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Ambedkar Nagar News: जिले के 1500 छात्रों को डॉक्टर बनने का मिलेगा अवसर
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अंबेडकरनगर। संस्कृत से पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए आयुर्वेद के क्षेत्र में कॅरिअर बनाने का रास्ता अब और आसान होने जा रहा है। हाईस्कूल के बाद संस्कृत विद्यालयों के विद्यार्थियों को सीधे बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (बीएएमएस) में प्रवेश का अवसर मिलेगा।
इसके लिए प्रदेश में पांच आयुर्वेद गुरुकुलम् शुरू किए जाएंगे। इसमें गाजियाबाद, बस्ती, गोंडा, आगरा और मिर्जापुर में की जाएगी। आयुष विभाग की ओर से इसकी तैयारियां पूरी की जा रही हैं। व्यवस्था लागू होने से जिले के संस्कृत स्कूलों के विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा के साथ ही आयुर्वेद के क्षेत्र में आगे बढ़ने का सीधा अवसर मिलेगा। इससे संस्कृत शिक्षा को लेकर विद्यार्थियों में रुझान बढ़ने की उम्मीद है। जिले के 34 विद्यालयों के करीब 1500 संस्कृत पढ़ने वाले छात्र अब हाईस्कूल के बाद इन विद्यालयों में नामांकन कराकर 7.5 वर्ष ट्रेनिंग के बाद सीधे आयुर्वेदिक डॉक्टर बनने और उनके लिए रोजगार का अच्छा अवसर बन रहा है। इस फैसले से शिक्षकों ने खुशी जताई है।
बढ़ेगा विद्यार्थियों का रुझान
रामानंद संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भिउरा के सहायक अध्यापक अरुण कुमार पांडेय ने कहा कि शासन की यह पहल संस्कृत शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। हाईस्कूल के बाद विद्यार्थियों के सामने आयुर्वेद में कॅरिअर का विकल्प मिलने से संस्कृत विद्यालयों में दाखिले के प्रति विद्यार्थियों का रुझान बढ़ने की उम्मीद है।
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संस्कृत विद्यालयों की ओर बढ़ेगा आकर्षण
रामदुलारी संस्कृत महाविद्यालय मुबारकपुर की प्रधानाचार्या विक्रमा त्रिपाठी ने शासन के इस कदम पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि संस्कृत पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अब आगे आयुर्वेद के क्षेत्र में बेहतर अवसर मिल सकेंगे। इससे संस्कृत विद्यालयों की ओर विद्यार्थियों और अभिभावकों का आकर्षण बढ़ेगा।
विद्यार्थियों के लिए बड़ा अवसर
श्रीशंकर जी उच्चतर माध्यमिक संस्कृत विद्यालय कदरियांवा के प्रधानाचार्य प्रवीण कुमार सिंह ने कहा कि यह शासन की अच्छी पहल है। संस्कृत के विद्यार्थियों के लिए यह बड़ा अवसर है। विद्यार्थी आयुर्वेद के मूल ग्रंथों का अध्ययन कर चिकित्सा के क्षेत्र में आगे बढ़ सकेंगे। इससे संस्कृत शिक्षा और आयुर्वेद, दोनों को मजबूती मिलेगी।
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इसके लिए प्रदेश में पांच आयुर्वेद गुरुकुलम् शुरू किए जाएंगे। इसमें गाजियाबाद, बस्ती, गोंडा, आगरा और मिर्जापुर में की जाएगी। आयुष विभाग की ओर से इसकी तैयारियां पूरी की जा रही हैं। व्यवस्था लागू होने से जिले के संस्कृत स्कूलों के विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा के साथ ही आयुर्वेद के क्षेत्र में आगे बढ़ने का सीधा अवसर मिलेगा। इससे संस्कृत शिक्षा को लेकर विद्यार्थियों में रुझान बढ़ने की उम्मीद है। जिले के 34 विद्यालयों के करीब 1500 संस्कृत पढ़ने वाले छात्र अब हाईस्कूल के बाद इन विद्यालयों में नामांकन कराकर 7.5 वर्ष ट्रेनिंग के बाद सीधे आयुर्वेदिक डॉक्टर बनने और उनके लिए रोजगार का अच्छा अवसर बन रहा है। इस फैसले से शिक्षकों ने खुशी जताई है।
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बढ़ेगा विद्यार्थियों का रुझान
रामानंद संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भिउरा के सहायक अध्यापक अरुण कुमार पांडेय ने कहा कि शासन की यह पहल संस्कृत शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। हाईस्कूल के बाद विद्यार्थियों के सामने आयुर्वेद में कॅरिअर का विकल्प मिलने से संस्कृत विद्यालयों में दाखिले के प्रति विद्यार्थियों का रुझान बढ़ने की उम्मीद है।
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संस्कृत विद्यालयों की ओर बढ़ेगा आकर्षण
रामदुलारी संस्कृत महाविद्यालय मुबारकपुर की प्रधानाचार्या विक्रमा त्रिपाठी ने शासन के इस कदम पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि संस्कृत पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अब आगे आयुर्वेद के क्षेत्र में बेहतर अवसर मिल सकेंगे। इससे संस्कृत विद्यालयों की ओर विद्यार्थियों और अभिभावकों का आकर्षण बढ़ेगा।
विद्यार्थियों के लिए बड़ा अवसर
श्रीशंकर जी उच्चतर माध्यमिक संस्कृत विद्यालय कदरियांवा के प्रधानाचार्य प्रवीण कुमार सिंह ने कहा कि यह शासन की अच्छी पहल है। संस्कृत के विद्यार्थियों के लिए यह बड़ा अवसर है। विद्यार्थी आयुर्वेद के मूल ग्रंथों का अध्ययन कर चिकित्सा के क्षेत्र में आगे बढ़ सकेंगे। इससे संस्कृत शिक्षा और आयुर्वेद, दोनों को मजबूती मिलेगी।