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Aligarh News: बढ़ते खर्चों ने बदली तस्वीर गृहिणियां बन रहीं कमाऊ सदस्य
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सरोज।
- फोटो : samvad
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बढ़ती महंगाई ने शहर और कस्बों के परिवारों की सोच और जीवनशैली दोनों बदल दी है। अब महिलाएं सिर्फ गृहिणी तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि रोजगार से जुड़कर परिवार के पालन-पोषण में पति के साथ मुख्य भूमिका निभा रही हैं।
घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए अब एक सदस्य की कमाई पर्याप्त नहीं रह गई है। ऐसे में बड़ी संख्या में महिलाएं रोजगार और छोटे व्यवसाय की ओर कदम बढ़ा रही हैं।
शहर में महिलाएं ट्यूशन, ब्यूटी पार्लर, सिलाई-कढ़ाई, ऑनलाइन काम, घरेलू प्रशिक्षण और दुकानों में सहयोग जैसे काम कर परिवार की आय बढ़ाने में जुटी हैं। सुबह घर के काम निपटाने के बाद महिलाएं रोजगार से जुड़ रही हैं और शाम को लौटकर फिर घर की जिम्मेदारियां भी संभाल रही हैं।
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महिलाओं का कहना है कि पहले एक व्यक्ति की आय में महीनेभर का खर्च निकल जाता था, लेकिन अब रसोई का बजट लगातार बिगड़ रहा है। दाल, तेल, मसाले, दूध, गैस सिलेंडर और बच्चों की फीस जैसे खर्चों ने परिवारों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा दिया है। यही वजह है कि अब महिलाएं भी आर्थिक रूप से सक्रिय होने को मजबूर हैं।
किराना व्यापारी संदीप कुमार ने बताया कि पहले लोग महीने भर का राशन एक साथ खरीद लेते थे, लेकिन अब जरूरत के हिसाब से सीमित खरीदारी कर रहे हैं।
अलीगढ़ के अर्थशास्त्री प्रो. अमित वार्ष्णेय का कहना है कि अब महिलाएं सिर्फ परिवार की देखभाल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि परिवार की आर्थिक मजबूती का आधार भी बनती जा रही हैं। संवाद
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शहर में महिलाएं ट्यूशन, ब्यूटी पार्लर, सिलाई-कढ़ाई, ऑनलाइन काम, घरेलू प्रशिक्षण और दुकानों में सहयोग जैसे काम कर परिवार की आय बढ़ाने में जुटी हैं। सुबह घर के काम निपटाने के बाद महिलाएं रोजगार से जुड़ रही हैं और शाम को लौटकर फिर घर की जिम्मेदारियां भी संभाल रही हैं।
महिलाओं का कहना है कि पहले एक व्यक्ति की आय में महीनेभर का खर्च निकल जाता था, लेकिन अब रसोई का बजट लगातार बिगड़ रहा है। दाल, तेल, मसाले, दूध, गैस सिलेंडर और बच्चों की फीस जैसे खर्चों ने परिवारों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा दिया है। यही वजह है कि अब महिलाएं भी आर्थिक रूप से सक्रिय होने को मजबूर हैं।
किराना व्यापारी संदीप कुमार ने बताया कि पहले लोग महीने भर का राशन एक साथ खरीद लेते थे, लेकिन अब जरूरत के हिसाब से सीमित खरीदारी कर रहे हैं।
अलीगढ़ के अर्थशास्त्री प्रो. अमित वार्ष्णेय का कहना है कि अब महिलाएं सिर्फ परिवार की देखभाल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि परिवार की आर्थिक मजबूती का आधार भी बनती जा रही हैं। संवाद