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High Court : उत्तराधिकार प्रमाणपत्र पर आपत्ति नहीं तो सिक्योरिटी बॉन्ड की शर्त उचित नहीं
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 16 Mar 2026 02:11 PM IST
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सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि उत्तराधिकार प्रमाणपत्र जारी करते वक्त हर मामले में भारी-भरकम धनराशि का सिक्योरिटी बॉन्ड जमा करने की शर्त उचित नहीं है।
अदालत(सांकेतिक)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि उत्तराधिकार प्रमाणपत्र जारी करते वक्त हर मामले में भारी-भरकम धनराशि का सिक्योरिटी बॉन्ड जमा करने की शर्त उचित नहीं है। उत्तराधिकारी मृतक का प्राकृतिक वारिस है और किसी अन्य पक्ष को इस पर आपत्ति नहीं है तो ऐसी कठोर शर्तों से छूट दी जा सकती है। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की एकल पीठ ने कानपुर नगर की अलका सिंघानिया की याचिका पर ट्रायल कोर्ट के सिक्योरिटी बॉन्ड की शर्त में छूट दे दी।
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शकुंतला देवी की मृत्यु के बाद उनकी बेटी अलका ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों के लिए उत्तराधिकार प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था। ट्रायल कोर्ट ने प्रमाण पत्र देने का आदेश तो दिया पर उतनी ही राशि का सिक्योरिटी और पर्सनल बॉन्ड जमा करने की शर्त लगा दी। इसको याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
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याची का कहना था कि जब दूसरी कानूनी वारिस (उनकी बहन) को कोई आपत्ति नहीं है। कोई अन्य दावेदार भी सामने नहीं आया है तो ऐसी सुरक्षा राशि जमा करने का निर्देश तर्कहीन है। हाईकोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के अरविंद नंदा बनाम राज्य मामले का हवाला देते हुए याची को सिक्योरिटी बॉन्ड जमा करने से छूट दे दी। साथ ही ट्रायल कोर्ट को आठ सप्ताह में उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश दिया है।