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Ambedkar Nagar News: रंगदारी व धमकी के मामले में आरोपी की जमानत अर्जी खारिज
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अंबेडकरनगर। हंसवर क्षेत्र के वर्ष 2024 के रंगदारी, धमकी और आपराधिक साजिश के मामले में आरोपी हरसंहार निवासी जफर सुपारी उर्फ खान जफर को सत्र न्यायालय से राहत नहीं मिली। सत्र न्यायाधीश चंद्रोदय कुमार ने उसकी पहली नियमित जमानत अर्जी तकनीकी आधार पर खारिज कर दी।
सुनवाई के दौरान अलीगंज के रसूलपुर खासपुर निवासी नेबूलाल पुत्र लालता प्रसाद कोर्ट में उपस्थित हुए। उन्होंने प्रार्थनापत्र और शपथपत्र देकर बताया कि जमानत अर्जी में उन्हें पैरोकार और शपथपत्रकर्ता दर्शाया गया है, जबकि उनका इस मामले से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने न तो कोई शपथपत्र तैयार कराया, न उस पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने स्वयं को आरोपी और मुकदमे की पूरी जानकारी से अनभिज्ञ बताते हुए मामले में आवश्यक कार्रवाई की मांग की।
दावे की सत्यता जांचने के लिए कोर्ट ने स्वयं परीक्षण किया। जमानत अर्जी में लगी तस्वीर का मिलान अदालत में मौजूद नेबूलाल से किया गया। फोटो उनकी ही पाई गई, हालांकि विवादित शपथपत्र पर मौजूद हस्ताक्षर और कोर्ट में किए गए हस्ताक्षर में स्पष्ट अंतर मिला। न्यायालय ने प्रथम दृष्टया माना कि नेबूलाल की फोटो और पहचान संबंधी जानकारी का उपयोग कर शपथपत्र तैयार किया गया। हंसवर के चकदाऊदपुर निवासी उजैर अहमद ने 1 मई 2024 को पुलिस को शिकायत देकर बताया था कि वह रोजगार के सिलसिले में सऊदी अरब में रहते हैं।
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रमजान की छुट्टी में घर आने पर उन्हें एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को जफर सुपारी का आदमी बताते हुए जमीन खरीदने से पहले रुपये देने की मांग की और इन्कार करने पर जान से मारने की धमकी दी। डर से उन्होंने बताए गए बैंक खाते में अलग-अलग तिथियों पर कुल 2.95 लाख रुपये भेज दिए, लेकिन इसके बाद भी धमकियां और अतिरिक्त धन की मांग जारी रही। इसी शिकायत पर पुलिस पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की थी।
कोर्ट ने कहा कि नियमित जमानत अर्जी विधिसम्मत शपथपत्र से समर्थित होना आवश्यक है। यदि आवेदन संदिग्ध या फर्जी दस्तावेज पर आधारित हो तो उस पर विचार नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने जफर सुपारी उर्फ खान जफर की जमानत अर्जी खारिज कर दी और विवादित शपथपत्र और संबंधित दस्तावेज अभिलेख में सुरक्षित रखने का आदेश दिया।
सुनवाई के दौरान अलीगंज के रसूलपुर खासपुर निवासी नेबूलाल पुत्र लालता प्रसाद कोर्ट में उपस्थित हुए। उन्होंने प्रार्थनापत्र और शपथपत्र देकर बताया कि जमानत अर्जी में उन्हें पैरोकार और शपथपत्रकर्ता दर्शाया गया है, जबकि उनका इस मामले से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने न तो कोई शपथपत्र तैयार कराया, न उस पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने स्वयं को आरोपी और मुकदमे की पूरी जानकारी से अनभिज्ञ बताते हुए मामले में आवश्यक कार्रवाई की मांग की।
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दावे की सत्यता जांचने के लिए कोर्ट ने स्वयं परीक्षण किया। जमानत अर्जी में लगी तस्वीर का मिलान अदालत में मौजूद नेबूलाल से किया गया। फोटो उनकी ही पाई गई, हालांकि विवादित शपथपत्र पर मौजूद हस्ताक्षर और कोर्ट में किए गए हस्ताक्षर में स्पष्ट अंतर मिला। न्यायालय ने प्रथम दृष्टया माना कि नेबूलाल की फोटो और पहचान संबंधी जानकारी का उपयोग कर शपथपत्र तैयार किया गया। हंसवर के चकदाऊदपुर निवासी उजैर अहमद ने 1 मई 2024 को पुलिस को शिकायत देकर बताया था कि वह रोजगार के सिलसिले में सऊदी अरब में रहते हैं।
रमजान की छुट्टी में घर आने पर उन्हें एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को जफर सुपारी का आदमी बताते हुए जमीन खरीदने से पहले रुपये देने की मांग की और इन्कार करने पर जान से मारने की धमकी दी। डर से उन्होंने बताए गए बैंक खाते में अलग-अलग तिथियों पर कुल 2.95 लाख रुपये भेज दिए, लेकिन इसके बाद भी धमकियां और अतिरिक्त धन की मांग जारी रही। इसी शिकायत पर पुलिस पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की थी।
कोर्ट ने कहा कि नियमित जमानत अर्जी विधिसम्मत शपथपत्र से समर्थित होना आवश्यक है। यदि आवेदन संदिग्ध या फर्जी दस्तावेज पर आधारित हो तो उस पर विचार नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने जफर सुपारी उर्फ खान जफर की जमानत अर्जी खारिज कर दी और विवादित शपथपत्र और संबंधित दस्तावेज अभिलेख में सुरक्षित रखने का आदेश दिया।