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Ambedkar Nagar News: बैनामा निरस्तीकरण का दावा साक्ष्यों के अभाव में खारिज
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Wed, 31 Dec 2025 11:58 PM IST
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अंबेडकरनगर। सिविल जज (सीडी) अंबेडकरनगर शिखा यादव की अदालत ने वर्ष 1993 के जलालपुर के ग्राम पर्वतपुर में भूमि विवाद में फैसला सुनाते हुए दायर बैनामा निरस्तीकरण का दावा खारिज कर दिया है।
यह वाद मूल रूप से रामसूरत मिश्र (मृतक) द्वारा दायर किया गया था। वाद में आरोप लगाया गया था कि प्रतिवादीगण राम मूर्ति मिश्र (मृतक) के पुत्र नरसिंह नारायण, राम बहादुर, श्याम बहादुर तथा रघुनाथ सहाय मिश्र ने धोखे से गाटा संख्या 471 की अतिरिक्त भूमि को बैनामे में शामिल करा लिया। वादी पक्ष का कहना था कि दिनांक 06 जून 1992 को किए गए बैनामे में प्रतिवादीगण ने गलत तरीके से दर्शा दी।
न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने व उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद कहा कि विवादित बैनामा पंजीकृत दस्तावेज है। पंजीकृत बैनामे को कानूनन वैध माना जाता है, जब तक कि धोखाधड़ी ठोस साक्ष्यों से सिद्ध न हो। वादी पक्ष न तो कथित पूर्व बैनामे को साबित कर सका और न ही धोखे का कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत कर पाया। इन आधारों पर न्यायालय ने वादी पक्ष का दावा निरस्त कर दिया तथा आदेश दिया कि दोनों पक्ष अपने-अपने मुकदमे का खर्च स्वयं वहन करेंगे।
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यह वाद मूल रूप से रामसूरत मिश्र (मृतक) द्वारा दायर किया गया था। वाद में आरोप लगाया गया था कि प्रतिवादीगण राम मूर्ति मिश्र (मृतक) के पुत्र नरसिंह नारायण, राम बहादुर, श्याम बहादुर तथा रघुनाथ सहाय मिश्र ने धोखे से गाटा संख्या 471 की अतिरिक्त भूमि को बैनामे में शामिल करा लिया। वादी पक्ष का कहना था कि दिनांक 06 जून 1992 को किए गए बैनामे में प्रतिवादीगण ने गलत तरीके से दर्शा दी।
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न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने व उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद कहा कि विवादित बैनामा पंजीकृत दस्तावेज है। पंजीकृत बैनामे को कानूनन वैध माना जाता है, जब तक कि धोखाधड़ी ठोस साक्ष्यों से सिद्ध न हो। वादी पक्ष न तो कथित पूर्व बैनामे को साबित कर सका और न ही धोखे का कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत कर पाया। इन आधारों पर न्यायालय ने वादी पक्ष का दावा निरस्त कर दिया तथा आदेश दिया कि दोनों पक्ष अपने-अपने मुकदमे का खर्च स्वयं वहन करेंगे।
