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Magh Mela : फौजी रंजीत ने 20 साल पहले त्यागा अन्न, जी रहे फलाहारी जीवन, एक महीने का कर रहे कल्पवास

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 14 Jan 2026 08:55 PM IST
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सार

माघ मेले में कल्पवास करने आए सेवानिवृत्त फौजी रंजीत सिंह ने 20 साल पहले अन्न त्याग का त्याग कर दिया था और तब से अब तक फलाहारी जीवन जी रहे हैं। वह अपनी पत्नी के साथ रायबरेली से प्रयागराज में एक महीने का कल्पवास करने पहुंचे हैं।

Magh Mela: Soldier Ranjit gave up food 20 years ago, living a fruitarian life, doing a month-long Kalpavas
रंजीत सिंह उर्फ फौजी बाबा। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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माघ मेले में कल्पवास करने आए सेवानिवृत्त फौजी रंजीत सिंह ने 20 साल पहले अन्न त्याग का त्याग कर दिया था और तब से अब तक फलाहारी जीवन जी रहे हैं। वह अपनी पत्नी के साथ रायबरेली से प्रयागराज में एक महीने का कल्पवास करने पहुंचे हैं। रंजीत सिंह भारतीय सेना के सेवानिवृत्त फौजी हैं और 21 साल तक फौज में रहकर उन्होंने देश की सेवा की।

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वर्ष 2005 में वह फौज से सेवानिवृत्त हुए। रंजीत सिंह ने वर्ष 2006 में अन्न का त्याग करने का दृढ़ संकल्प लिया। 20 साल से वह इस संकल्प पर कायम हैं। रंजीत सिंह की उम्र 60 साल है और वह अन्न ग्रहण किए बिना भी फिट दिखते हैं। वह कहते हैं कि अन्न त्यागने का फैसला उनका अपना था और इससे उनकी सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ा है।

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रंजीत सिंह के मुताबिक वह कई वर्षों से माघ और कुंभ मेले में आते रहे हैं और बड़े-बड़े ऋषि मुनियों और तपस्वियों से उनकी मुलाकात हुई। उन्होंने देखा कि वे लोग सिर्फ फल खाकर जीते हैं। उनसे प्रभावित होकर रंजीत ने सोचा कि एक फौजी क्या नहीं कर सकता। इस संकल्प के साथ उन्होंने अन्न त्यागने का फैसला लिया।



बालाजी मंदिर में लिया अन्न त्यागने का फैसला

वर्ष 2006 में रंजीत बालाजी मंदिर गए और वहां उन्होंने अन्न त्यागने का फैसला लिया। पिछले 18 वर्षों से वह बजरंगबली की सेवा कर रहे हैं। वह बताते हैं कि जब उनका मन होता है तो फल खा लेते हैं, नहीं तो ऐसे भी काम चल जाता है। कल्पवास के दौरान उनकी दिनचर्या में सुबह उठकर स्नान कर पूजा-पाठ करना शामिल है। परिवार में उनकी पत्नी के अलावा दो बच्चे भी हैं। रंजीत मूल रूप से रायबरेली के लालगंज के रहने वाले हैं। रंजीत सिंह के मुताबिक उनपर बजरंगबली की कृपा और मां गंगा का आशीर्वाद है।

गांव में कराया मंदिर का निर्माण

रंजीत सिंह ने अपने गांव में मंदिर का निर्माण कराकर बजरंगबली की मूर्ति स्थापित कराई है। उनका मानना है कि नियमित दिनचर्या फलाहार से भी अधिक जरूरी है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ और मस्त जीवन का एक अलग सिद्धांत होना चाहिए।

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