अखाड़े का दंगल : मठ बाघंबरी गद्दी में प्रस्तावित बैठक के लिए बहुमत का गणित बैठाने के लिए जोड़तोड़ तेज

अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 23 Oct 2021 04:00 PM IST
Prayagraj News :  महंत राजेंद्र दास और महंत रविंद्र पुरी।
Prayagraj News : महंत राजेंद्र दास और महंत रविंद्र पुरी। - फोटो : प्रयागराज
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अखाड़ा परिषद अध्यक्ष चुनाव के लिए 25 अक्तूबर को बाघंबरी गद्दी मठ में प्रस्तावित बैठक में बहुमत का गणित बैठने के लिए जोड़तोड़ तेज हो गई है। एक दिन पहले हरिद्वार में उदासीन परंपरा के निर्मल अखाड़े के सचिव देवेंद्र शास्त्री की अध्यक्षता में परिषद के नए अध्यक्ष और महामंत्री का एलान किया गया था। लेकिन शुक्रवार को ही कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए निर्मल अखाड़े की इस पूरी कमेटी को ही अमान्य करार दे दिया गया। इनकी जगह निर्मल के नए महंत रेशम सिंह बना दिए गए हैं। कहा जा रहा है कि अब निर्मल अखाड़े से रेशम सिंह को लेकर ही बहुमत हासिल करने की तैयारी की गई है।
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महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध हालत में मौत के बाद रिक्त हुए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पद पर चुनाव से पहले ही अखाड़ों में खींचतान बढ़ गई है। वैरागी परंपरा के तीन अखाड़े पहले से ही अलग हो चुके हैं। इस बीच संन्यासी परंपरा के सात में से दो अखाड़े अटल और महनिर्वाणी भी अलग हो गए हैं। ऐसे में सात अखाड़ों का बहुमत जुटाने के लिए उदासीन परंपरा के अखाड़ों पर ही दारोमदार टिका हुआ है। इसमें निर्मल और नया उदासीन अखाड़ा प्रमुख माने जा रहे हैं।

निर्मल अखाड़े में भी हुआ दो फाड़
उदासीन परंपरा के निर्मल अखाड़े के सचिव और परिषद के उपाध्यक्ष महंत देवेंद्र सिंह शास्त्री की अध्यक्षता में ही वैरागियों, उदासीनों और संन्यासियों के सात अखाड़ों ने मिलकर अलग परिषद बनायी थी। लेकिन, अब बदले घटनाक्रम में निर्मल अखाड़ा के एक धड़े ने 25 को बाघबंरी मठ में होने वाली अखाड़ा परिषद की बैठक में शामिल होने का एलान किया है। पंचायती अखाड़ा निर्मल के अध्यक्ष महंत रेशम सिंह ने परिषद की बैठक में कोठारी और अन्य पदाधिकारियों के साथ शामिल होने की घोषणा की है।

महंत रेशम सिंह का कहना है कि महंत ज्ञानदेव की कमेटी की स्टे अर्जी को पंजाब की तरनतारन की  कोर्ट ने निरस्त कर दिया है। ऐसे में ज्ञान सिंह और देवेंद्र सिंह की कमेटी वैध नहीं रह गई है। अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरि शनिवार को प्रयागराज आएंगे। इससे पहले उन्होंने भी निर्मल अखाड़े की पुरानी कमेटी को असांविधानिक बताया है। उनका कहना है कि रेशम सिंह ही निर्मल अखाड़े के अध्यक्ष हैं और उनको बैठक में आमंत्रित किया गया है। निरंजनी अखाड़े के सचिव रवींद्र पुरी ने भी सात अखाड़ों के बहुमत का दावा किया है।

खुद को महंत बताने वाले बाबा रेशम सिंह फर्जी: कोठारी
पंचायती अखाड़ा निर्मल के कोठारी महंत जसविंदर सिंह ने भूरी वाले गुट के बाबा प्रेम सिंह भूरीवाले और रेशम सिंह की ओर से खुद को महंत बताने को गलत करार दिया है। कोठारी महंत जसविंदर सिंह का कहना है कि महंत रेशम सिंह और बाबा प्रेम सिंह का निर्मल अखाड़े से कोई वास्ता नहीं है। 25 अक्तूबर को होने वाली बैठक में निर्मल अखाड़ा शामिल नहीं होगा।

अध्यक्ष पद हासिल करने के लिए संन्यासी अखाड़े की ओर से षड्यंत्र किया जा रहा है। परिषद का चुनाव हरिद्वार में हो चुका है। अब किसी चुनावी बैठक का औचित्य नहीं है। हाल में ही षोडशी भंडारे और चादर विधि में निर्मल अखाड़े के अध्यक्ष महंत ज्ञान सिंह ने ही हिस्सा लिया था। अब स्वार्थ के लिए उनको फर्जी बताया जा रहा है। -महंत देवेंद्र सिंह शास्त्री, सचिव निर्मल अखाड़ा 
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