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Ambedkar Nagar News: 38 साल पुराने दरोगा की हत्या के प्रयास के मामले में आरोपी बरी
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Fri, 27 Mar 2026 12:51 AM IST
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अंबेडकरनगर। सम्मनपुर इलाके में वर्ष 1986 में दरोगा आरबी सिंह की हत्या के प्रयास के मामले में आरोपी राम मनोहर को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम रामविलास सिंह की कोर्ट ने आरोप साबित न हो पाने के कारण दोषमुक्त करार दिया है। 38 साल बाद आए कोर्ट के इस फैसले से आरोपी को बड़ी राहत मिली है।
अभियोजन के अनुसार 1 अप्रैल 1986 की रात उपनिरीक्षक आरबी सिंह अपनी टीम के साथ गस्त पर थे। इसी दौरान सम्मनपुर बाजार क्षेत्र में आरोपी राम मनोहर व उसका साथी चंद्रभान यादव वहां पहुंचे थे और नीलामी बाजार में बोली लगाने को लेकर धमकी देकर सम्मनपुर की ओर चले गए।
पुलिस टीम जब सम्मनपुर पहुंची तो आरोपी वहां नहीं मिले। इसके बाद टीम ग्राम बड़ेपुर लखनिया में एक अन्य मारपीट की घटना की जांच कर वापस लौट रही थी। इसी दौरान सम्मनपुर बाजार में सड़क किनारे एक मोटरसाइकिल खड़ी दिखी जिसके पास राम मनोहर वर्मा, श्रीकांत वर्मा और एक अन्य व्यक्ति चारपाई पर बैठे नजर आए।
पुलिस टीम को देखते ही तीनों भागने लगे। पुलिसकर्मियों ने रुकने का इशारा करते हुए पीछा किया। इसी दौरान राम मनोहर ने रुककर पुलिस टीम पर जान से मारने की नीयत से रिवॉल्वर से फायर कर दिया। जवाब में पुलिस ने भी आत्मरक्षा में फायरिंग की लेकिन आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकले थे। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर राममनोहर के विरुद्ध आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया था।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने दो गवाहों को प्रस्तुत किया लेकिन दोनों ही गवाहों ने अदालत में घटना का समर्थन नहीं किया और आरोपी ने फायरिंग करने से साफ इन्कार कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा है। न तो घटना के समर्थन में ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किए जा सके और न ही किसी पुलिसकर्मी को चोट लगने का प्रमाण मिला।
आरोपी के पास से कोई हथियार बरामद होने का भी साक्ष्य नहीं मिला। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए आरोपी राम मनोहर को इस मामले में बरी कर उनके जमानत बंधपत्र निरस्त करते हुए उन्हें सभी दायित्वों से मुक्त किया जाता है।
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अभियोजन के अनुसार 1 अप्रैल 1986 की रात उपनिरीक्षक आरबी सिंह अपनी टीम के साथ गस्त पर थे। इसी दौरान सम्मनपुर बाजार क्षेत्र में आरोपी राम मनोहर व उसका साथी चंद्रभान यादव वहां पहुंचे थे और नीलामी बाजार में बोली लगाने को लेकर धमकी देकर सम्मनपुर की ओर चले गए।
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पुलिस टीम जब सम्मनपुर पहुंची तो आरोपी वहां नहीं मिले। इसके बाद टीम ग्राम बड़ेपुर लखनिया में एक अन्य मारपीट की घटना की जांच कर वापस लौट रही थी। इसी दौरान सम्मनपुर बाजार में सड़क किनारे एक मोटरसाइकिल खड़ी दिखी जिसके पास राम मनोहर वर्मा, श्रीकांत वर्मा और एक अन्य व्यक्ति चारपाई पर बैठे नजर आए।
पुलिस टीम को देखते ही तीनों भागने लगे। पुलिसकर्मियों ने रुकने का इशारा करते हुए पीछा किया। इसी दौरान राम मनोहर ने रुककर पुलिस टीम पर जान से मारने की नीयत से रिवॉल्वर से फायर कर दिया। जवाब में पुलिस ने भी आत्मरक्षा में फायरिंग की लेकिन आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकले थे। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर राममनोहर के विरुद्ध आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया था।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने दो गवाहों को प्रस्तुत किया लेकिन दोनों ही गवाहों ने अदालत में घटना का समर्थन नहीं किया और आरोपी ने फायरिंग करने से साफ इन्कार कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा है। न तो घटना के समर्थन में ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किए जा सके और न ही किसी पुलिसकर्मी को चोट लगने का प्रमाण मिला।
आरोपी के पास से कोई हथियार बरामद होने का भी साक्ष्य नहीं मिला। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए आरोपी राम मनोहर को इस मामले में बरी कर उनके जमानत बंधपत्र निरस्त करते हुए उन्हें सभी दायित्वों से मुक्त किया जाता है।