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High Court : दुर्भावनापूर्ण झूठी एफआईआर पर आपराधिक कार्यवाही रद्द, कोर्ट ने कहा- नहीं बनता कोई मामला
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 22 May 2026 06:54 PM IST
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सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दुर्भावनापूर्ण झूठी एफआईआर और बिना किसी ठोस साक्ष्य के आपराधिक मुकदमा चलाने पर नाराजगी जताते हुए पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की एकल पीठ ने गाजीपुर निवासी राजकुमार और तीन अन्य की याचिका पर दिया।
अदालत का आदेश
- फोटो : istock
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दुर्भावनापूर्ण झूठी एफआईआर और बिना किसी ठोस साक्ष्य के आपराधिक मुकदमा चलाने पर नाराजगी जताते हुए पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की एकल पीठ ने गाजीपुर निवासी राजकुमार और तीन अन्य की याचिका पर दिया।
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शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि याचियों ने उसके रिश्तेदारों को आपत्तिजनक पत्र लिखकर उसकी शादी में व्यवधान डालने की कोशिश की। आरोप के आधार पर गाजीपुर के कासिमाबाद थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस ने मामले चार्जशीट दाखिल कर दी, जिस पर मोहम्मदाबाद के न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने संज्ञान लेकर समन जारी कर दिया।
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याचियों की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि विवेचना अधिकारी ने मामले में कोई स्वतंत्र साक्ष्य एकत्र नहीं किया। कथित आपत्तिजनक पत्रों का न तो कोई मूल दस्तावेज बरामद किया गया और न ही उनकी सत्यता की जांच की गई। केवल एफआईआर और बयान के आधार पर चार्जशीट दाखिल कर दी गई। कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता का पूरा मामला दुर्भावनापूर्ण अभियोजन का उदाहरण है। उसका कोई भविष्य नहीं है। याचियों के खिलाफ प्रथमदृष्टया मामला नहीं बनता।