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Ambedkar Nagar News: मेडिकल काॅलेज में 4.90 करोड़ से मजबूत होगी अग्नि सुरक्षा

संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर Updated Sat, 10 Jan 2026 11:17 PM IST
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Fire safety in the medical college will be strengthened with Rs 4.90 crore.
राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर परिसर में फायर सेफ्टी के लिए बनाया गया पंप हाउस। 
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अंबेडकरनगर। महामाया राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था (फायर सेफ्टी सिस्टम) को बेहतर बनाने के लिए 4.90 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
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वर्तमान में यहां लगे अग्निशमन संयंत्र के कई उपकरण खराब हैं, जिससे इसके संचालन में बाधा आ रही है। कॉलेज प्रशासन ने व्यवस्था को नये सिरे से बहाल करने के लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया है। मंजूरी मिलते ही मरम्मत का कार्य शुरू हो जाएगा।
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मेडिकल कॉलेज की स्थापना वर्ष 2011 में हुई थी, तब यहां करोड़ों की लागत से अत्याधुनिक अग्निशमन यंत्र लगाए गए थे। हालांकि, लंबे समय के बाद अब इस तंत्र में कई कमियां आ गई हैं। संयंत्र को पानी देने वाले पंप टैंक तक पर्याप्त आपूर्ति नहीं कर पा रहे हैं, जिससे मुख्य पाइप लाइन में पानी का दबाव कम रहता है। पिछले दिनों कॉलेज के एक वार्ड में शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लग गई थी। उस समय सुरक्षाकर्मियों ने पोर्टेबल फायर सिलेंडर की मदद से समय रहते आग पर काबू पा लिया, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
इस घटना के बाद जब पूरे सुरक्षा तंत्र का निरीक्षण किया गया, तो पंप हाउस के संचालन में बड़ी तकनीकी खामियां पाई गईं। मरीजों और स्टाफ की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कॉलेज प्रशासन ने करीब 4.90 करोड़ रुपये का बजट तैयार किया है। इस धनराशि से पुराने पंपों की मरम्मत, नई पाइप लाइन बिछाने और खराब उपकरणों को बदलने का कार्य किया जाएगा ताकि किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
n मेडिकल कॉलेज में ही मिलेगी एमआरआई और सीटी स्कैन की सुविधा : महामाया राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज में रेडियोलॉजी विभाग की सेवाएं एक बार फिर पूरी तरह शुरू हो गई हैं। करीब चार महीने पहले कार्यकाल पूरा होने के कारण डॉ. अमित रंजन यहां से कार्यमुक्त होकर एम्स गोरखपुर चले गए थे, जिसके बाद से एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी महत्वपूर्ण जांचें प्रभावित हो रही थीं। डॉक्टर की अनुपस्थिति में मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।
ऑपरेशन के मामलों में डॉक्टर जांच तो कर देते थे, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट न होने के कारण मरीजों को रिपोर्ट नहीं मिल पा रही थी। इस समस्या को दूर करने के लिए 24 दिसंबर 2025 को सहायक आचार्य (रेडियोलॉजी) के पद के लिए साक्षात्कार आयोजित किए गए थे।
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