UP : शंकराचार्य बोले- अधिकारियों ने रची थी मेरी हत्या की साजिश, पालकी से नीचे उतरता तो जान ले लेते
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने कहा है कि मौनी अमावस्या पर हमारी हत्या की साजिश रची गई थी। अधिकारियों ने काम तमाम करने की पूरी तैयारी कर ली थी। उनके सेवकों को पुलिस घसीटकर ले कर चली गई।
विस्तार
ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उनकी हत्या की साजिश रची गई थी। उन्होंने कहा कि कुछ लोग उन्हें रास्ते से हटाना चाहते हैं और इसी कारण उन्हें बार-बार पालकी से उतारने की कोशिश की गई।
मौनी अमावस्या के दिन संगम नोज के सामने शंकराचार्य का रथ रोकने पर समर्थकों और पुलिस के बीच हुई धक्कामुक्की के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद संगम स्नाम किए बिना लौट गए थे। उन्होंने पुलिस पर साधु-संतों को पीटने का आरोप लगाया था। घटना के बाद ही वह अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठे हैं।
हालांकि, सोमवार को उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि वह धरने पर नहीं बैठे हैं। प्रशासन उन्हें जहां छोड़ गया था वह वहीं विराजमान हैं। उन्होंने पुलिस पर साधु संतों को पीटे जाने का आरोप दोहराते हुए इस पूरी घटना के लिए पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार, मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल, गृह सचिव मोहित गुप्ता और जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा की फोटो दिखाते हुए उन्हें जिम्मेदार ठहराया।
शंकराचार्य ने सीओ विनीत सिंह की फोटो दिखाते हुए आरोप लगाया कि संगम नोज पर जिन साधु संतों को पुलिस ने हिरासत में लिए, उन्हें सीओ विनीत सिंह ने पीट-पीटकर घायल किया। शंकराचार्य ने अपने आरोपों के समर्थन में कई उदाहरण भी प्रस्तुत किए। कहा कि पालकी में जाना हमारी परंपरा रही है। वह स्नान करने पालकी से ही जाएंगे और प्रशासन जब तक लिखित रूप से माफी नहीं मांग लेता, वह नहीं उठेंगे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वह आगे भी उसी स्थान पर बैठे रहेंगे और आवश्यकता पड़ी तो अगले वर्ष भी इसी तरह विरोध करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगले वर्ष उन्हें मनाने के लिए मुख्यमंत्री स्वयं भी आ सकते हैं, हालांकि यह जरूरी नहीं है कि योगी आदित्यनाथ ही हों, कोई अन्य मुख्यमंत्री भी हो सकता है।
हाईकोर्ट में दाखिल करेंगे याचिका
शंकराचार्य स्वमी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि मठ से जुड़े लोगों ने इस पूरे मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि माघ मेले में संगम स्नान के लिए चारों शंकराचार्यों के लिए प्रोटोकॉल बनना चाहिए ताकि शंकराचार्य पालकी पर जाकर स्नान कर सकें।
शंकराचार्य का दावा
- 35 लोगों को हिरासत में ले लेकर उनकी पिटाई की गई, इसमें 12 का मेडिकल हुआ। महिला श्रद्धालु , बुजुर्ग व कम उम्र के साधु- संतों को पीटा गया
- घटना के बाद रात एक बजे तक अमावस्या लगी थी। प्रशासन को समाधान का अवसर दिया था लेकिन कोई पहल नहीं की गई
- सादे वेश में पुलिसकर्मी पालकी धकेलते हुए शिविर के बाहर छोड़ गए
अधिकारियों ने दी सफाई, कहा- किसी को नहीं रोका स्नान से
शंकराचार्य के आरोपों के बाद मेला प्रशासन ने भी सफाई दी। मेला कार्यालय में बुलाई गई प्रेस कांफ्रेंस में कमिश्नर सौम्या अग्रवाल ने कहा कि किसी को भी संगम स्नान से नहीं रोका गया है। भीड़ के मद्देनजर अविमुक्तेश्वरानंद से कुछ देर रुकने के लिए कहा गया था। पुलिस ने किसी के साथ अभद्रता नहीं की। उनके आरोप निराधार हैं। डीएम मनीष कुमार वर्मा और मेलाधिकारी ऋषिराज ने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि उनको पीठाधीश्वर नहीं माना गया है। उनका जो शिविर है वह बद्रिकाश्रम के नाम पर आवंटित है। पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार ने कहा कि पुलिसकर्मियों ने किसी साधु संत के साथ मारपीट नहीं की है। जांच में बात सामने आई तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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