सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court No one can be convicted of crimes like murder and robbery basis of identification parade

High Court : हत्या-लूट जैसे अपराध के लिए सिर्फ पहचान परेड के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहरा सकते

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 13 Mar 2026 11:48 AM IST
विज्ञापन
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पहचान परेड दो महीने से अधिक की देरी से कराई गई, जिसका संतोषजनक कारण नहीं बताया गया। अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ अपराध संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।

High Court No one can be convicted of crimes like murder and robbery basis of identification parade
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पहचान परेड दो महीने से अधिक की देरी से कराई गई, जिसका संतोषजनक कारण नहीं बताया गया। अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ अपराध संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। ऐसे में केवल पहचान परेड के आधार पर हत्या और लूट जैसे अपराध के लिए किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने हत्या, लूट मामले में 39 साल पुराने मामले में दो आरोपियों को ट्रायल कोर्ट से मिली उम्रकैद की सजा रद्द कर दी।

Trending Videos


मामला सहारनपुर के देवबंद क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार 12 अप्रैल 1986 की शाम विष्णु कुमार के पास एक व्यक्ति आया और कार्यक्रम के लिए वीसीआर (वीडियो कैसेट रिकॉर्डर) किराये पर ले जाने की बात कही। उसने 30 रुपये दिए और बाकी रकम घर पहुंचने पर देने की बात कही। इसके बाद विष्णु कुमार रिश्तेदार के घर से वीसीआर लेकर उस व्यक्ति के साथ जा रहा था। रास्ते में तीन अन्य युवक आ गए और वीसीआर छीनने की कोशिश की। विरोध पर विष्णु कुमार पर चाकू से हमला कर दिए और वीसीआर लेकर भाग गए। घायल विष्णु कुमार को अस्पताल ले जाया गया, जहां 15 अप्रैल 1986 को उनकी मृत्यु हो गई।

विज्ञापन
विज्ञापन

हाईकोर्ट ने रद्द कर दी उम्रकैद की सजा

मामले में सत्र न्यायालय ने इरफान, शान इलाही व चांद मियां को हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। मामला हाईकोर्ट में आने पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने दलील दी कि एफआईआर में किसी भी आरोपी का हुलिया या पहचान संबंधी विवरण नहीं दिया गया है। जबकि, गवाहों ने घटना को करीब से देखने का दावा किया है। मृत्यु कालिक कथन और एफआईआर में घटना के तरीके में भी अंतर है। पहचान परेड घटना के दो महीने बाद कराई गई। वीसीआर की बरामदगी जिन गवाहों के सामने दिखाई गई, वे मृतक के रिश्तेदार और परिचित थे। इसलिए बरामदगी भी संदेहास्पद है।

वहीं, शासकीय अधिवक्ता ने दलील दी थी कि युवक को गंभीर चोटें आई थीं और बाद में उसकी मृत्यु हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और गवाहों के बयान से यह सिद्ध होता है कि उस पर धारदार हथियार से हमला किया गया था। आरोपियों की पहचान परेड कराई गई थी। वीसीआर भी बरामद हुआ था। इसलिए सत्र न्यायालय का फैसला सही है। कोर्ट ने इरफान और शान इलाही की दोषसिद्धि और सजा रद्द कर दी। तीसरे आरोपी चांद मियां की अपील उसके निधन के कारण समाप्त हो चुकी है। कोर्ट ने कहा कि दोनों आरोपी जमानत पर हैं। इसलिए उन्हें आत्मसमर्पण करने की आवश्यकता नहीं है और उनके जमानत बंधपत्र भी निरस्त किए जाते हैं। ब्यूरो

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed