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जंतर-मंतर पार्ट दो: जेन-जी में पैठ के लिए पुराने वादों में नए मुद्दों की तलाश

Wed, 19 Aug 2026 07:21 PM IST
विनोद सिंह योगेश नारायण दीक्षित, प्रयागराज
योगेश नारायण दीक्षित, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 19 Aug 2026 07:21 PM IST
सार

काक्रोच जनता पार्टी (सीजेपी) जंतर-मंतर पार्ट दो के लिए बड़ी जमीन तैयारी कर रही है। अपने साथ जेन-जी को और मजबूती से जोड़ने के लिए अब भर्तियों में गड़बड़ियों के पीड़ितों को भी बड़े पैमाने पर साथ लाने की तैयारी चल रही है।

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Jantar Mantar Part Two: Seeking new issues within old promises to connect with Gen Z.
सिविल लाइंस में प्रदर्शन करते छात्र। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

काक्रोच जनता पार्टी (सीजेपी) जंतर-मंतर पार्ट दो के लिए बड़ी जमीन तैयारी कर रही है। अपने साथ जेन-जी को और मजबूती से जोड़ने के लिए अब भर्तियों में गड़बड़ियों के पीड़ितों को भी बड़े पैमाने पर साथ लाने की तैयारी चल रही है। उनकी नजर प्रयागराज में डेलीगेसी में रहने वाले वे करीब डेढ़ लाख युवा हैं, जो जागरूक भी हैं और मुखर भी। इसके लिए पिछले करीब 10-12 वर्ष में निकली भर्तियों, उनकी चयन प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियों, गलत और सिलेबस से बाहर के सवालों की फेहरिस्त तैयार की जा रही है।

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नई दिल्ली से सीजेपी के कुछ युवाओं की गुपचुप चल रही मुहिम में प्रयागराज और आसपास के जेन-जी के वो चेहरे भी जुड़ रहे हैं, जो पिछले दिनों यहीं स्थित एक आयोग की परीक्षा के 29 सवाल आउट ऑफ सिलेबस होने पर पर्दे के पीछे रहकर मामले को हाईकोर्ट तक ले गए थे। बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट में उस आयोग ने 33 सवालों को लेकर एक तरह से अपनी गलती मान ली थी। इसके अलावा इस मुहिम को वे युवा भी आगे बढ़ा रहे हैं, जो कई भर्ती परीक्षा लेट होने के कारण ओवरएज हो जा रहे हैं।
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उप्र लोक सेवा आयोग से लेकर शिक्षा चयन आयोग तक पर नजर

प्रयागराज की डेलीगेसी में रहने वाले जेन-जी को तर्क के साथ खुद से जोड़ने और उनका हितैषी साबित करने के लिए सीजेपी की ओर से बाकायदा प्रश्न-समूह तक तैयार किया गया है। इसमें पूछा जा रहा है कि आप किस परीक्षा में कब बैठे। उस परीक्षा में कोई गड़बड़ी क्या उस समय हुई थी। क्या सवाल सिलेबस से बाहर थे। क्या सवाल गलत होने पर सबको समान अतिरिक्त नंबर मिलने का कोई फायदा हुआ था। इसके साथ ही डेलीगेसी के बच्चों को सबसे ज्यादा इस बात पर जोड़ा जा रहा है कि भर्ती परीक्षाएं समय पर न कराने से उनको कितना नुकसान हो रहा है।

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ऐसे बड़े सवाल किए जा रहे तैयार

1-करीब 12 साल पहले जब यूपीपीएससी की परीक्षा गड़बड़ी के लिए आयोग के सदस्यों को घेरने के लिए आंदोलन हुआ था, तब वर्तमान सरकार ने जो वादे किए थे, उन पर कितना अमल हुआ। इसके बाद क्या परीक्षा के पैटर्न में सुधार दिखा।
2- शिक्षा चयन आयोग बनने के बाद क्या शिक्षकों की रिक्त सीटों पर भर्ती समय पर हो सकीं। बार-बार अधियाचन अपलोड होने में देरी, अधियाचन में गड़बड़ी और फिर बार-बार परीक्षा टलने से कितना नुकसान जेन-जी को उठाना पड़ा है।
3- विभिन्न विभागों में छोटी-छोटी भर्तियां अटकी हैं। उनका डाटा तैयार किया जा रहा है कि साल 2014 से पहले उस विभाग या कैडर में कितने पद होते थे, अब कितने हैं और उनमें कितने पदों पर किसी की तैनाती है। भर्ती न होने का मुद्दा उठेगा।
4- सबसे अहम, बड़ी संख्या में जेन-जी के सामने कुछ विशेषज्ञ बताएंगे कि तकनीक का सहारा लेकर कितनी आसानी से लागू किया जा सकता था भर्ती कैलेंडर। लेकिन, जिम्मेदारों के ध्यान न देने से पहले भर्तियों और फिर परिणाम में देरी हुई।

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