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Atiq Ahmed : मौत के साथ मिट्टी में मिला माफिया अतीक का साम्राज्य, शूटरों पर अब तक आरोप तय नहीं

Mon, 15 Apr 2024 11:55 AM IST
विनोद सिंह सुनील यादव, प्रयागराज
सुनील यादव, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 15 Apr 2024 11:55 AM IST
सार

प्रयागराज सहित कई जनपदों में कई जनपदों में दहशत का पर्याय बने अतीक अहमद और अशरफ की हत्या को 15 अप्रैल को एक साल पूरे हो जाएंगे। कॉल्विन अस्पताल के गेट पर हुई गोलीबारी की घटना के पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। तीन शूटरों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर माफिया बंधुओं को मौत की नींद सुला दी। 

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Atiq Ahmed: Mafia Atiq's empire destroyed with death, charges not yet framed against shooters
अतीक अहमद-अशरफ। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

15 अप्रैल 2023 समय करीब सवा नौ बजे तीन नौजवानों ने गोलियां बरसा कर माफिया अतीक अहमद और अशरफ के साथ ही उनके जुर्म के साढ़े तीन दशक पुराने साम्राज्य को मिट्टी में मिला दिया। लेकिन, सालभर बाद भी गवाही से गुजरना तो दूर आरोप भी तय नहीं हो सके।

13 जुलाई को आरोप पत्र दाखिल

पुलिस अभिरक्षा में बेखौफ हत्या को अंजाम देने वाले लवलेश तिवारी, सनी सिंह और अरुण मौर्या को पुलिस ने मौके से गिरफ्तार किया। 89 दिन चली विवेचना के बाद 13 जुलाई 2023 को एसआईटी ने जिला अदालत में तीनों हत्यारोपियों के खिलाफ 56 पेज का आरोप पत्र, दो हजार पेज की केस डायरी के साथ दाखिल किया। इसके बाद प्रतापगढ़ जिला जेल में बंद हत्यारोपियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पेशी शुरू हुई।

Atiq Ahmed: Mafia Atiq's empire destroyed with death, charges not yet framed against shooters
अतीक अहमद। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

नहीं मिला वकील, टल गई तारीख

विचारण के शुरुआती चरण में आरोप तय किए जाने की पहली तारीख दस अगस्त नियत थी, लेकिन आरोपियों की गुजारिश पर अदालत ने वकील नियुक्त करने की मोहलत दे दी। फिर शुरू हुआ सिलसिला तारीख पर तारीख का, जो अब तक खत्म नहीं हुआ। हालांकि, अगली तारीख 16 अगस्त को लवलेश तिवारी और अरुण मौर्य की ओर से अधिवक्ता गौरव सिंह नियुक्त किए गए, लेकिन सनी सिंह वकील नहीं कर सका। बाद में अदालत के आदेश पर एमिकस क्यूरी के तौर पर सरकार ने उनकी पैरवी के लिए रत्नेश शुक्ला को नियुक्त किया।

Atiq Ahmed: Mafia Atiq's empire destroyed with death, charges not yet framed against shooters
माफिया अतीक अहमद और अशरफ। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

सुरक्षा का हवाला, प्रतापगढ़ से चित्रकूट जेल स्थानांतरण
 

वकील नियुक्त होने के बाद सुरक्षा का हवाला देते हुए तीनों आरोपियों को प्रतापगढ़ से चित्रकूट जिला जेल भेज दिया गया। आरोप तय करने की प्रक्रिया शुरू हुई तो जिला जज की अदालत से मामले को शीघ्र निस्तारण के लिए त्वरित न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया। अब इस मामले की सुनवाई त्वरित न्यायालय के न्यायाधीश दिनेश चंद्र शुक्ला की अदालत में चल रही है। अभियोजन की ओर से पैरवी कर रहे जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी गुलाब चंद्र अग्रहरि ने बताया कि तीनों आरोपियों ने तुर्की मेड जिगना पिस्टल से माफिया भाइयों पर गोलियां बरसाई थीं। मामले में विभिन्न कारणों से लगातार तरीके टालने की वजह से अब तक आरोप तय नहीं हो सके। मामले की अगली तारीख अप्रैल महीने के अंत में नियत है।

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Atiq Ahmed: Mafia Atiq's empire destroyed with death, charges not yet framed against shooters
माफिया अतीक अहमद और अशरफ। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

जरायम की दुनिया में 35 साल...पहली सजा 28 मार्च 2023

जरायम की दुनिया में लगभग साढ़े तीन दशक तक बादशाहत कायम रखने वाले माफिया अतीक के लिए वर्ष 2023 की 28 मार्च की तारीख काली साबित हुई। विधायक राजू पाल हत्याकांड के चश्मदीद उमेश पाल के 18 साल पहले हुए अपहरण मामले में उसे गुजरात की साबरमती जेल से जिला अदालत इलाहाबाद लाया गया। सैकड़ों मुकदमे दर्ज होने के बावजूद उसे पहली सजा 28 मार्च 2023 को इलाहाबाद की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सुनाई।

सजा सुनाने के पखवाड़े भर के भीतर उमेश पाल हत्याकांड मामले में पूछताछ के लिए साबरमती जेल से रिमांड पर प्रयागराज लाए गए अतीक को कोर्ट रूम में ही बेटे असद की पुलिस मुठभेड़ में हुई मौत की सूचना मिली। अदालत से बाहर लाए जाते समय अतीक की आंखों में गम और अशरफ की आंखों में गुस्सा साफ झलक रहा था।

इस दौरान उन्हें जनाक्रोश का सामना भी करना पड़ा था। अदालत परिसर में मौजूद भीड़ से उन पर जूते भी फेंके थे। इसके एक दिन बाद ही मेडिकल जांच के लिए कॉल्विन लाए गए अतीक-अशरफ की सनसनीखेज हत्या कर दी गई।

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Atiq Ahmed: Mafia Atiq's empire destroyed with death, charges not yet framed against shooters
माफिया अशरफ। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

न्यायिक आयोग ने नौ महीने तक की जांच, सैकड़ों गवाहों के दर्ज किए बयान

अतीक और उसके भाई अशरफ की हत्या की जांच कर रहे न्यायिक आयोग ने नौ महीने तक पड़ताल की। 18 जनवरी को जांच रिपोर्ट कैबिनेट में पेश कर दी गई थी। फिलहाल, इसे सार्वजनिक नहीं किया गया है। आयोग ने जांच में हर बिंदु पर बेहद बारीकी से तफ्तीश की। हत्याकांड के चश्मदीदों समेत सैकड़ों गवाहों के बयान दर्ज किए। आयोग के सदस्य कई बार प्रयागराज आए और घटनास्थल समेत हत्याकांड से संबंधित स्थलों के चप्पे-चप्पे की जांच की।

हत्या के दो दिन बाद गठन

शासन ने 17 अप्रैल को इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अरविंद कुमार त्रिपाठी की अध्यक्षता में जांच के लिए तीन सदस्यीय आयोग बनाया था। इसमें पूर्व डीजी इंटेलिजेंस सुबेश कुमार सिंह और पूर्व जिला न्यायाधीश बृजेश कुमार सोनी भी शामिल थे। आयोग ने जांच शुरू कर दी थी। हालांकि, सात मई को आयोग में इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायमूर्ति दिलीप बाबा साहब भोंसले और झारखंड उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह को भी शामिल किया। न्यायमूर्ति भोंसले को आयोग का अध्यक्ष बनाया गया। इस तरह सदस्यों की संख्या पांच हो गई।

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