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High Court : पुराने मुकदमों में संशोधन पर रोक का नया प्रावधान लागू नहीं, हाईकोर्ट ने की टिप्पणी

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 08 Mar 2026 06:41 AM IST
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सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल शुरू होने के बाद वादपत्र में संशोधन पर रोक लगाने वाले सीपीसी के आदेश छह नियम 17 के प्रावधान 2002 से पहले दाखिल मुकदमों में लागू नहीं होते। यह प्रावधान वर्ष 2002 में जोड़ा गया था।

High Court: The new provision prohibiting amendments to old cases is not applicable, the High Court commented.
कोर्ट (प्रतीकात्मक फोटो) - फोटो : एएनआई
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विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल शुरू होने के बाद वादपत्र में संशोधन पर रोक लगाने वाले सीपीसी के आदेश छह नियम 17 के प्रावधान 2002 से पहले दाखिल मुकदमों में लागू नहीं होते। यह प्रावधान वर्ष 2002 में जोड़ा गया था। इसके बाद के मुकदमों पर ही यह लागू होगा। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की एकल पीठ ने दयानंद की याचिका पर सुनवाई करते हुए गोरखपुर के ट्रायल कोर्ट को 29 साल पुराने मुकदमे को छह महीने में निस्तारित करने का आदेश दिया है।

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मामला 1997 के एक दीवानी वाद से जुड़ा है। सिविल जज की अदालत ने मुकदमे का ट्रायल शुरू होने और अत्यधिक देरी के आधार पर संशोधन आवेदन खारिज कर दिया था। वहीं, हाईकोर्ट ने इस आदेश को रद्द कर कहा कि वाद 1997 का है। इसलिए इस पर 2002 का प्रतिबंधात्मक नियम लागू नहीं होगा। कोर्ट ने स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद बनाम टाउन म्युनिसिपल काउंसिल के फैसले का हवाला दिया। कहा कि अदालत को पुराने मामलों में संशोधन के प्रति उदार दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

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क्या है 2002 का प्रतिबंध

सीपीसी (दीवानी प्रक्रिया संहिता) के नियम 17 में 2002 में किए गए संशोधन के अनुसार एक बार ट्रायल शुरू होने के बाद वादों में संशोधन की अनुमति केवल विशेष परिस्थितियों में ही दी जाती है।

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