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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Opening a 'B-Class' history sheet without a solid basis is an assault on liberty; High Court quashes the order

High Court : बिना ठोस आधार के बी-क्लास हिस्ट्रीशीट खोलना स्वतंत्रता पर हमला, हाईकोर्ट ने रद्द किया आदेश

Mon, 17 Aug 2026 02:26 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 17 Aug 2026 02:26 PM IST
सार

Allahabad High Court : बी-क्लास हिस्ट्रीशीट खोलने को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि महज कई मुकदमे दर्ज होना किसी व्यक्ति को पेशेवर अपराधी मानने के लिए पर्याप्त नहीं है। बिना ठोस आधार के हिस्ट्रीशीट खोलना व्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है। इसी टिप्पणी के साथ कोर्ट ने मेजा निवासी सत्येंद्र सिंह की बी-क्लास हिस्ट्रीशीट खोलने का आदेश रद्द कर दिया।

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Opening a 'B-Class' history sheet without a solid basis is an assault on liberty; High Court quashes the order
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि बिना ठोस आधार के किसी व्यक्ति की बी-क्लास हिस्ट्रीशीट खोलना उसकी स्वतंत्रता पर हमला है। हिस्ट्रीशीट खोलने की कार्रवाई के लिए पुलिस अधिकारियों को गंभीरता से विचार करना होगा। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने बी क्लास हिस्ट्रीशीट जारी करने का आदेश रद्द कर दिया।

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प्रयागराज मेजा निवासी याची सत्येंद्र सिंह उर्फ डॉक्टर के खिलाफ मेजा थाने में मारपीट, गालीगलौज, धमकी, तोड़फोड़, घर में घुसना, रंगदारी, गंभीर चोट पंहुचाने और गुंडा एक्ट के तहत अलग-अलग कुल आठ प्राथमिकी दर्ज थी। इसी आधार पर फरवरी 2020 में मेजा पुलिस की ओर से हिस्ट्रीशीट खोलने के प्रस्ताव पर एसएसपी ने मंजूरी दी थी। याची ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।

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याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि सिर्फ कई मुकदमे दर्ज होना बी-क्लास हिस्ट्रीशीट खोले जाने का पर्याप्त आधार नहीं है। इसके लिए पेशेवर अपराधी होने वाला आधार होना चाहिए। हिस्ट्रीशीट खोलने से पहले के पांच साल तक याची के खिलाफ कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई। ऐसे में उसे पेशेवर अपराधी नहीं कहा जा सकता।

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कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि बी-क्लास हिस्ट्रीशीट पेशेवर अपराधियों के लिए होती है। केवल यह तथ्य कि किसी व्यक्ति के खिलाफ अलग-अलग प्रकृति के कई मुकदमे दर्ज हैं, उसे पेशेवर अपराधी मानने के लिए पर्याप्त नहीं है। हाईकोर्ट ने विशेष रूप से प्रयागराज के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की ओर से हिस्ट्रीशीट खोलने की मंजूरी पर टिप्पणी की।

अदालत ने कहा कि यह मंजूरी रबर स्टाम्प जैसी थी। संबंधित अधिकारी को यह बताना चाहिए था कि संबंधित व्यक्ति को पेशेवर या विशेषज्ञ अपराधी क्यों माना गया। कोर्ट ने कहा कि जब किसी कार्रवाई का असर व्यक्ति की स्वतंत्रता पर पड़ सकता है तो स्पष्ट आधार दर्ज करना चाहिए। कोर्ट ने पाया कि हिस्ट्रीशीट खोलने से पहले के पांच वर्षों में याची के खिलाफ कोई नया अपराध दर्ज होने का उल्लेख नहीं था। अदालत ने बी-क्लास हिस्ट्रीशीट खोलने का आदेश रद्द कर दिया।

क्या है बी क्लास हिस्ट्रीशीट

अधिवक्ता हरबंश प्रसाद पांडेय के मुताबिक, ए श्रेणी की हिस्ट्रीशीट में वे अपराधी होते हैं जिन पर दुष्कर्म, डकैती, ट्रेन के डिब्बे काटना, रेलवे की संपत्ति पर बड़ी चोरी, कई हत्याएं करने के मुकदमे दर्ज होते हैं। वहीं, बी श्रेणी की हिस्ट्रीशीट उन अपराधियों के लिए खोली जाती है जो आदतन सामान्य अपराध कर रहे हों और समाज में उनकी छवि खराब हो। उत्तर प्रदेश में बी-क्लास हिस्ट्रीशीट पुलिस निगरानी से संबंधित एक रिकॉर्ड है। यूपी पुलिस रेगुलेशन के पैरा 228 में हिस्ट्रीशीट को ए और बी दो वर्गों में बांटा गया है। बी-क्लास हिस्ट्रीशीट ऐसे पुष्ट एवं पेशेवर अपराधियों के लिए होती है, जो डकैती, सेंधमारी, पशु चोरी और रेलवे मालगाड़ी चोरी से अलग अपराधों में पेशेवर रूप से संलिप्त हों। इसमें पेशेवर ठग, जालसाज, जेबकतरे, नकली सिक्का बनाने वाले, नशीले पदार्थों के तस्कर और पेशेवर गुंडे आदि शामिल किए गए हैं। 

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