉक्टर की टेबल तक पहुंची। नौरंगाबाद निवासी सुनीता ने डॉक्टर को ओपीडी पर्ची दिखाई, जिस पर उसके बेटा विशाल का नाम था।
सुनीता ने कहा कि डॉक्टर साहब, बच्चे को तेज बुखार है, खांसी भी है। दवा लिख दीजिए। डॉक्टर ने पूछा कि बच्चा कहां है? इस पर महिला ने बिना झिझक जवाब दिया कि स्कूल गया है। डॉक्टर ने पर्ची एक तरफ रखते हुए कहा कि बच्चा देखे बिना दवा नहीं लिखेंगे।
पहले उसे लेकर आइए। महिला कुछ सेकेंड डॉक्टर को देखती रही। फिर धीरे से बाहर निकल गई। कमरे में बैठे लोगों को लगा मामला खत्म हो गया लेकिन पांच मिनट बाद वही महिला फिर ओपीडी में दाखिल हुई। इस बार उसके साथ एक छोटा बच्चा था।
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महिला ने लगभग राहत भरे अंदाज में कहा, ''''लो डॉक्टर साहब, बच्चा आ गया..अब दवा दे दो।'''' डॉक्टर ने बच्चे की तरफ देखा। फिर मुस्कुराते हुए पूछा कि नाम क्या है बेटा? बच्चे ने अपना नाम सुभान बताया। डॉक्टर तुरंत समझ गए।
सुनीता ने कहा कि डॉक्टर साहब, बच्चे को तेज बुखार है, खांसी भी है। दवा लिख दीजिए। डॉक्टर ने पूछा कि बच्चा कहां है? इस पर महिला ने बिना झिझक जवाब दिया कि स्कूल गया है। डॉक्टर ने पर्ची एक तरफ रखते हुए कहा कि बच्चा देखे बिना दवा नहीं लिखेंगे।
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पहले उसे लेकर आइए। महिला कुछ सेकेंड डॉक्टर को देखती रही। फिर धीरे से बाहर निकल गई। कमरे में बैठे लोगों को लगा मामला खत्म हो गया लेकिन पांच मिनट बाद वही महिला फिर ओपीडी में दाखिल हुई। इस बार उसके साथ एक छोटा बच्चा था।
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महिला ने लगभग राहत भरे अंदाज में कहा, ''''लो डॉक्टर साहब, बच्चा आ गया..अब दवा दे दो।'''' डॉक्टर ने बच्चे की तरफ देखा। फिर मुस्कुराते हुए पूछा कि नाम क्या है बेटा? बच्चे ने अपना नाम सुभान बताया। डॉक्टर तुरंत समझ गए।
उन्होंने फिर से पूछा, बेटा, अम्मी कौन हैं? इस पर बच्चे ने दरवाजे की तरफ उंगली दिखाते हुए कहा, ''अम्मी बाहर खड़ी हैं।'''' कमरे में कुछ सेकेंड की खामोशी छाई और फिर अचानक हंसी फूट पड़ी। डॉक्टर भी मुस्कुरा दिया। महिला का चेहरा उतर गया।
उसने बच्चे का हाथ पकड़ा और बिना कुछ बोले तेजी से बाहर निकल गई। कुछ मिनट की यह घटना ओपीडी की भीड़ में आई और चली गई, लेकिन जाते-जाते जिला अस्पताल की एक बड़ी सच्चाई छोड़ गई कि यहां कई लोग इलाज नहीं, सिर्फ दवा लेने आते हैं। इसके लिए बाहर जाकर दूसरों के बच्चों को पांच मिनट के लिए लेकर आते हैं। धीरे धीरे यहां ऐसे मामलों का उधार के बच्चे नाम पड़ गया है।
पर्ची अफजाल की, बच्चा निकला फुरकान
ओपीडी में बैठे लोग अभी इस ‘उधार के बच्चे’ वाली घटना पर हंस ही रहे थे कि थोड़ी देर बाद एक और महिला शाहजमाल निवासी रूखसना पहुंच गई। शिकायत वही कि बुखार, खांसी, बदन दर्द। डॉक्टर ने फिर पूछा, बच्चा कहां है? इस बार जवाब आया कि घर पर है..आप दवा लिख दीजिए।
ओपीडी में बैठे लोग अभी इस ‘उधार के बच्चे’ वाली घटना पर हंस ही रहे थे कि थोड़ी देर बाद एक और महिला शाहजमाल निवासी रूखसना पहुंच गई। शिकायत वही कि बुखार, खांसी, बदन दर्द। डॉक्टर ने फिर पूछा, बच्चा कहां है? इस बार जवाब आया कि घर पर है..आप दवा लिख दीजिए।
डॉक्टर ने कुर्सी से टिकते हुए हल्की हंसी में कहा कि “आज बच्चे अस्पताल कम, स्कूल और घर ज्यादा जा रहे हैं। ये महिला जिस बच्चे को साथ लेकर आईं, वह किसी और का बच्चा निकला। पर्ची पर अफजाल नाम था, लेकिन डॉक्टर के आगे बच्चे ने अपना नाम फुरकान बताया।
हर दिन देख रहा ऐसे केस, रहना पड़ता है सचेत
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ वैभव जैन ने कहा कि उधार के बच्चे आए दिन ओपीडी में देखने को मिलते हैं। इसलिए उन्हें काफी सतर्क रहना पड़ता है। भीड़ के चलते कई बार ध्यान नहीं जा पाता। परिजन सिर्फ बीमारी के लक्षण बताकर दवा लेना चाहते हैं। खासकर बच्चों के मामलों में यह प्रवृत्ति ज्यादा देखने को मिल रही है। कई लोग स्कूल, भीड़ या समय की कमी का हवाला देते हैं।
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ वैभव जैन ने कहा कि उधार के बच्चे आए दिन ओपीडी में देखने को मिलते हैं। इसलिए उन्हें काफी सतर्क रहना पड़ता है। भीड़ के चलते कई बार ध्यान नहीं जा पाता। परिजन सिर्फ बीमारी के लक्षण बताकर दवा लेना चाहते हैं। खासकर बच्चों के मामलों में यह प्रवृत्ति ज्यादा देखने को मिल रही है। कई लोग स्कूल, भीड़ या समय की कमी का हवाला देते हैं।
आम लोगों से अपील
डॉक्टरों का कहना है कि बिना मरीज की जांच किए दवा लिखना गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। बुखार, खांसी और बदन दर्द जैसी सामान्य दिखने वाली परेशानी कई बार वायरल, फ्लू, डेंगू या दूसरी गंभीर बीमारियों का संकेत भी हो सकती हैं। इससे गलत इलाज और दवाओं के दुरुपयोग का खतरा भी बढ़ता है। डॉ. वैभव ने अपील करते हुए कहा कि प्रत्येक माता-पिता को जागरूक बनना चाहिए और उधार के बच्चे लाने के इस खेल से बचना चाहिए।
डॉक्टरों का कहना है कि बिना मरीज की जांच किए दवा लिखना गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। बुखार, खांसी और बदन दर्द जैसी सामान्य दिखने वाली परेशानी कई बार वायरल, फ्लू, डेंगू या दूसरी गंभीर बीमारियों का संकेत भी हो सकती हैं। इससे गलत इलाज और दवाओं के दुरुपयोग का खतरा भी बढ़ता है। डॉ. वैभव ने अपील करते हुए कहा कि प्रत्येक माता-पिता को जागरूक बनना चाहिए और उधार के बच्चे लाने के इस खेल से बचना चाहिए।