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Ambedkar Nagar News: 42.72 लाख से बनेगा पिंगिरियावां बाईपास
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Fri, 17 Apr 2026 01:47 AM IST
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भीटी। विकासखंड क्षेत्र में त्वरित आर्थिक विकास योजना के तहत पिंगिरियावां बाईपास (मैनेजर का पूरा) के निर्माण को शासन से स्वीकृति मिल गई है। इस परियोजना पर 42.72 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। बाईपास बनने से क्षेत्र के कई गांवों में आवागमन की सुविधा बेहतर होगी। प्रस्तावित बाईपास से पिंगिरियावां, बेला, महमूदपुर, रामपुर गिरंट, सुल्तानपुर और बाघाभारी सहित करीब एक दर्जन ग्राम पंचायतों के लोगों को राहत मिलेगी।
लगभग 15 हजार आबादी इस मार्ग से सीधे तौर पर लाभान्वित होगी। स्थानीय लोगों को अब गांव के भीतर की संकरी सड़कों से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा। बाहरी मार्ग बनने से आवाजाही सुगम होगी। गांव में पहले से प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत सड़क बनी हुई है, लेकिन गांव के अंदर घनी आबादी होने के कारण बड़े वाहनों का आवागमन कठिन रहता है। ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य भारी वाहन अक्सर जाम की स्थिति पैदा करते हैं। इसी समस्या को देखते हुए गांव के बाहर बाईपास बनाने का निर्णय लिया गया है।
इससे भारी वाहनों को सीधा रास्ता मिलेगा और गांव के अंदर दबाव कम होगा। यह बाईपास गन्ना किसानों के लिए भी उपयोगी साबित होगा। अभी किसानों को फसल ले जाने में दिक्कत होती है। संकरी सड़कों के कारण ट्रैक्टर-ट्रॉली निकालना मुश्किल होता है। यह परियोजना एमएलसी डॉ. हरिओम पांडेय के प्रस्ताव पर स्वीकृत हुई है। उन्होंने क्षेत्र की समस्या को उठाते हुए बाईपास निर्माण की जरूरत बताई थी। एमएलसी ने कहा कि क्षेत्र के लोगों को लंबे समय से इस मार्ग की आवश्यकता थी। बाईपास बनने से गांव के अंदर यातायात का दबाव कम होगा और लोगों को राहत मिलेगी।
ग्रामीणों ने जताई उम्मीद
बेला के लालजी ने बताया कि गांव के बीच से ट्रैक्टर-ट्रॉली निकालना काफी मुश्किल होता है। कई बार घंटों जाम लग जाता है। बाईपास बनने से यह समस्या खत्म होगी। रामपुर गिरंट निवासी धीरेंद्र दुबे व हरिकेश ने कहा कि किसानों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। फसल ले जाने में समय लगता है। नया मार्ग बनने से काम आसान होगा। बाईपास बनने से क्षेत्र में यातायात व्यवस्था में सुधार होगा। गांव के अंदर छोटे वाहनों के लिए रास्ता सुगम रहेगा और बड़े वाहनों को अलग मार्ग मिलेगा।
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लगभग 15 हजार आबादी इस मार्ग से सीधे तौर पर लाभान्वित होगी। स्थानीय लोगों को अब गांव के भीतर की संकरी सड़कों से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा। बाहरी मार्ग बनने से आवाजाही सुगम होगी। गांव में पहले से प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत सड़क बनी हुई है, लेकिन गांव के अंदर घनी आबादी होने के कारण बड़े वाहनों का आवागमन कठिन रहता है। ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य भारी वाहन अक्सर जाम की स्थिति पैदा करते हैं। इसी समस्या को देखते हुए गांव के बाहर बाईपास बनाने का निर्णय लिया गया है।
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इससे भारी वाहनों को सीधा रास्ता मिलेगा और गांव के अंदर दबाव कम होगा। यह बाईपास गन्ना किसानों के लिए भी उपयोगी साबित होगा। अभी किसानों को फसल ले जाने में दिक्कत होती है। संकरी सड़कों के कारण ट्रैक्टर-ट्रॉली निकालना मुश्किल होता है। यह परियोजना एमएलसी डॉ. हरिओम पांडेय के प्रस्ताव पर स्वीकृत हुई है। उन्होंने क्षेत्र की समस्या को उठाते हुए बाईपास निर्माण की जरूरत बताई थी। एमएलसी ने कहा कि क्षेत्र के लोगों को लंबे समय से इस मार्ग की आवश्यकता थी। बाईपास बनने से गांव के अंदर यातायात का दबाव कम होगा और लोगों को राहत मिलेगी।
ग्रामीणों ने जताई उम्मीद
बेला के लालजी ने बताया कि गांव के बीच से ट्रैक्टर-ट्रॉली निकालना काफी मुश्किल होता है। कई बार घंटों जाम लग जाता है। बाईपास बनने से यह समस्या खत्म होगी। रामपुर गिरंट निवासी धीरेंद्र दुबे व हरिकेश ने कहा कि किसानों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। फसल ले जाने में समय लगता है। नया मार्ग बनने से काम आसान होगा। बाईपास बनने से क्षेत्र में यातायात व्यवस्था में सुधार होगा। गांव के अंदर छोटे वाहनों के लिए रास्ता सुगम रहेगा और बड़े वाहनों को अलग मार्ग मिलेगा।

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