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Prayagraj News: यूक्रेन के ओडेसा में ड्रोन हमले में झूंसी का युवक लापता
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यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह पर 25 जुलाई को वाणिज्यिक जहाज पर हुए हमले में लापता दो भारतीयों में झूंसी के नीबीकला के रामचंद्र दुबे (23) शामिल हैं। शनिवार को हमले के वक्त रामचंद्र आठ क्रू सदस्यों के साथ जहाज पर सवार थे। इसी दौरान रूस ने ड्रोन से जहाज को निशान बनाया। जान बचाने के लिए झूंसी के युवक के अलावा रायबरेली के दिलीप गुप्ता ने समुद्र में छलांग लगा दी। चार दिन बाद भी दोनों का पता नहीं चल सका है।
खबर मिलते पर परिजनों ने नई दिल्ली स्थित यूक्रेन के दूतावास में संपर्क किया। भाई ने बताया कि जहाज के कैप्टन के कहने पर ही रामचंद्र और दिलीप ने समुद्र में छलांग लगाई थी। कीव में भारतीय दूतावास ने 26 जुलाई को दोनों युवकों के लापता होने की जानकारी थी।
नीबीकला गांव निवासी रमेश दुबे सेना से सूबेदार के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उनके दो बेटों में छोटा रामचंद्र दुबे डारलो नामक कंपनी के जहाज से पिछले साल फरवरी में रवाना हुआ था। तब से वह लगातार जहाज पर ही था। 26 जुलाई की दोपहर तकरीबन डेढ़ बजे छोटी बहन सीमाक्षी दुबे के पास कंपनी के नोएडा कार्यालय से फोन आया। उसे जहाज पर ड्रोन हमले व रामचंद्र के लापता होने की जानकारी दी गई।
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रामचंद्र के लापता होने की सूचना मिलने पर चचेरे भाई मुक्तेश्वर दुबे रविवार सुबह दिल्ली के मंदिर में पुजारी युवक के बड़े भाई कृष्णदास के पास पहुंचे। सोमवार को उन्होंने कृष्णदास दुबे के साथ यूक्रेन दूतावास से संपर्क किया।
तब पता चला कि जिस जहाज पर रामचंद्र थे, उसमें कैप्टन समेत आठ लोग सवार थे। इसमें चार भारतीय थे। लापता होने वालों में रामचंद्र के साथ रायबरेली का दिलीप गुप्ता भी है। मुक्तेश्वर दुबे ने बताया कि यूक्रेन से ब्लैक्सी के लिए जहाज के निकलने पर रूस ने ड्रोन से हमला किया था। वहीं, मां कल्पना दुबे बेटे की याद में बेसुध हैं।
दो महीने बाद घर लौटने वाला था रामचंद्र
रामचंद्र दुबे आठ महीने के सफर के बाद सितंबर में घर आने वाले थे लेकिन उसके पहले ही हादसा हो गया। मुक्तेश्वर ने बताया कि दो भाइयों में रामचंद्र छोटे हैं। उनकी दो बहनें भी हैं।
भारतीय दूतावास से भी साधा संपर्क
रामचंद्र के भाइयों ने भारतीय दूतावास से भी संपर्क साधा। चचेरे भाई मुक्तेश्वर दुबे ने बताया कि वह नई दिल्ली स्थित भारतीय दूतावास पहुंचे। इस दौरान रिसेप्शन पर मौजूद कर्मचारी ने कहा कि शिकायत बॉक्स में पत्र डाल दीजिए। जानकारी मिलने ही तत्काल संपर्क किया जाएगा।
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खबर मिलते पर परिजनों ने नई दिल्ली स्थित यूक्रेन के दूतावास में संपर्क किया। भाई ने बताया कि जहाज के कैप्टन के कहने पर ही रामचंद्र और दिलीप ने समुद्र में छलांग लगाई थी। कीव में भारतीय दूतावास ने 26 जुलाई को दोनों युवकों के लापता होने की जानकारी थी।
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नीबीकला गांव निवासी रमेश दुबे सेना से सूबेदार के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उनके दो बेटों में छोटा रामचंद्र दुबे डारलो नामक कंपनी के जहाज से पिछले साल फरवरी में रवाना हुआ था। तब से वह लगातार जहाज पर ही था। 26 जुलाई की दोपहर तकरीबन डेढ़ बजे छोटी बहन सीमाक्षी दुबे के पास कंपनी के नोएडा कार्यालय से फोन आया। उसे जहाज पर ड्रोन हमले व रामचंद्र के लापता होने की जानकारी दी गई।
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रामचंद्र के लापता होने की सूचना मिलने पर चचेरे भाई मुक्तेश्वर दुबे रविवार सुबह दिल्ली के मंदिर में पुजारी युवक के बड़े भाई कृष्णदास के पास पहुंचे। सोमवार को उन्होंने कृष्णदास दुबे के साथ यूक्रेन दूतावास से संपर्क किया।
तब पता चला कि जिस जहाज पर रामचंद्र थे, उसमें कैप्टन समेत आठ लोग सवार थे। इसमें चार भारतीय थे। लापता होने वालों में रामचंद्र के साथ रायबरेली का दिलीप गुप्ता भी है। मुक्तेश्वर दुबे ने बताया कि यूक्रेन से ब्लैक्सी के लिए जहाज के निकलने पर रूस ने ड्रोन से हमला किया था। वहीं, मां कल्पना दुबे बेटे की याद में बेसुध हैं।
दो महीने बाद घर लौटने वाला था रामचंद्र
रामचंद्र दुबे आठ महीने के सफर के बाद सितंबर में घर आने वाले थे लेकिन उसके पहले ही हादसा हो गया। मुक्तेश्वर ने बताया कि दो भाइयों में रामचंद्र छोटे हैं। उनकी दो बहनें भी हैं।
भारतीय दूतावास से भी साधा संपर्क
रामचंद्र के भाइयों ने भारतीय दूतावास से भी संपर्क साधा। चचेरे भाई मुक्तेश्वर दुबे ने बताया कि वह नई दिल्ली स्थित भारतीय दूतावास पहुंचे। इस दौरान रिसेप्शन पर मौजूद कर्मचारी ने कहा कि शिकायत बॉक्स में पत्र डाल दीजिए। जानकारी मिलने ही तत्काल संपर्क किया जाएगा।