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Ambedkar Nagar News: 3.74 करोड़ रुपये के परक्यूपाइन डूबे, नहीं मिली राहत
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राजेसुल्तानपुर के मांझा कम्हरिया में परक्यूपाइन के निकट कटान करती सरयू नदी।
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राजेसुल्तानपुर। सरयू नदी की कटान से तटवर्ती क्षेत्रों में किसानों की उपजाऊ जमीन लगातार समाहित हो रही है। बाढ़ कार्य खंड अयोध्या ने कटान रोकने को करीब 3.74 करोड़ रुपये खर्च किए। परक्यूपाइन का निर्माण कराया गया था। जलस्तर बढ़ने के बाद अधिकांश संरचनाएं नदी में डूब गईं। इससे ग्रामीणों को अपेक्षित राहत नहीं मिल सकी है।
मांझा कम्हरिया के बद्री का पूरा गांव को कटान से बचाने के लिए यह परियोजना शुरू हुई थी। अप्रैल माह में 1150 मीटर लंबाई में पांच पंक्तियों में परक्यूपाइन लगाए गए थे। इस पर कुल 3 करोड़ 74 लाख रुपये खर्च हुए थे। बद्री का पूरा गांव सरयू नदी से लगभग 200 मीटर दूर है। पिछले वर्ष तेज कटान से गांव के अस्तित्व पर संकट गहरा गया था। नदी का जलस्तर बढ़ने पर परक्यूपाइन की चार पंक्तियां जलधारा में पूरी तरह डूब गईं। केवल एक पंक्ति ही किनारे पर दिखाई दे रही है। कई स्थानों पर कटान अब भी जारी है। जहां परक्यूपाइन निर्माण समाप्त हुआ, वहां कटान और तेज हो गया। यह मांझा कम्हरिया क्षेत्र में हुआ। इटौरा ढोलीपुर गांव के पूर्वी हिस्से में भी परक्यूपाइन स्टड बने थे, लेकिन वहां भी कटान नहीं रुका। अब विभाग ने कटान प्रभावित स्थलों पर बंबू क्रेट लगाने का कार्य शुरू किया है।
कटान छिपाने के आरोप
इटौरा ढोलीपुर के ग्रामीण तालुकदार सिंह और राघवेंद्र ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि विभाग के अफसर जेसीबी मशीन से खेतों की मिट्टी समतल कर रहे हैं। यह कटान को छिपाने का प्रयास है। जिस स्थान पर मिट्टी समतल की जा रही है, नदी वहीं दोबारा कटान कर रही है। इससे किसानों की उपजाऊ भूमि लगातार सरयू में समाहित होती जा रही है। किसान भावेश सिंह गंगे ने धन के बंदरबांट का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कटान रोकने की परियोजनाओं में ऐसा हुआ। उनका कहना है कि यदि कार्य गुणवत्तापूर्ण होता तो लोगों को राहत मिलती।
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स्थायी समाधान की मांग
सामाजिक कार्यकर्ता मित्रसेन ने कटान की समस्या के स्थायी समाधान का सुझाव दिया है। उन्होंने कम्हरिया से मांझा कम्हरिया तक सरयू किनारे स्थायी तटबंध बनाकर बोल्डर पिचिंग कराने की मांग की। मित्रसेन ने जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी और मुख्यमंत्री को कई प्रार्थना पत्र भेजे हैं। हालांकि, अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। आलापुर विधायक त्रिभुवन दत्त ने भी विधानसभा में यह मुद्दा उठाया था। उन्होंने सरकार से सरयू नदी के किनारे स्थायी तटबंध निर्माण और बोल्डर पिचिंग की मांग की थी। स्थायी सुरक्षा योजना अभी तक धरातल पर नहीं उतर सकी है।
विभाग का सुरक्षा कार्य
