सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court It is unacceptable to deceased's wife run to court repeatedly due to administrative indifference

High Court : प्रशासनिक उदासीनता पर मृतक की पत्नी को बार-बार कोर्ट दौड़ाना अस्वीकार्य, यह है पूरा मामला

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 22 Mar 2026 03:44 PM IST
विज्ञापन
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किसान की मृत्यु के बाद आर्थिक सहायता के लिए भटक रही उसकी पत्नी के मामले में टिप्पणी करते हुए कहा है कि सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में प्रशासन की उदासीनता स्वीकार नहीं की जा सकती।

High Court It is unacceptable to deceased's wife run to court repeatedly due to administrative indifference
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किसान की मृत्यु के बाद आर्थिक सहायता के लिए भटक रही उसकी पत्नी के मामले में टिप्पणी करते हुए कहा है कि सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में प्रशासन की उदासीनता स्वीकार नहीं की जा सकती। कोर्ट ने कहा कि किसी कल्याणकारी योजना के लाभार्थी को अधिकारियों की लापरवाही के कारण बार-बार कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर करना सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। यह आदेश न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने लालसा देवी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।

Trending Videos


याची के पति किसान थे। जिनकी 2016 में भैंस के हमले में मृत्यु हो गई थी। इसके बाद पीड़िता ने योजना के तहत मुआवजे के लिए आवेदन किया, लेकिन उसका दावा देरी के आधार पर खारिज कर दिया गया। याची का आरोप था कि तत्कालीन लेखपाल ने समय पर दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए, जिससे आवेदन में देरी हुई। 2018 में लेखपाल के बदलने के बाद दस्तावेज मिले, लेकिन 2019 में समिति की बैठक में दावा समयसीमा पार बताते हुए खारिज कर दिया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


कोर्ट ने कहा कि याची ने समय के भीतर दावा प्रस्तुत किया था, लेकिन लेखपाल ने उसे आगे नहीं बढ़ाया। यहां तक कि स्थानांतरण के समय भी दस्तावेज अपने उत्तराधिकारी को नहीं सौंपे। कोर्ट ने कहा कि लेखपाल पर विभागीय कार्रवाई तो हुई, लेकिन उसे केवल चेतावनी देकर छोड़ दिया गया, जबकि पीड़िता को योजना का लाभ नहीं मिला। कोर्ट ने कहा कि यह योजना किसानों के परिवारों को अचानक आई आर्थिक संकट की स्थिति में तुरंत सहायता देने के लिए बनाई गई है। ऐसे में तकनीकी आधार पर दावे खारिज करना योजना की मूल भावना के खिलाफ है।

कोर्ट ने याची को राहत देते हुए बलिया के जिलाधिकारी को निर्देश दिया कि वह मामले पर दोबारा विचार कर कानून के अनुसार मेरिट के आधार पर निर्णय लें। मामला राज्य सरकार की मुख्यमंत्री किसान एवं सर्वहित बीमा योजना और मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना से जुड़ा है। जिसका उद्देश्य किसानों की मृत्यु या स्थायी विकलांगता की स्थिति में उनके परिवार को आर्थिक सहायता देना है।

अदालत ने कहा - "प्रशासनिक लापरवाही के कारण किसी जरूरतमंद को कल्याणकारी योजना से वंचित करना न्याय का उपहास है।"

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed