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Ambedkar Nagar News: पूर्व सीएम ने एसपी से लगाई न्याय की गुहार
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Wed, 18 Feb 2026 11:13 PM IST
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अंबेडकरनगर/आलापुर। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर अपनी जमीन के फर्जी बैनामे के मामले में कार्रवाई की मांग की है। लगभग एक साल से लंबित इस मामले में अब तक कोई ठोस कदम न उठाए जाने से जालसाजों के हौसले बुलंद हैं।
दरअसल, आलापुर तहसील के रामनगर महुवर स्थित गाटा संख्या 1235 क (क्षेत्रफल 0.152 हेक्टेयर) सरकारी अभिलेखों में पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के नाम दर्ज है। यह जमीन 18 मई 2024 को वरासत के जरिए उनके नाम आई थी।जालसाजी का खुलासा फरवरी 2025 में तब हुआ, जब जमीन पर अवैध निर्माण शुरू हुआ।
जांच में पता चला कि वर्ष 1989 में हंसवर के रामहरक चौहान ने खुद को दिग्विजय सिंह का मुख्तार-ए-आम (पावर ऑफ अटॉर्नी धारक) बताकर जमीन जियालाल, राजबहादुर और मंगली के नाम बेच दी थी।
जांच में पाया गया कि मुख्तार-ए-आम बनाने के लिए दिग्विजय सिंह उर्फ दुर्विजय सिंह के फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे। जिस समय यह मुख्तारनामा तैयार हुआ, उस समय जमीन दिग्विजय सिंह के बजाय उनकी माता के नाम पर थी। इस आधार पर तहसील प्रशासन ने बैनामे को पूरी तरह अवैध माना है।
पूर्व सीएम के केयरटेकर अनिल यादव की शिकायत पर तत्कालीन डीएम और एसडीएम ने जांच कर रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी थी। हालांकि, अभी तक न तो दोषियों पर कार्रवाई हुई है और न ही फर्जी बैनामा रद्द किया गया है।
इसी का फायदा उठाकर विपक्षी दल जमीन पर कब्जा करने की लगातार कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में विपक्षी पक्ष का दाखिल-खारिज का दावा निरस्त होने के बाद दिग्विजय सिंह ने एसपी को पत्र लिखकर अपील की है कि फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ तुरंत एफआइआर दर्ज कर उचित कार्रवाई की जाए। पुलिस मामले की निष्पक्ष करने की बात कह रही है।
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दरअसल, आलापुर तहसील के रामनगर महुवर स्थित गाटा संख्या 1235 क (क्षेत्रफल 0.152 हेक्टेयर) सरकारी अभिलेखों में पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के नाम दर्ज है। यह जमीन 18 मई 2024 को वरासत के जरिए उनके नाम आई थी।जालसाजी का खुलासा फरवरी 2025 में तब हुआ, जब जमीन पर अवैध निर्माण शुरू हुआ।
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जांच में पता चला कि वर्ष 1989 में हंसवर के रामहरक चौहान ने खुद को दिग्विजय सिंह का मुख्तार-ए-आम (पावर ऑफ अटॉर्नी धारक) बताकर जमीन जियालाल, राजबहादुर और मंगली के नाम बेच दी थी।
जांच में पाया गया कि मुख्तार-ए-आम बनाने के लिए दिग्विजय सिंह उर्फ दुर्विजय सिंह के फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे। जिस समय यह मुख्तारनामा तैयार हुआ, उस समय जमीन दिग्विजय सिंह के बजाय उनकी माता के नाम पर थी। इस आधार पर तहसील प्रशासन ने बैनामे को पूरी तरह अवैध माना है।
पूर्व सीएम के केयरटेकर अनिल यादव की शिकायत पर तत्कालीन डीएम और एसडीएम ने जांच कर रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी थी। हालांकि, अभी तक न तो दोषियों पर कार्रवाई हुई है और न ही फर्जी बैनामा रद्द किया गया है।
इसी का फायदा उठाकर विपक्षी दल जमीन पर कब्जा करने की लगातार कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में विपक्षी पक्ष का दाखिल-खारिज का दावा निरस्त होने के बाद दिग्विजय सिंह ने एसपी को पत्र लिखकर अपील की है कि फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ तुरंत एफआइआर दर्ज कर उचित कार्रवाई की जाए। पुलिस मामले की निष्पक्ष करने की बात कह रही है।