बाढ़ कार्य खंड अयोध्या के जूनियर इंजीनियर फागू चौहान ने बताया कि कटान रोकने के लिए इटौरा ढोलीपुर गांव के पूर्वी हिस्से में बंबू क्रेट लगाए जा रहे हैं। अब तक दो स्थानों पर बंबू क्रेट लगाए जा चुके हैं। शेष संवेदनशील स्थलों पर भी तेजी से सुरक्षा कार्य कराया जाएगा। विभाग का लक्ष्य है कि सभी प्रभावित क्षेत्रों में जल्द-से-जल्द सुरक्षा उपाय किए जाएं।
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मांझा कम्हरिया के बद्री का पूरा गांव को कटान से बचाने के लिए यह परियोजना शुरू हुई थी। अप्रैल माह में 1150 मीटर लंबाई में पांच पंक्तियों में परक्यूपाइन लगाए गए थे। इस पर कुल 3 करोड़ 74 लाख रुपये खर्च हुए थे। बद्री का पूरा गांव सरयू नदी से लगभग 200 मीटर दूर है। पिछले वर्ष तेज कटान से गांव के अस्तित्व पर संकट गहरा गया था। नदी का जलस्तर बढ़ने पर परक्यूपाइन की चार पंक्तियां जलधारा में पूरी तरह डूब गईं। केवल एक पंक्ति ही किनारे पर दिखाई दे रही है। कई स्थानों पर कटान अब भी जारी है। जहां परक्यूपाइन निर्माण समाप्त हुआ, वहां कटान और तेज हो गया। यह मांझा कम्हरिया क्षेत्र में हुआ। इटौरा ढोलीपुर गांव के पूर्वी हिस्से में भी परक्यूपाइन स्टड बने थे, लेकिन वहां भी कटान नहीं रुका। अब विभाग ने कटान प्रभावित स्थलों पर बंबू क्रेट लगाने का कार्य शुरू किया है।
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कटान छिपाने के आरोप
इटौरा ढोलीपुर के ग्रामीण तालुकदार सिंह और राघवेंद्र ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि विभाग के अफसर जेसीबी मशीन से खेतों की मिट्टी समतल कर रहे हैं। यह कटान को छिपाने का प्रयास है। जिस स्थान पर मिट्टी समतल की जा रही है, नदी वहीं दोबारा कटान कर रही है। इससे किसानों की उपजाऊ भूमि लगातार सरयू में समाहित होती जा रही है। किसान भावेश सिंह गंगे ने धन के बंदरबांट का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कटान रोकने की परियोजनाओं में ऐसा हुआ। उनका कहना है कि यदि कार्य गुणवत्तापूर्ण होता तो लोगों को राहत मिलती।
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स्थायी समाधान की मांग
सामाजिक कार्यकर्ता मित्रसेन ने कटान की समस्या के स्थायी समाधान का सुझाव दिया है। उन्होंने कम्हरिया से मांझा कम्हरिया तक सरयू किनारे स्थायी तटबंध बनाकर बोल्डर पिचिंग कराने की मांग की। मित्रसेन ने जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी और मुख्यमंत्री को कई प्रार्थना पत्र भेजे हैं। हालांकि, अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। आलापुर विधायक त्रिभुवन दत्त ने भी विधानसभा में यह मुद्दा उठाया था। उन्होंने सरकार से सरयू नदी के किनारे स्थायी तटबंध निर्माण और बोल्डर पिचिंग की मांग की थी। स्थायी सुरक्षा योजना अभी तक धरातल पर नहीं उतर सकी है।
विभाग का सुरक्षा कार्य
बाढ़ कार्य खंड अयोध्या के जूनियर इंजीनियर फागू चौहान ने बताया कि कटान रोकने के लिए इटौरा ढोलीपुर गांव के पूर्वी हिस्से में बंबू क्रेट लगाए जा रहे हैं। अब तक दो स्थानों पर बंबू क्रेट लगाए जा चुके हैं। शेष संवेदनशील स्थलों पर भी तेजी से सुरक्षा कार्य कराया जाएगा। विभाग का लक्ष्य है कि सभी प्रभावित क्षेत्रों में जल्द-से-जल्द सुरक्षा उपाय किए जाएं।