High Court : अहंकार में बंटा मम्मा-पापा का प्यार, जुदा हुए मासूम
इलाहाबाद हाईकोर्ट में मम्मा-पापा के अहंकार में दो मासूम भाई-बहन जुदा हो गए। कोर्ट को भारी मन से माता-पिता के प्यार का बंटवारा करना पड़ा।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट में मम्मा-पापा के अहंकार में दो मासूम भाई-बहन जुदा हो गए। कोर्ट को भारी मन से माता-पिता के प्यार का बंटवारा करना पड़ा। ढाई साल की मासूम सोमवार, मंगलवार और बुधवार को पापा का दुलार पाएगी जबकि छह साल के बेटे को मां का आंचल शनिवार, रविवार और स्कूल की छुट्टियों के दिनों में नसीब होगा।
यह फैसला न्यायमूर्ति संदीप जैन की अदालत ने मेरठ निवासी शिक्षिका मां की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनाया। करीब दो घंटे चली सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद लोगों की आंखें डबडबा गईं। माता-पिता से बातचीत के दौरान कोर्ट ने दोबारा एक होने की संभावनाएं भी तलाशीं लेकिन वे किसी भी हाल में साथ न रहने की जिद पर अड़े रहे। वहीं, बच्चों की मासूम बात और अंदाज से कोर्ट हैरान और परेशान भी हुई। अंतत: सर्वोत्तम हित के मद्देनजर कानून की कलम मासूमों की जुदाई का फैसला लिखने को मजबूर हो गई।
कोर्ट ने बेटे से बात की तो पहले बोला पापा पसंद है। मां सामने आई तो बोला, दोनों के साथ रहना है लेकिन मम्मा खेलने नहीं देती इसलिए पापा संग रहूंगा।
सीने से लिपट बेटी ने पोंछे मां के आंसू, फूट-फूटकर रोई
तीन महीने से पिता संग रह रही मासूम बेटी कोर्ट में लाई गई। मां को देख वह उनके सीने से लिपट गई। अपने नन्हें हाथों से मां के आंसू पोंछे। फिर दोनों एक-दूसरे को चूमकर फूट फूटकर रो पड़े। मां की गोद से पापा व दादी संग जाने को तैयार नहीं हुई। दादी लेकर आगे बढ़ीं तो रोती बेटी बोली मम्मा...मम्मा। यह भावुक दृश्य देख कोर्ट ने बेटी को मां के हवाले करने का आदेश दे दिया।
पिता बोले...कमाई अधिक है, बच्चों को बेहतर भविष्य दूंगा
बिल्डर पिता ने कहा कि मां की अपेक्षा उनकी आय अधिक है। वह बच्चों को बेहतर शिक्षा, अच्छी जीवनशैली और सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करा सकते हैं। बच्चों की अभिरक्षा उन्हें दी जाए।
मैं मां हूं, बच्चों को अलग नहीं करें
सरकारी शिक्षिका मां ने कहा कि वह भी बच्चों का बेहतर पालन-पोषण करने में पूरी तरह सक्षम हैं। भावुक होकर कहा कि एक मां से उसके बच्चों को अलग नहीं किया जाना चाहिए। मैं मां हूं, बच्चे मुझे ही मिलें।
शैक्षणिक भविष्य के लिए बेटे को मिला पिता का साथ
कोर्ट ने पाया कि बातचीत में बेटा तनाव में था। बयान पिता का रटाया लगा। जब मां दिखीं तो पलट गया। पिता बेटे को नामी स्कूल में पढ़ा रहा है। स्कूल घर से दो किलोमीटर दूर है। मां ज्यादा दूर रहती है। ऐसे में बच्चे का शैक्षणिक भविष्य पिता के साथ ज्यादा सुरक्षित है।