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Ambedkar Nagar News: पूर्व विधायक को गैंगस्टर के मामले में मिली जमानत
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पवन कुमार पांडेय। स्रोत : सोशल मीडिया
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अंबेडकरनगर। अकबरपुर के पूर्व विधायक पवन कुमार पांडेय को गैंगस्टर एक्ट के मामले में मंगलवार को विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर/एमपी-एमएलए कोर्ट से जमानत मिल गई है। अकबरपुर पुलिस ने धोखाधड़ी के वर्ष 2022 के मामले में पूर्व विधायक को गैंग लीडर बताते हुए 13 लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की थी।
वर्ष 2022 में चंपा देवी की तरफ से पूर्व विधायक पवन कुमार पांडेय समेत अन्य लोगों के विरुद्ध धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कराई गई थी। बाद में इस मामले में अकबरपुर के तत्कालीन प्रभारी ने 14 जुलाई 2024 को कोटवा महमदपुर निवासी पवन कुमार पांडेय को गैंग लीडर बताते हुए प्राथमिकी दर्ज की थी। इसमें जौनपुर जिले के शाहगंज के खेतासराय निवासी मुकेश तिवारी, टांडा के बिहरोजपुर पहराजपुर निवासी गोविंद यादव, इब्राहिमपुर के बूढ़नपुर चांदपुर निवासी दीप नारायन शर्मा, आजमगढ़ के अतरौलिया के इटायल भवानीपुर की नीतू सिंह, नासिरपुर बरवा की शीला सिंह, रेखा सिंह, मीरपुर के अभिषेक तिवारी, सम्मोपुर के अजय तिवारी, लखनऊ के अलीगंज के संतोष मिश्रा, बक्सी का तालाब के खंतारी निवासी अमरेश यादव, शास्त्रीनगर के जयराम यादव व दाउदपुर कुर्की निवासी लालबहादुर सिंह सहआरोपी बनाए गए थे।
इस मामले में पूर्व विधायक की ओर से विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर/एमपी-एमएलए की अदालत में जमानत याचिका दाखिल की गई थी। इसमें अधिवक्ता ने तर्क दिया कि गैंग चार्ट में वर्ष 2022 का सिर्फ एक ही मामला दर्शाया गया है। करीब दो साल के अंतराल के बाद गैंगस्टर की कार्रवाई की जाना विधि संवत नहीं है। इस मामले में आठ सह आरोपियों की पूर्व में हाईकोर्ट से नियमित जमानत और दो की अग्रिम जमानत स्वीकृत की जा चुकी है। न्यायाधीश परविंद कुमार ने पूर्व विधायक की जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया है।
रिहाई में सात साल की सजा बनी बाधा
पूर्व विधायक पवन कुमार पांडेय को धोखाधड़ी और गैंगस्टर के प्रकरणों में जमानत मिल गई है। वर्ष 1990 के जानलेवा हमले के मामले में पूर्व को जनवरी 2025 में सात साल की सजा हुई थी। इस मामले में पूर्व विधायक की ओर से जमानत याचिका हाईकोर्ट में दाखिल की गई, जिस पर सुनवाई होना बाकी है। यही सजा रिहाई में बाधा बनी हुई है।
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वर्ष 2022 में चंपा देवी की तरफ से पूर्व विधायक पवन कुमार पांडेय समेत अन्य लोगों के विरुद्ध धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कराई गई थी। बाद में इस मामले में अकबरपुर के तत्कालीन प्रभारी ने 14 जुलाई 2024 को कोटवा महमदपुर निवासी पवन कुमार पांडेय को गैंग लीडर बताते हुए प्राथमिकी दर्ज की थी। इसमें जौनपुर जिले के शाहगंज के खेतासराय निवासी मुकेश तिवारी, टांडा के बिहरोजपुर पहराजपुर निवासी गोविंद यादव, इब्राहिमपुर के बूढ़नपुर चांदपुर निवासी दीप नारायन शर्मा, आजमगढ़ के अतरौलिया के इटायल भवानीपुर की नीतू सिंह, नासिरपुर बरवा की शीला सिंह, रेखा सिंह, मीरपुर के अभिषेक तिवारी, सम्मोपुर के अजय तिवारी, लखनऊ के अलीगंज के संतोष मिश्रा, बक्सी का तालाब के खंतारी निवासी अमरेश यादव, शास्त्रीनगर के जयराम यादव व दाउदपुर कुर्की निवासी लालबहादुर सिंह सहआरोपी बनाए गए थे।
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इस मामले में पूर्व विधायक की ओर से विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर/एमपी-एमएलए की अदालत में जमानत याचिका दाखिल की गई थी। इसमें अधिवक्ता ने तर्क दिया कि गैंग चार्ट में वर्ष 2022 का सिर्फ एक ही मामला दर्शाया गया है। करीब दो साल के अंतराल के बाद गैंगस्टर की कार्रवाई की जाना विधि संवत नहीं है। इस मामले में आठ सह आरोपियों की पूर्व में हाईकोर्ट से नियमित जमानत और दो की अग्रिम जमानत स्वीकृत की जा चुकी है। न्यायाधीश परविंद कुमार ने पूर्व विधायक की जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया है।
रिहाई में सात साल की सजा बनी बाधा
पूर्व विधायक पवन कुमार पांडेय को धोखाधड़ी और गैंगस्टर के प्रकरणों में जमानत मिल गई है। वर्ष 1990 के जानलेवा हमले के मामले में पूर्व को जनवरी 2025 में सात साल की सजा हुई थी। इस मामले में पूर्व विधायक की ओर से जमानत याचिका हाईकोर्ट में दाखिल की गई, जिस पर सुनवाई होना बाकी है। यही सजा रिहाई में बाधा बनी हुई है।