UPESSC : असिस्टेंट प्रोफेसर और प्रधानाध्यापक भर्ती अधियाचन वापस, अर्हता व पद सृजन पर आपत्ति
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने असिस्टेंट प्रोफेसर कुक्कुट पालन विषय के अधियाचन को वापस कर दिया है। यह अधियाचन उच्च शिक्षा निदेशालय ने बिना पद सृजन के भेजा था।
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उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने असिस्टेंट प्रोफेसर कुक्कुट पालन विषय के अधियाचन को वापस कर दिया है। यह अधियाचन उच्च शिक्षा निदेशालय ने बिना पद सृजन के भेजा था। आयोग ने एडेड माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक और प्रधानाचार्य के 2643 पदों के अधियाचन पर भी आपत्ति जताई है। इन आपत्तियों के कारण भर्ती प्रक्रिया में देरी हो रही है।
उच्च शिक्षा निदेशालय ने 111 प्राचार्य और 44 विषयों में 2107 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों के लिए अधियाचन ई-पोर्टल पर अपलोड किया था। भर्ती विज्ञापन जारी करने से पहले चयन आयोग ने पूरे मामले का परीक्षण किया। आयोग के विषय विशेषज्ञों ने पाया कि कुक्कुट विषय के अधियाचन गोरखपुर और गाजीपुर के एडेड महाविद्यालयों से आए थे। ये अधियाचन दरअसल पशुपालन और दुग्ध विभाग से संबंधित थे।
शिक्षा सेवा चयन आयोग के उप सचिव संजय सिंह ने बताया कि अधियाचन आपत्ति के साथ निदेशालय को वापस कर दिए गए हैं। इसके बाद उच्च शिक्षा निदेशालय ने सह विषय (एलाइड सब्जेक्ट) के निर्धारण के लिए पत्र लिखा है। सहायक निदेशक डॉ. बीएल शर्मा ने भी अधियाचन वापसी की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि शासन को सह विषय के तहत समिति गठित करने के लिए पत्र भेजा गया है। इस समिति में शासन, निदेशालय और आयोग के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
प्रधानाध्यापक और प्रधानाचार्य भर्ती पर आपत्ति
एडेड माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक और प्रधानाचार्य के 2643 पदों पर भर्ती होनी है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने इन पदों के अधियाचन को भी वापस कर दिया है। इसका मुख्य कारण शैक्षिक अर्हता (डिग्री, डिप्लोमा या प्रमाण पत्र) का स्पष्ट न होना है। अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक कामता राम पाल ने बताया कि आवश्यक संशोधन के बाद ही अधियाचन भेजा गया था। उन्होंने कहा कि जो आपत्तियां हैं, उनमें सुधार किया जाएगा ताकि भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ सके।
अर्हता निर्धारण के लिए आयोग का पत्र
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के सचिव ने जून में प्रमुख सचिव को एक महत्वपूर्ण पत्र लिखा था। यह पत्र चयन आयोग नियमावली 2023 के नियम 22 में संशोधन के संबंध में था। इसमें अध्यक्षों के लिए शैक्षिक अर्हताएं, आरक्षण और अधियाचन में संशोधन का उल्लेख किया गया था। नियमावली के नियम 22 के अनुसार, प्राचार्य, प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक पदों के लिए अभ्यर्थियों की अर्हताएं सुसंगत अधिनियमों, सेवा नियमावली और विश्वविद्यालय परिनियमावली के अनुसार होंगी। आयोग अर्हता को लेकर संशोधन की संस्तुति पहले ही कर चुका है।
सह विषय समिति का महत्व
उच्च शिक्षा निदेशालय ने सह विषय (एलाइड सब्जेक्ट) के निर्धारण के लिए आयोग, निदेशालय और विषय विशेषज्ञ की एक समिति बनाने का प्रस्ताव दिया है। ऐसी समिति राजकीय महाविद्यालयों के लिए होने वाली भर्ती में पहले भी बनाई जा चुकी है। लोक सेवा आयोग की ओर से राजकीय महाविद्यालय में 23 विषयों की भर्ती में भी ऐसी ही समिति गठित हुई थी। समिति के गठन के बाद ही उन भर्तियों की प्रक्रिया सुचारु रूप से शुरू हो पाई थी। यह समिति भविष्य में अधियाचनों से संबंधित विवादों को सुलझाने में सहायक होगी।