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Aligarh News: 10 वेटलैंड के दम पर पहला हरित शहर बनेगा अलीगढ़

Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 20 May 2026 02:41 AM IST
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Aligarh will become the first green city with the help of 10 wetlands
शेखा झील।  - फोटो : samvad
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तपते शहरों में नष्ट होते प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम को बचाने के लिए सरकार ने वेटलैंड को बढ़ावा देना शुरू कर दिया है। इसी के तहत 10 वेटलैंड के दम पर अलीगढ़ पहला हरित शहर बनेगा। हाल ही में शेखाझील को रामसर साइट घोषित किया गया। अब तीन नए वेटलैंड के लिए प्रदेश सरकार ने अधिसूचना जारी की है। इनके अलावा, तीन और वेटलैंड क्षेत्रों का सैटेलाइट सर्वे हुआ है। इसके बाद तीन और जगहों का सर्वे करने की तैयारी है। इस तरह आगामी दिनों में जिले में कुल 10 वेटलैंड होंगे। अभी तक प्रदेश के किसी भी जिले में इतनी संख्या में वेटलैंड नहीं है।


वन विभाग के मुताबिक वेटलैंड न सिर्फ भूजल संरक्षण और जैव विविधता बचाने में मदद करेंगे, बल्कि कार्बन डाई ऑक्साइड अवशोषित कर शहर के तापमान को नियंत्रित करने में भी अहम भूमिका निभाएंगे। यही वजह है कि जिले में लगातार नए वेटलैंड चिह्नित किए जा रहे हैं।
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बीती दो अप्रैल को राज्य सरकार ने अतरौली ब्लॉक के गांव सिसई, प्रेमनगर धुर्रावास और बिजौली ब्लॉक के गांव सिकरी के वेटलैंड की अधिसूचना जारी की है। इस पर आपत्ति एवं सुझाव के लिए 60 दिन का समय भी निर्धारित किया है। इसके बाद इन्हें आधिकारिक रूप से वेटलैंड घोषित किया जाएगा।
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इधर, कोल तहसील के दभी गांव, गभाना क्षेत्र के सुमेरा-दरियापुर और दाऊपुर गांव के वेटलैंड का प्राइमरी सैटेलाइट सर्वे हो चुका है। अब जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली वेटलैंड समिति इन क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण करेगी। समिति में वन, सिंचाई, कृषि और मत्स्य विभाग के अधिकारी शामिल होंगे। निरीक्षण के बाद इन्हें भी नोटिफिकेशन प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।


इनके अलावा, वन विभाग तीन और वेटलैंड को सूची में शामिल कराने की तैयारी कर रहा है। इनमें अकराबाद ब्लॉक का अमामादपुर, दभादभी और विजयगढ़ क्षेत्र का वरहद वेटलैंड शामिल हैं। इस तरह आगामी दिनों में रामसर साइट शेखाझील समेत जिले में कुल 10 वेटलैंड हो जाएंगे।

..तो शहर हीट आइलैंड बन जाएंगे
एएमयू के भूगोल विभाग के प्रो. अतीक अहमद कहते हैं वेटलैंड किसी भी शहर के लिए प्राकृतिक तापमान नियंत्रक की तरह काम करते हैं। जहां जल क्षेत्र और हरियाली अधिक होती है, वहां तापमान अपेक्षाकृत कम रहता है। इसके विपरीत जिन शहरों में तालाब और वेटलैंड खत्म हुए, वहां अर्बन हीट आइलैंड की स्थिति तेजी से बढ़ी है।


आने वाले वर्षों में शहरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल प्रदूषण नहीं, बल्कि बढ़ती गर्मी होगी। जिस तेजी से कंक्रीट का दायरा बढ़ रहा है, उससे शहर प्राकृतिक तापमान संतुलन खोते जा रहे हैं। ऐसे में वेटलैंड और जल स्रोत ही राहत देने का सबसे प्रभावी माध्यम बन सकते हैं। अलीगढ़ जैसे तेजी से फैलते शहर में यदि अभी से जल स्रोतों और वेटलैंड को संरक्षित नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में यहां गर्मी और जल संकट दोनों गंभीर रूप ले सकते हैं। लगातार बढ़ती वार्म नाइट यानी गर्म रातों की स्थिति इसी बदलाव का संकेत है।

जिले में नए वेटलैंड चिह्नित कर उनके संरक्षण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। इससे जैव विविधता संरक्षण के साथ पर्यावरण संतुलन मजबूत होगा।
-शिवम कुमार, प्रभागीय निदेशक, सामाजिक वानिकी विभाग, अलीगढ़।

-अतरौली ब्लॉक के गांव सिसई में 2.2580 हेक्टेयर में वेटलैंड चिह्नित।
-अतरौली ब्लॉक के गांव धुर्राखास में 0.1380 हेक्टेयर में वेटलैंड चिह्नित।

-बिजौली ब्लॉक के सिकरी में 3.1280 हेक्टेयर में वेटलैंड चिह्नित किया।
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