प्रयागराज में वायु प्रदूषण की स्थिति : 80 दिन बाद सबसे खराब हुई प्रयागराज की हवा, निर्माण कार्यों पर सवाल
प्रयागराज में लगातार दूसरे दिन वायु प्रदूषण बढ़ा। सिविल लाइंस में औसत एक्यूआई 152 दर्ज किया गया। शहर में चल रहे निर्माण कार्यों से उड़ती धूल को प्रदूषण बढ़ने की एक प्रमुख वजह माना जा रहा है। इसका असर सांस और दिल के मरीजों पर पड़ सकता है।
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शहर में न तो काला धुआं उगलने वाले बड़े उद्योग हैं और न ही दशहरे पर अन्य बड़े शहरों की तरह बड़े पैमाने पर रावण दहन होता है। सड़कों पर वाहनों का दबाव भी महानगरों की अपेक्षा कम है। इसके बावजूद शहर की हवा दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। लगातार दूसरे दिन वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने के पीछे बेतरतीब निर्माण कार्यों को भी जिम्मेदार माना जा रहा है।
सिविल लाइंस में शुक्रवार को औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 152 दर्ज किया गया। दिनभर में इसका अधिकतम स्तर 306 तक पहुंच गया। औसत एक्यूआई के आधार पर शहर की वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में पहुंच गई। इस स्तर के प्रदूषण से संवेदनशील लोगों को परेशानी हो सकती है। फेफड़ों और दिल के मरीजों के साथ ही अस्थमा से पीड़ित लोगों की समस्याएं बढ़ सकती हैं।
झूंसी में भी हवा की गुणवत्ता बिगड़ रही है। पिछले चार दिनों से सुबह के समय कई इलाकों में धुंध छाई रहती है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से नगर निगम परिसर में लगाई गई लाइव सेंसर मशीन के आंकड़ों के मुताबिक, शुक्रवार दोपहर एक बजे सिविल लाइंस क्षेत्र में पीएम-10 का औसत स्तर 152, झूंसी में 127 और तेलियरगंज में 108 दर्ज किया गया। इससे पहले चार अगस्त को प्रयागराज का एक्यूआई 59 दर्ज किया गया था।
सेंसर मशीनों की देखरेख का जिम्मा संभालने वाली स्वान इनवायरमेंटल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के सर्विस इंजीनियर शुभम सिंह का कहना है कि मौसम में बदलाव और दशहरे पर हुई आतिशबाजी के कारण वायु प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है।
हवा खराब होने से दिल और सांस के मरीजों की बढ़ सकती है परेशानी
हवा की गुणवत्ता खराब होने का असर दिल और सांस के मरीजों पर अधिक पड़ता है। ऐसे में उन्हें सुबह की सैर के दौरान मास्क लगाने की जरूरत है। इन मरीजों को हल्का व्यायाम करना चाहिए। सामान्य लोग भी मास्क लगाकर प्रदूषित हवा के संपर्क में आने से कुछ हद तक बच सकते हैं। - डॉ. आरके यादव, पूर्व प्रोफेसर, मेडिकल कॉलेज
दिनभर उड़ती है धूल, आंखों और त्वचा तक पहुंचते हैं कण
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से भले ही बढ़े हुए एक्यूआई के पीछे दशहरे पर रावण दहन और आतिशबाजी को कारण बताया जा रहा हो, लेकिन प्रयागराज में रावण दहन की संख्या इतनी अधिक नहीं है कि प्रदूषण का स्तर इतना बढ़ जाए। स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में जगह-जगह चल रहे बेतरतीब निर्माण कार्यों के कारण भी वायु प्रदूषण बढ़ रहा है।
सड़क और पुल निर्माण स्थलों पर बेतरतीब ढंग से खुदाई की जा रही है। इन स्थलों को न तो पर्दों से ढका गया है और न ही धूल उड़ने से रोकने के लिए नियमित रूप से पानी का छिड़काव किया जा रहा है। शहर के अलग-अलग हिस्सों में दिनभर धूल के गुबार छाए रहते हैं। धूल के कण आंखों और त्वचा से टकराते हैं, जिससे सड़क पर चलने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।