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टिप्पणी: 'महिलाएं आनंद की वस्तु' पर उच्च न्यायालय ने जताई नाराजगी, कहा- पुरुषवादी मानसिकता पर सख्ती जरूरी

Thu, 05 Aug 2021 12:54 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: शाहरुख खान Updated Thu, 05 Aug 2021 12:54 AM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि शादी का प्रलोभन देकर यौन संबंध को दुष्कर्म का अपराध माना जाए। झूठा वादा करके यौन संबंध बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति को रोकने के लिए सरकार एक स्पष्ट और मजबूत कानून बनाए।

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Allahabad High Court says that sexual intercourse by inducement of marriage should be treated as an offense of rape
फाइल फोटो

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि शादी का झूठा वादा करके यौन संबंध बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति को रोकने के लिए सरकार एक स्पष्ट और मजबूत कानूनी ढांचा तैयार करें। कोर्ट ने इस प्रवृत्ति पर कठोर टिप्पणी करते हुए कहा कि 'महिलाएं आनंद की वस्तु है' इस पुरुष वर्चस्व वादी मानसिकता से सख्ती से निपटना जरूरी है ताकि महिलाओं में सुरक्षा की भावना पैदा हो और लैंगिक असमानता को दूर करने के संवैधानिक लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।
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कोर्ट ने कहा कि दुष्कर्म से महिला के जीवन और मस्तिष्क पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। उसे गंभीर शारीरिक व मानसिक पीड़ा से गुजरना होता है। शादी करने का झूठा वादा कर यौन संबंध बनाना कानून में दुष्कर्म का अपराध होना चाहिए। आज कल यह चलन बन गया है कि अपराधी धोखा देने के इरादे से शादी का प्रलोभन देकर यौन संबंध बनाते हैं। 
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देश की बहुसंख्यक महिला आबादी में शादी एक बड़ा प्रमोशन होता है और वे आसानी से इन परिस्थितियों का शिकार हो जाती है जो उनके यौन उत्पीड़न का कारण बनता है। इस तरह के मामले दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं। क्योंकि अपराधी समझता है कि वह कानून का फायदा उठाकर दंड से बच जाएगा। 
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इसलिए विधायिका के लिए आवश्यक है कि ऐसे मामलों से निपटने के लिए स्पष्ट और विशेष कानूनी ढांचा तैयार करें जहां अपराधी विवाह का झूठा वादा कर यौन संबंध बनाते हैं। खासकर एक बार ही यौन संबंध बनाने के मामलों में या कम समय के लिए संबंध बनाने के मामलों में।

कोर्ट ने कहा कि जब तक ऐसा कानून नहीं बन जाता अदालतों को सामाजिक वास्तविकता और मानवीय जीवन की आवश्यकता को देखते हुए ऐसी महिलाओं को संरक्षण देना जारी रखना चाहिए जो कि शादी के झूठे वादे के कारण प्रताड़ित हुई है। या जहां परिस्थितियां ऐसा दर्शा रही हैं कि अभियुक्त कभी भी शादी का वादा पूरा नहीं करना चाहता था या वह इस प्रकार का वादा पूरा करने में सक्षम नहीं था क्योंकि या तो वह पहले से शादीशुदा था या फिर उसने अपनी जाति, धर्म, नाम आदि छिपा कर संबंध बनाए थे। 

कोर्ट ने कहा कि झूठा वादा कर यौन संबंध बनाने की प्रवृत्ति को गलत तथ्यों के आधार पर ली गई सहमति माना जाना चाहिए और इसे दुष्कर्म की श्रेणी का अपराध माना जाए। ऐसे मामलों में अदालते मूक दर्शक नहीं बन सकती हैं और उन लोगों को लाइसेंस नहीं दिया जा सकता है जो मासूम लड़कियों का उत्पीड़न करते हैं और उनके साथ यौन संबंध बनाते हैं। 

कानपुर के हर्षवर्धन यादव की आपराधिक अपील खारिज करते हुए न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि मौजूदा मामले में पीड़िता और अभियुक्त एक दूसरे को पहले से जानते थे अभियुक्त ने शादी का वादा किया और लगातार शादी की बात और वादा करता रहा। 

जब पीड़िता ट्रेन से कानपुर जा रही थी तो आरोपी ने उससे मिलने की इच्छा जाहिर की और कोर्ट मैरिज के दस्तावेज तैयार करने की बात कहकर उसे होटल में बुलाया। पीड़िता होटल पहुंची तो आरोपी ने उससे यौन संबंध बनाए। यह उन दोनों के बीच पहला और आखरी यौन संबंध था। 

यौन संबंध बनाने के तुरंत बाद आरोपी ने शादी करने से न सिर्फ इनकार कर दिया बल्कि पीड़िता को गालियां दी और जातिसूचक अपशब्द कहे। जमानत प्रार्थना पत्र में या कहीं भी नहीं कहा गया है कि अभियुक्त अभी भी उससे विवाह करने का इच्छुक है। 

इससे पता चलता है कि वह शुरू से ही पीड़िता से विवाह करने का झूठा वादा करता रहा और उसने पीड़िता से यौन संबंध बनाने  के लिए उस पर भावनात्मक दबाव डाला और जैसे ही अपने उद्देश्य में सफल हुआ उसने तुरंत पीड़िता से शादी करने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने अपराधिक अपील खारिज कर दी है।

इस मामले में बचाव पक्ष की दलील थी कि अभियुक्त और पीड़िता एक दूसरे को लंबे समय से जानते थे और उनके बीच आपसी सहमति से संबंध स्थापित हुआ। याची को ब्लैकमेल करने के इरादे से पीड़िता ने झूठी शिकायत दर्ज कराई है कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। इस मामले में पीड़िता ने कानपुर के कलेक्टर गंज थाने में दुष्कर्म और एससी एसटी एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है।
 
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