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High Court : फाइनल रिपोर्ट क्लीन चिट नहीं, न्यायिक मजिस्ट्रेट ले सकते हैं अपराध का संज्ञान
Sun, 12 Jul 2026 03:58 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 12 Jul 2026 03:58 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा पुलिस की फाइनल रिपोर्ट आरोपी के लिए क्लीन चिट नहीं है। साक्ष्यों के आधार न्यायिक मजिस्ट्रेट अपराध का संज्ञान लेकर उन्हें तलब कर सकता है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा पुलिस की फाइनल रिपोर्ट आरोपी के लिए क्लीन चिट नहीं है। साक्ष्यों के आधार न्यायिक मजिस्ट्रेट अपराध का संज्ञान लेकर उन्हें तलब कर सकता है। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकल पीठ ने नाबालिग के अपहरण और सामूहिक सामूहिक दुष्कर्म के मुकदमे को रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी।
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कोर्ट ने स्पष्ट किया कि घटना के समय कहीं और मौजूद होने का आरोपी का दावा ट्रायल के दौरान साक्ष्य के आधार पर परखा जा सकता है, प्रारंभिक स्तर पर नहीं। मामला अलीगढ़ के अतरौली थाना क्षेत्र का है। नाबालिग के अपहरण और सामूहिक सामूहिक दुष्कर्म के आरोप में दर्ज मुकदमे की विवेचना के बाद पुलिस ने न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। कहा कि घटना के समय आरोपी घटना स्थल पर मौजूद नहीं थे। वे कहीं अन्य स्थान पर थे। यह निष्कर्ष पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन और कुछ गवाहों के बयानों के आधार पर निकाला था।
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इसके खिलाफ पीड़िता की मां ने विरोध याचिका दाखिल की, जिसे स्वीकार करते हुए विशेष न्यायाधीश ने मामले का संज्ञान लेते हुए आरोपियों को ट्रायल का सामना करने के लिए तलब कर लिया। इसके खिलाफ याचियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटाखटाया। हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। कहा कि जांच अधिकारी की राय मजिस्ट्रेट पर बाध्यकारी नहीं होती। यदि केस डायरी, पीड़िता के बयान व अन्य साक्ष्यों से प्रथमदृष्टया अपराध बनता है तो मजिस्ट्रेट फाइनल रिपोर्ट से असहमत होकर संज्ञान ले सकता है।
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