सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court says warning is not a punishment, employee entitled to full salary and allowances if acquitted

UP : हाईकोर्ट ने कहा- चेतावनी दंड नहीं है, दोषमुक्त होने पर कर्मचारी पूरे वेतन और भत्ते का हकदार

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 13 Mar 2026 10:45 AM IST
विज्ञापन
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि चेतावनी दंड नहीं है। अनुशासनात्मक कार्रवाई के दौरान निलंबित रहे कर्मचारी पर काम नहीं तो वेतन नहीं का सिद्धांत लागू नहीं होता। ऐसे में वह निलंबन अवधि का पूरा वेतन और भत्ता पाने का हकदार है। 

High Court says warning is not a punishment, employee entitled to full salary and allowances if acquitted
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि चेतावनी दंड नहीं है। अनुशासनात्मक कार्रवाई के दौरान निलंबित रहे कर्मचारी पर काम नहीं तो वेतन नहीं का सिद्धांत लागू नहीं होता। ऐसे में वह निलंबन अवधि का पूरा वेतन और भत्ता पाने का हकदार है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान की एकल पीठ ने बुलंदशहर के नगर पालिका परिषद, गुलावठी में तैनात रहीं सफाई कर्मचारी मोहिनी देवी की याचिका स्वीकार कर ली। कोर्ट ने याची को 13 जून 2003 से तीन दिसंबर 2012 तक की लगभग नौ वर्षों की अवधि का पूरा पिछला वेतन तीन महीने के भीतर भुगतान करने का आदेश दिया है।

Trending Videos
मामले के मुताबिक याची नगर पालिका परिषद, गुलावठी में सफाई कर्मचारी थीं। उन्हें 2002 में निलंबित और 2003 में बर्खास्त किया गया था। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 2012 में हाईकोर्ट ने उनकी बर्खास्तगी रद्द कर दी थी। विभाग ने पुन: जांच कराई। मई 2013 में उन्हें चेतावनी देकर बहाल तो कर दिया पर बर्खास्तगी अवधि (2003-2012) का वेतन देने से यह कहते हुए इन्कार कर दिया कि उन्होंने इस दौरान काम नहीं किया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

 

इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याची के अधिवक्ता सुरेश कुमार मौर्य ने दलील दी कि विभागीय सेवा नियमावली ने चेतावनी दंड के रूप में परिभाषित नहीं है। लिहाजा इसको सजा मान कर याची को निलंबन व बर्खास्तगी अवधि के दौरान काम न करने का हवाला देकर वेतन और भत्ते से वंचित नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने मेरठ के मंडलायुक्त की ओर से 2015 में पारित अपीलीय आदेश और अन्य संबंधित आदेशों को रद्द कर दिया है। कहा कि उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली-1999 के तहत चेतावनी कोई निर्धारित दंड नहीं है।

कोर्ट ने कहा कि एक बार जब अनुशासनात्मक कार्यवाही समाप्त हो जाती है और कर्मचारी को किसी दंड का भागी नहीं पाया जाता तो यह माना जाएगा कि कर्मचारी सदैव कार्य करने के लिए तैयार और इच्छुक था। यह विभाग की गलती थी, जिसने अपनी अनुशासनात्मक कार्रवाई के दौरान निलंबन और बर्खास्तगी के जरिये कर्मचारी को जबरन काम से दूर रखा। ऐसी स्थिति में काम नहीं तो वेतन नहीं का सिद्धांत लागू नहीं होता। क्योंकि, कर्मचारी को काम करने से विभाग ने रोका था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed