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Ambedkar Nagar News: फर्जी मान्यता प्रमाणपत्र से 31 लाख की धोखाधड़ी

Sun, 26 Jul 2026 11:03 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 26 Jul 2026 11:03 PM IST
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Fraud of 31 lakh with fake caste certificate
 इब्राहिमपुर थाना।संवाद
अंबेडकरनगर। इब्राहिमपुर क्षेत्र के लाॅर्डबुद्धा नर्सिंग एंड पैरामेडिकल कॉलेज के प्रबंधक नवीन प्रकाश वर्मा के साथ 31 लाख 28 हजार रुपये की धोखाधड़ी हुई है। यह धोखाधड़ी फर्जी मान्यता प्रमाणपत्र देने के नाम पर की गई। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
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वर्ष 2018 में गोरखपुर निवासी विनोद यादव ने खुद को स्टेट पैरामेडिकल फैकल्टी लखनऊ का रजिस्ट्रार बताया। उसने अपनी टीम के साथ कॉलेज का निरीक्षण किया। विनोद ने एएनएम, जीएनएम, डी-फार्मा जैसे पाठ्यक्रमों की मान्यता दिलाने का आश्वासन दिया। उसने कॉलेज प्रबंधन से लगभग डेढ़ लाख रुपये लिए और एक मान्यता प्रमाणपत्र भी दिया। बाद में पता चला कि विनोद का प्रमाणपत्र और बताई गई वेबसाइट दोनों फर्जी थे।
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इसके बावजूद विनोद के कहने पर कॉलेज में 2018 से 2022 तक छात्रों का प्रवेश और शिक्षण कार्य जारी रहा। परीक्षा व अन्य औपचारिकताओं के नाम पर भी अतिरिक्त राशि वसूली गई। 20 सितंबर 2018 से 9 फरवरी 2022 के बीच कॉलेज के पंजाब नेशनल बैंक खाते से विनोद के एक्सिस बैंक खाते में 29 लाख 78 हजार रुपये हस्तांतरित हुए। कुल धोखाधड़ी की राशि 31 लाख 28 हजार रुपये बताई गई है।
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धोखाधड़ी का पता चलने पर नवीन प्रकाश वर्मा ने विनोद यादव से संपर्क किया। विनोद ने राशि वापस करने का आश्वासन दिया, लेकिन लगभग तीन साल बाद भी पैसे नहीं लौटाए। प्रबंधन ने पहले इब्राहिमपुर थाने में शिकायत की। इसके बाद 24 सितंबर 2025 को पुलिस अधीक्षक से भी शिकायत की गई। कोई कार्रवाई न होने पर कॉलेज प्रबंधन को न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
सैकड़ों छात्रों का भविष्य बर्बाद
वर्ष 2018-19 से 2022 तक कॉलेज में पढ़ने वाले सैकड़ों छात्रों का भविष्य बर्बाद हो गया। उन्हें जारी किए गए अंकपत्र फर्जी पाए गए। ये अंकपत्र स्टेट पैरामेडिकल फैकल्टी लखनऊ के बजाय पैसिफिक यूनिवर्सिटी उदयपुर और जयपुर कॉलेज ऑफ फार्मेसी से जारी हुए थे। इस विसंगति ने कॉलेज प्रबंधन को संदेह में डाल दिया। जांच में मान्यता प्रमाणपत्र और छात्रों के अंकपत्र दोनों कूटरचित व फर्जी निकले।

प्राथमिकी दर्ज होने में लग गए सात माह
न्यायालय ने 10 दिसंबर 2025 को इस धोखाधड़ी मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का स्पष्ट निर्देश दिया था। न्यायालय के निर्देशों के बाद शनिवार को आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज की गई। कोर्ट के आदेश के बाद भी पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने में सात माह से अधिक का समय लग गया। सीओ टांडा प्रदीप सिंह चंदेल ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज हुई है। उन्होंने कहा कि मामले की विवेचना शुरू हो गई है और जांच के आधार पर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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