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UP: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के वकील बोले- खुद के जाल में फंस रहे आशुतोष ब्रह्मचारी, फिर दिया झूठा हलफनामा

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 13 Mar 2026 05:02 PM IST
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सार

जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के अधिवक्ता डॉ. पीएन मिश्रा ने कहा  कि शंकराचार्य और उनके शिष्य पर मुकदमा दर्ज कराने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी अपने ही बुने जाल में फंसते जा रहे हैं।

Shankaracharya Avimukteshwarananda's lawyer said - Ashutosh Brahmachari is getting trapped in his own trap
पत्रकारों से बातचीत करते शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के अधिवक्ता डॉ. पीएन मिश्रा - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के अधिवक्ता डॉ. पीएन मिश्रा ने कहा  कि शंकराचार्य और उनके शिष्य पर मुकदमा दर्ज कराने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी अपने ही बुने जाल में फंसते जा रहे हैं। वह सफेद झूठ का पुलिंदा न्यायालय के सामने प्रस्तुत कर रहे हैं। कहा कि शंकराचार्य की ओर से इनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराने के लिए जल्द ही न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा। जिला न्यायालय में सुनवाई के सिलसिले में स्वामी मुकुंदानंद गिरि के साथ प्रयागराज पहुंचे डॉ. मिश्र ने मीडिया से बातचीत में कहा कि आशुतोष ब्रह्मचारी ने कोर्ट में शपथ पत्र देकर शंकराचार्य और उनके शिष्य मुकंदानंद का पासपोर्ट जब्द करने की गुहार लगाई है, ताकि वह विदेश न भाग सकें।

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शंकराचार्य और उनके शिष्य के पास नहीं है पासपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता डॉ. मिश्र बोले- पहली बात कि शंकराचार्य और उनके शिष्य मुकुंदानंद के पास कोई पासपोर्ट नहीं है। दूसरी बात धर्मशास्त्रों में धर्माधीश या शंकराचार्य को देश की सीमा के बाहर जाने पर निषिद्ध किया गया है। वह धर्म प्रचार के लिए विदेश नहीं जा सकते हैं, क्योंकि वह समुद्र को नहीं लांघ सकते हैं। अगर जाते हैं तो पतित घोषित हो जाएंगे। 1940 में विदेश यात्रा करने पर पुरी के शंकराचार्य को पतित घोषित किया जा चुका है। भारत का अंग होने के बावजूद शंकराचार्य पाकिस्तान तक नहीं जा सकते हैं क्योंकि वहां विधर्मियों का शासन है।
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पत्रकारों से बातचीत करते शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्य मुकुंदानंद गिरि। - फोटो : अमर उजाला।

जांच में आशुतोष ब्रह्मचारी पर हमले की नहीं हुई पुष्टि

डॉ. मिश्रा ने दावा किया कि आशुतोष ब्रह्मचारी ने शंकराचार्य और उनके तीन चार शिष्यों को फंसाने के लिए ट्रेन में अपने ऊपर फर्जी हमले की साजिश रची थी जो कि जांच में फर्जी पाई गई। सीएमओ की ओर से गठित मेडिकल जांच में पाया गया है कि नाक में खरोंच जैसा निशान है। जख्म इतना मामूली है कि टांके भी नहीं लगाए जा सकते। यह किसी धारधार हथियार से हमला नहीं किया गया है। दूसरी ओर से जीआरपी के एसपी ने भी अपनी जांच में मामले को असत्य पाया। 50 से अधिक सीसीटीवी की जांच में यह पाया गया कि इनकी बोगी में कोई नहीं चढ़ा था। कोच अटेंडेंट ने बयान दिया है कि वह मौके पर मौजूद था। जब यह बाथरूम में गए तो सही सलामत थे, निकलने के बाद बोले कि हमला हो गया। टीटीई ने प्राथमिक उपचार के लिए कहा तो मना कर दिया और 70  किलोमीटर यात्रा करके प्रयागराज पहुंचे और यहां मेडिकल कराया। 

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