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Ambedkar Nagar News: गांव, गरीब और महिला के सहारे बूथ तक पकड़ मजबूत बनाने की कवायद
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Mon, 16 Feb 2026 12:01 AM IST
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अंबेडकरनगर। भीटी के खजुरी में शनिवार को हुई जनचौपाल सामान्य प्रशासनिक कार्यक्रम से कहीं ज्यादा नजर आई। मंच पर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य थे, लेकिन शब्दों के बीच 2027 की चुनावी रणनीति साफ पढ़ी जा सकती थी। इस चौपाल का राजनीतिक संदेश साफ था कि आने वाले चुनाव में गांव, गरीब और महिला ही मुख्य धुरी होंगे। मौर्य ने अपने भाषण में गरीब परिवारों को केंद्र में रखा। पक्के आवास, बेहतर बिजली आपूर्ति, ग्रामीण सड़कों और बुनियादी ढांचे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक विकास पहुंचाना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदर्भ देते हुए उन्होंने साधारण पृष्ठभूमि से राष्ट्रीय नेतृत्व तक की यात्रा को सामाजिक परिवर्तन का उदाहरण बताया। यह प्रस्तुति गरीब वर्ग के साथ भावनात्मक जुड़ाव मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखी गई। हर जिले में 75 समूहों को करोड़पति बनाने का लक्ष्य रखा गया। पहले चरण में लखपति दीदी मॉडल का उल्लेख करते हुए अब आय आधारित विस्तार की रूपरेखा सामने रखी। यहीं से राजनीतिक गणित शुरू होता है। एक स्वयं सहायता समूह औसतन 10-20 परिवारों से जुड़ा होता है। यदि हर ब्लॉक में ऐसे दर्जनों समूह सक्रिय होते हैं, तो उनका प्रभाव सीधे बूथ स्तर तक जाता है। यानी आर्थिक सशक्तिकरण के जरिए राजनीतिक नेटवर्क तैयार करने की रणनीति। चौपाल में मनरेगा पर की गई टिप्पणी भी अहम रही। पूर्व व्यय और परिणामों पर सवाल उठाते हुए 125 दिन रोजगार गारंटी और उच्च स्तरीय मॉनिटरिंग की बात कही गई। यह संदेश दो स्तर पर गया।
एक रोजगार को लेकर गंभीरता। दूसरा, पिछली व्यवस्थाओं पर अप्रत्यक्ष सवाल। गांव के विकास को राष्ट्रीय लक्ष्य से जोड़ते हुए विकासखंड स्तर पर ठोस परिणाम सुनिश्चित करने की बात कही गई। साफ संकेत था कि ग्रामीण विकास को अब सिर्फ योजना नहीं, बल्कि प्रदर्शन आधारित मॉडल के रूप में पेश किया जाएगा। मंच से महिला आय, आत्मनिर्भरता और आर्थिक भागीदारी पर लगातार जोर दिया गया। पिछले चुनावों में महिला मत प्रतिशत में भी वृद्धि हुई है।
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एक रोजगार को लेकर गंभीरता। दूसरा, पिछली व्यवस्थाओं पर अप्रत्यक्ष सवाल। गांव के विकास को राष्ट्रीय लक्ष्य से जोड़ते हुए विकासखंड स्तर पर ठोस परिणाम सुनिश्चित करने की बात कही गई। साफ संकेत था कि ग्रामीण विकास को अब सिर्फ योजना नहीं, बल्कि प्रदर्शन आधारित मॉडल के रूप में पेश किया जाएगा। मंच से महिला आय, आत्मनिर्भरता और आर्थिक भागीदारी पर लगातार जोर दिया गया। पिछले चुनावों में महिला मत प्रतिशत में भी वृद्धि हुई है।