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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court sends Judicial Magistrate to Lucknow for training; order had been passed beyond jurisdiction.

यूपी : हाईकोर्ट ने न्यायिक मजिस्ट्रेट को प्रशिक्षण के लिए भेजा लखनऊ, अधिकार क्षेत्र के बाहर जाकर पारित किया था

Fri, 09 Oct 2026 02:53 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 09 Oct 2026 02:53 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कुशीनगर की इंचार्ज न्यायिक मजिस्ट्रेट के अपीलीय अदालत के फैसले के बाद दोषी की सजा निलंबित करने के मामले में नाराजगी जताई है।

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High Court sends Judicial Magistrate to Lucknow for training; order had been passed beyond jurisdiction.
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कुशीनगर की इंचार्ज न्यायिक मजिस्ट्रेट के अपीलीय अदालत के फैसले के बाद दोषी की सजा निलंबित करने के मामले में नाराजगी जताई है। कोर्ट ने न्यायिक मजिस्ट्रेट को एक सप्ताह के प्रशिक्षण के लिए न्यायिक प्रशिक्षण व शोध संस्थान (जेटीआरआई) लखनऊ से संबद्ध करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने 18 मार्च 2026 को पारित उनके आदेश को न्यायिक अनुशासनहीनता बताते हुए कहा कि इससे कानून की बुनियादी अवधारणाओं की समझ में कमी सामने आती है।

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न्यायमूर्ति मनोज बजाज की एकल पीठ ने यह आदेश नागा की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर दिया है। अधीनस्थ अदालत ने 25 सितंबर 2025 को नागा को दोषी ठहराया था। इसके खिलाफ दाखिल अपील को सत्र अदालत ने 18 मार्च 2026 को खारिज कर दोषसिद्धि बरकरार रखी। इसके बावजूद उसी दिन इंचार्ज न्यायिक मजिस्ट्रेट ने उसकी सजा 16 अप्रैल 2026 तक निलंबित कर दी, ताकि वह आगे अपील कर सके। जेल में बंद दोषी की ओर से अधिवक्ता ने यह मामला हाईकोर्ट के संज्ञान में लाया। 17 जुलाई को कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि अपीलीय अदालत के फैसले के बाद ट्रायल कोर्ट की सजा निलंबित करना उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर था।
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कोर्ट ने बीएनएसएस की धारा 430(3) का हवाला दिया। कहा कि ट्रायल कोर्ट सजा निलंबित कर सकता है, लेकिन इसके लिए उसे दोषी के अपील करने की मंशा से संतुष्ट होना जरूरी है। स्पष्टीकरण में न्यायिक अधिकारी ने माना कि आदेश अपीलीय अदालत के फैसले की अवहेलना में पारित हुआ। उन्होंने इसके लिए संबंधित लिपिक की ओर से फाइल और दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाने को वजह बताया। कोर्ट ने कहा कि यह स्पष्टीकरण कानून की बुनियादी अवधारणाओं की समझ के अभाव को दर्शाता है। कोर्ट ने अधिकारी के कॅरिअर के शुरुआती चरण को देखते हुए उन्हें चेतावनी देकर फिलहाल मामला समाप्त किया। 

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