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High Court : दो बालिगों के बीच लंबे समय तक चले रिश्ते को विवाह न होने पर दुष्कर्म नहीं कहा जा सकता

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 18 Jun 2026 06:54 PM IST
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सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि दो वयस्कों के बीच लंबे समय तक सहमति से चले संबंधों को विवाह न होने पर दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ दायर चार्जशीट, समन आदेश और पूरी आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।

High Court A long-term relationship between two consenting adults cannot be termed simply because
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि दो वयस्कों के बीच लंबे समय तक सहमति से चले संबंधों को विवाह न होने पर दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ दायर चार्जशीट, समन आदेश और पूरी आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकल पीठ ने संजय सरोज की अर्जी पर दिया है।



प्रयागराज के कर्नलगंज थाने में वर्ष 2019 में पीड़िता ने याची के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने वर्ष 2014 में उससे शादी का वादा कर उसके साथ संबंध बनाए। महिला ने दुष्कर्म, मारपीट, गाली-गलौज और धमकी सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। याची ने मुकदमे की पूरी कार्यवाही को रद्द करने की मांग में हाईकोर्ट में अर्जी दायर की।
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कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद पाया कि महिला और आरोपी करीब पांच वर्षों तक संपर्क में रहे और उनके बीच संबंध भी बने रहे। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि दुष्कर्म का मामला तभी बनता है जब यह साबित हो कि आरोपी की शुरू से ही शादी करने की कोई मंशा नहीं थी और उसने केवल संबंध बनाने के लिए झूठा वादा किया था। यदि सहमति से संबंध था और किसी कारण से विवाह नहीं हो पाता, तो उसे स्वतः दुष्कर्म नहीं माना जा सकता।
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अंततः हाईकोर्ट ने माना कि उपलब्ध साक्ष्यों से दुष्कर्म का प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता। अदालत ने कहा कि मुकदमे की कार्यवाही जारी रखना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। इसी आधार पर न्यायालय ने आरोपी के खिलाफ दाखिल चार्जशीट, संज्ञान आदेश और संपूर्ण आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।

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