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Ambedkar Nagar News: करोड़ों की ठगी में आरोपी क्षेत्रीय प्रबंधक को मिली जमानत
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अंबेडकरनगर। टांडा क्षेत्र में फर्जी बीमा पॉलिसी के जरिये करोड़ों रुपये की ठगी के चर्चित मामले में पीएनबी मेट लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के क्षेत्रीय प्रबंधक सौरभ कुमार पांडेय को अदालत से जमानत मिल गई है। अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम राम विलास सिंह की अदालत ने तथ्यों, आपराधिक इतिहास न होने और सह-आरोपी की जमानत को आधार मानते हुए आदेश दिया है।
मूल रूप से देवरिया जनपद के इकोना गांव निवासी तथा वर्तमान में अयोध्या के केशवनगर कॉलोनी में रहने वाले सौरभ कुमार पांडेय पीएनबी मेट लाइफ इंश्योरेंस कंपनी में क्षेत्रीय प्रबंधक हैं। टांडा क्षेत्र के फत्तूपट्टी निवासी त्रिभुवन लाल मौर्य ने पुलिस को तहरीर देकर आरोप लगाया था कि पीएनबी मेट लाइफ के एजेंट उमेर अहमद ने पांच वर्ष में रकम दोगुनी करने का लालच देकर कई लोगों से लाखों रुपये निवेश के नाम पर ले लिए। 50 से अधिक लोगों से करीब ढाई करोड़ की ठगी को अंजाम दिया गया।
एजेंट ने कई लोगों को फर्जी और कूटरचित पॉलिसी बांड थमाकर हस्ताक्षरित कोरे चेक और निकासी प्रपत्र लिए थे। इसके बाद बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से खातों से धनराशि निकालकर अपने रिश्तेदारों और परिचितों के खातों में स्थानांतरित करा दी थी। विवेचना के दौरान सह-आरोपी के बयान के आधार पर सौरभ का नाम प्रकाश में आया था। इनके खाते में लेनदेन की बात भी सामने आई थी। इसके बाद पुलिस ने सौरभ को गिरफ्तार कर 7 मई 2026 को जेल भेज दिया था।
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सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि सौरभ को फंसाया गया है, उनका घटना से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है और उनके हस्ताक्षर से कोई फर्जी दस्तावेज तैयार नहीं किया गया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी का नाम मूल प्राथमिकी में नहीं है। पुलिस चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, ऐसे में साक्ष्यों को प्रभावित करने की संभावना कम है।
अदालत ने सौरभ कुमार को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के दो जमानतदार प्रस्तुत करने पर रिहा करने का आदेश दिया है।
मूल रूप से देवरिया जनपद के इकोना गांव निवासी तथा वर्तमान में अयोध्या के केशवनगर कॉलोनी में रहने वाले सौरभ कुमार पांडेय पीएनबी मेट लाइफ इंश्योरेंस कंपनी में क्षेत्रीय प्रबंधक हैं। टांडा क्षेत्र के फत्तूपट्टी निवासी त्रिभुवन लाल मौर्य ने पुलिस को तहरीर देकर आरोप लगाया था कि पीएनबी मेट लाइफ के एजेंट उमेर अहमद ने पांच वर्ष में रकम दोगुनी करने का लालच देकर कई लोगों से लाखों रुपये निवेश के नाम पर ले लिए। 50 से अधिक लोगों से करीब ढाई करोड़ की ठगी को अंजाम दिया गया।
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एजेंट ने कई लोगों को फर्जी और कूटरचित पॉलिसी बांड थमाकर हस्ताक्षरित कोरे चेक और निकासी प्रपत्र लिए थे। इसके बाद बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से खातों से धनराशि निकालकर अपने रिश्तेदारों और परिचितों के खातों में स्थानांतरित करा दी थी। विवेचना के दौरान सह-आरोपी के बयान के आधार पर सौरभ का नाम प्रकाश में आया था। इनके खाते में लेनदेन की बात भी सामने आई थी। इसके बाद पुलिस ने सौरभ को गिरफ्तार कर 7 मई 2026 को जेल भेज दिया था।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि सौरभ को फंसाया गया है, उनका घटना से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है और उनके हस्ताक्षर से कोई फर्जी दस्तावेज तैयार नहीं किया गया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी का नाम मूल प्राथमिकी में नहीं है। पुलिस चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, ऐसे में साक्ष्यों को प्रभावित करने की संभावना कम है।
अदालत ने सौरभ कुमार को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के दो जमानतदार प्रस्तुत करने पर रिहा करने का आदेश दिया है।