{"_id":"6a2ee338b89fb08335013ebe","slug":"demand-to-get-back-12-lakh-rupees-given-in-the-name-of-a-job-rejected-ambedkar-nagar-news-c-91-1-brp1007-158452-2026-06-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ambedkar Nagar News: नौकरी के नाम पर दिए 12 लाख रुपये वापस पाने की मांग खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ambedkar Nagar News: नौकरी के नाम पर दिए 12 लाख रुपये वापस पाने की मांग खारिज
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
अंबेडकरनगर। नौकरी दिलाने के नाम पर दिए गए 12 लाख रुपये की वसूली के लिए दाखिल परिवाद को न्यायालय ने निरस्त कर दिया है। विशेष न्यायाधीश अनुसूचित जाति-जनजाति अधिनियम पवन कुमार ने अपने आदेश में यह स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि नौकरी लगवाने के लिए धन का लेन-देन अवैध है।
यह राशि कानून के विरुद्ध है, इसलिए इसे विधिक रूप से प्रवर्तनीय देनदारी नहीं माना जा सकता। मामले में बसखारी क्षेत्र के तेंदुआ निवासी प्रभात कुमार ने आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि बीबीपुर निवासी अमित कुमार ने नौकरी दिलाने के नाम पर उनसे 12 लाख रुपये लिए थे। काम न होने पर आरोपी ने एक चेक दिया था। यह चेक खाता बंद होने के कारण अनादरित हो गया। इसके बाद प्रभात कुमार ने धारा 138 के तहत परिवाद दाखिल किया था।
न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 13 अप्रैल 2022 को इस परिवाद को खारिज कर दिया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए प्रभात कुमार ने दांडिक पुनरीक्षण दायर किया। सुनवाई के बाद न्यायालय ने कहा कि नौकरी दिलाने के लिए धन देना और लेना दोनों ही अवैध कृत्य हैं। ऐसे अवैध लेन-देन से उत्पन्न धनराशि की वसूली के लिए धारा 138 का सहारा नहीं लिया जा सकता। न्यायालय ने अवर न्यायालय के आदेश को सही ठहराते हुए पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी।
विज्ञापन
यह राशि कानून के विरुद्ध है, इसलिए इसे विधिक रूप से प्रवर्तनीय देनदारी नहीं माना जा सकता। मामले में बसखारी क्षेत्र के तेंदुआ निवासी प्रभात कुमार ने आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि बीबीपुर निवासी अमित कुमार ने नौकरी दिलाने के नाम पर उनसे 12 लाख रुपये लिए थे। काम न होने पर आरोपी ने एक चेक दिया था। यह चेक खाता बंद होने के कारण अनादरित हो गया। इसके बाद प्रभात कुमार ने धारा 138 के तहत परिवाद दाखिल किया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 13 अप्रैल 2022 को इस परिवाद को खारिज कर दिया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए प्रभात कुमार ने दांडिक पुनरीक्षण दायर किया। सुनवाई के बाद न्यायालय ने कहा कि नौकरी दिलाने के लिए धन देना और लेना दोनों ही अवैध कृत्य हैं। ऐसे अवैध लेन-देन से उत्पन्न धनराशि की वसूली के लिए धारा 138 का सहारा नहीं लिया जा सकता। न्यायालय ने अवर न्यायालय के आदेश को सही ठहराते हुए पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी।