{"_id":"6a3c0c74d1adeeef6106f13d","slug":"hearing-tests-will-be-available-at-the-district-hospital-ambedkar-nagar-news-c-91-1-brp1007-159167-2026-06-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ambedkar Nagar News: जिला अस्पताल में हो सकेगी बहरेपन की जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ambedkar Nagar News: जिला अस्पताल में हो सकेगी बहरेपन की जांच
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
अंबेडकरनगर। जिला अस्पताल में जल्द ही बेरा मशीन स्थापित की जाएगी। इसके लिए शासन से स्वीकृति मिल चुकी है। मशीन लगने के बाद कान से जुड़ी गंभीर समस्याओं और बहरेपन की जांच के लिए मरीजों को लखनऊ, वाराणसी या अन्य बड़े शहरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
जिला अस्पताल के ईएनटी (नाक, कान एवं गला) विभाग में प्रतिदिन औसतन 100 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। इनमें 40 से 50 मरीज कान संबंधी बीमारियों से पीड़ित होते हैं। कई मामलों में डॉक्टरों को मरीजों की सुनने की क्षमता की सटीक जांच के लिए बेरा टेस्ट कराने की सलाह देनी पड़ती है। अभी तक यह सुविधा जिले में उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को निजी अस्पतालों या बड़े मेडिकल संस्थानों का सहारा लेना पड़ता था, जहां जांच पर हजारों रुपये खर्च करने पड़ते थे। स्वीकृति मिलने से मशीन लगने का रास्ता साफ हो गया है।
क्या है बेरा मशीन
बेरा (Brainstem Evoked Response Audiometry) एक अत्याधुनिक जांच तकनीक है, जिससे यह पता लगाया जाता है कि कान से मस्तिष्क तक ध्वनि संकेत सही तरीके से पहुंच रहे हैं या नहीं। यह जांच विशेष रूप से नवजात शिशुओं, छोटे बच्चों, बोलने में असमर्थ मरीजों और सुनने की क्षमता कम होने की शिकायत वाले लोगों के लिए बेहद उपयोगी मानी जाती है।
विज्ञापन
ऐसे होती है जांच
जांच के दौरान मरीज के सिर और कान के आसपास छोटे-छोटे सेंसर लगाए जाते हैं। इसके बाद हेडफोन के माध्यम से ध्वनि तरंगें भेजी जाती हैं। मशीन मस्तिष्क द्वारा ध्वनि पर दी गई प्रतिक्रिया को रिकॉर्ड करती है और रिपोर्ट तैयार करती है। यह पूरी प्रक्रिया दर्द रहित होती है तथा कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाती है।
-- -- -- -- -- -- -- -- --
समय रहते होगा उपचार
ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉ. मुख्तार शेख ने बताया कि बेरा जांच से सुनने की समस्या का प्रारंभिक स्तर पर पता चल जाता है जिससे समय रहते उपचार संभव हो पाता है। नवजात शिशुओं में जन्मजात बहरेपन की पहचान भी इस तकनीक से आसानी से की जा सकती है।
जिला अस्पताल के ईएनटी (नाक, कान एवं गला) विभाग में प्रतिदिन औसतन 100 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। इनमें 40 से 50 मरीज कान संबंधी बीमारियों से पीड़ित होते हैं। कई मामलों में डॉक्टरों को मरीजों की सुनने की क्षमता की सटीक जांच के लिए बेरा टेस्ट कराने की सलाह देनी पड़ती है। अभी तक यह सुविधा जिले में उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को निजी अस्पतालों या बड़े मेडिकल संस्थानों का सहारा लेना पड़ता था, जहां जांच पर हजारों रुपये खर्च करने पड़ते थे। स्वीकृति मिलने से मशीन लगने का रास्ता साफ हो गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
क्या है बेरा मशीन
बेरा (Brainstem Evoked Response Audiometry) एक अत्याधुनिक जांच तकनीक है, जिससे यह पता लगाया जाता है कि कान से मस्तिष्क तक ध्वनि संकेत सही तरीके से पहुंच रहे हैं या नहीं। यह जांच विशेष रूप से नवजात शिशुओं, छोटे बच्चों, बोलने में असमर्थ मरीजों और सुनने की क्षमता कम होने की शिकायत वाले लोगों के लिए बेहद उपयोगी मानी जाती है।
ऐसे होती है जांच
जांच के दौरान मरीज के सिर और कान के आसपास छोटे-छोटे सेंसर लगाए जाते हैं। इसके बाद हेडफोन के माध्यम से ध्वनि तरंगें भेजी जाती हैं। मशीन मस्तिष्क द्वारा ध्वनि पर दी गई प्रतिक्रिया को रिकॉर्ड करती है और रिपोर्ट तैयार करती है। यह पूरी प्रक्रिया दर्द रहित होती है तथा कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाती है।
समय रहते होगा उपचार
ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉ. मुख्तार शेख ने बताया कि बेरा जांच से सुनने की समस्या का प्रारंभिक स्तर पर पता चल जाता है जिससे समय रहते उपचार संभव हो पाता है। नवजात शिशुओं में जन्मजात बहरेपन की पहचान भी इस तकनीक से आसानी से की जा सकती है।