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High Court : विवाहित व्यक्ति का शादी का वादा कर किसी युवती से संबंध बनाने की सहमति छल है, नहीं रद्द होगा केस

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 14 Jan 2026 06:51 AM IST
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सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि विवाहित व्यक्ति किसी युवती से शादी का वादा करके संबंध बनाने के लिए सहमति पाता है तो यह छल है। भारतीय न्याय संहिता(बीएनएस) की धारा-69 के तहत यह दंडनीय अपराध है।

A married man's consent to have a relationship with a young woman by promising marriage is fraud
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि विवाहित व्यक्ति किसी युवती से शादी का वादा करके संबंध बनाने के लिए सहमति पाता है तो यह छल है। भारतीय न्याय संहिता(बीएनएस) की धारा-69 के तहत यह दंडनीय अपराध है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की एकल पीठ ने अलीगढ़ निवासी कुलदीप वर्मा की ट्रायल कोर्ट में चल रहे मुकदमे की कार्यवाही रद्द करने की मांग खारिज कर दी।

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कुलदीप के खिलाफ युवती ने क्वार्सी थाने में 20 जून 2025 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि वह 11 साल से उसके साथ लिव-इन में थी। इस दौरान कुलदीप ने शादी का झांसा देकर उसके साथ संबंध बनाए। बाद में पता चला कि वह विवाहित है और उसके तीन बच्चे हैं। मामला ट्रायल कोर्ट में चल रहा था। आरोपी ने मुकदमे की कार्यवाही रद्द करने की मांग कर हाईकोर्ट में अर्जी दायर की।

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अधिवक्ता ने दलील दी कि याची और युवती के संबंध आपसी सहमति से थे। पीड़िता को याची के विवाह की जानकारी थी। वहीं, कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि बीएनएस की धारा-69 विशेष रूप से शादी के झूठे वादे या अन्य छलपूर्ण साधनों से बनाए गए संबंध को अपराध घोषित करती है।

कोर्ट ने प्रमोद सूर्यभान पवार बनाम महाराष्ट्र मामले का हवाला दिया। कहा, वर्तमान मामले में आरोपी पहले से विवाहित था, वह जानता था कि शादी नहीं कर सकता, जो प्रथम दृष्टया छल को दर्शाता है। यह जांच का विषय है कि क्या पीड़िता को आरोपी के विवाह के बारे में पहले से पता था या नहीं। तथ्यों और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री को देखते हुए कोर्ट ने मुकदमे की कार्यवाही में हस्तक्षेप करने से इन्कार कर मुकदमा रद्द करने की अर्जी खारिज कर दी।

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