Prayagraj : माघ मेले में सुविधाओं से भरपूर हैं हाईटेक शिविर, मेले में दिखने लगी धर्म और अध्यात्म की झलक
संगम की रेती पर तीन जनवरी शुरू हो रहे माघ मेला क्षेत्र में तंबुओं का शहर लगभग आबाद हो चुका है। पौष पूर्णिमा के पहले स्नान पर्व के साथ ही माघ मेले की औपचारिक शुरुआत और कल्पवास शुरू हो जाएगा।
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संगम की रेती पर तीन जनवरी शुरू हो रहे माघ मेला क्षेत्र में तंबुओं का शहर लगभग आबाद हो चुका है। पौष पूर्णिमा के पहले स्नान पर्व के साथ ही माघ मेले की औपचारिक शुरुआत और कल्पवास शुरू हो जाएगा। माघ मेले देश के कोने-कोने से साधु -संत भी पहुंचने लगे हैं। जिनके भगवा थीम पर के पंडाल तैयार किए गए हैं। कुछ में काम तेजी से चल रहा है। वहीं कई साधु-संतों के शिविर भी पूरी तरह से हाईटेक बनाए गए हैं।
माघ मेला क्षेत्र के इन शिविरों में पहुंचने पर ऐसा लग रहा है कि किसी फाइव स्टार होटल में आ गए हैं। ओल्ड जीटी रोड पर बसाए गए दंडी बाड़ा में अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के अध्यक्ष स्वामी ब्रह्माश्रम महाराज का शिविर अपने आप में अनूठा है। इस शिविर में पेड़-पौधे लगाए गए हैं। वही फर्श पर मखमली कालीन बिछी है।
शिविर में पूरी तरह से धर्म और अध्यात्म की झलक देखने को मिल रही है। बाहर ही नवग्रह के बने चित्र में ग्रहों और देवी देवताओं की स्थिति को दर्शा रहा है। अंदर की ओर बैठक कक्ष तैयार किया गया है। जिसमें एक कोने में देवी देवताओं को स्थापित किया गया है। बैठक कक्ष में ही दंडी संन्यासी परिषद के अध्यक्ष स्वामी का आसन लगाया गया है। उसके पीछे श्रीयंत्र स्थापित किया गया है। जबकि आसन के ठीक ऊपर आदि गुरु शंकराचार्य की तस्वीर लगाई गई है।
इस शिविर में स्वामी ब्रह्माश्रम महाराज का शयन कक्ष भी हाईटेक तरीके से बनाया गया है। इसमें भी चारों तरफ अंदर पीले रंग के कपड़े का प्रयोग किया गया है। कल्पवास में भूमि पर शयन किया जाता है। इसलिए कालीन पर ही सोने के लिए बिस्तर लगाया गया है। इस शयन कक्ष में टेलीविजन भी लगाया गया है।
अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के अध्यक्ष स्वामी ब्रह्माश्रम महाराज के मुताबिक वह लोग माघ महीने में आकर देश और दुनिया से कट जाते हैं। लेकिन यहां धर्म अध्यात्म और भक्ति के साथ ही देश दुनिया की खबरों से जुड़े रहें इसलिए यहां पर टेलीविजन भी लगा रखा है। उनके मुताबिक धर्म भक्ति से बड़ी राष्ट्रभक्ति है। इसलिए वह राष्ट्र से भी जुड़े रहना चाहते हैं। उनके मुताबिक माघ मेले की व्यवस्था योगी सरकार ने मिनी कुंभ की तर्ज पर की है। शिविरों में तमाम व्यवस्थाएं सरकार की ओर से दी जाती हैं लेकिन जो व्यवस्थाएं सरकार से नहीं मिलती है व संत खुद जुटाते हैं।
इस बार माघ मेले में अद्भुत संयोग
स्वामी ब्रह्माश्रम महाराज के मुताबिक इस बार माघ मेले में 75 वर्षों के बाद अद्भुत संयोग बन रहा है। जबकि सूर्य मकर राशि में अपने ही दिन यानी रविवार को प्रवेश कर रहे हैं। ऐसे में इस बार माघ मेले में स्नान,दान और कल्पवास का विशेष महत्व है। स्वामी ब्रह्माश्रम महाराज का श्रद्धालुओं से कहना है कि जो लोग महाकुंभ में नहीं आ पाए वह इस माघ मेले में आकर पुण्य के भागी बन सकते हैं।
