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Ambedkar Nagar News: 51.60 लाख के गबन में प्रधान ने किया सरेंडर, जेल
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अंबेडकरनगर। विकासखंड टांडा की ग्राम पंचायत अवसानपुर में वर्ष 2014-15 के दौरान स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत शौचालय निर्माण में 51.60 लाख रुपये के गबन के मामले में तत्कालीन प्रधान रेखा वर्मा ने कोर्ट में सरेंडर किया है। कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज करते हुए उन्हें जेल भेज दिया।
सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) टांडा की ओर से 20 मई 2016 को संबंधित थाना प्रभारी को भेजे गए पत्र के अनुसार, जिला पंचायत राज अधिकारी के निर्देश पर गठित जांच समिति ने ग्राम पंचायतरें में निर्मित शौचालयों का सत्यापन किया। जांच रिपोर्ट में पाया गया कि 818 शौचालयों के लक्ष्य के सापेक्ष केवल 388 शौचालयों का निर्माण हुआ, जबकि 430 शौचालयों के लिए जारी 51.60 लाख रुपये (प्रति शौचालय 12 हजार रुपये) का गबन कर लिया गया। इस मामले की शिकायत पूर्व प्रधान वंशराज वर्मा ने की थी।
जांच रिपोर्ट में इस अनियमितता के लिए तत्कालीन ग्राम प्रधान रेखा वर्मा, सचिव जसवंत कुमार और विनोद कुमार गुप्ता को जिम्मेदार ठहराया गया। डीपीआरओ की ओर से संबंधित अधिकारियों को कई बार नोटिस जारी कर लाभार्थियों की सूची और अन्य अभिलेख प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।
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इसके बाद पुलिस ने प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की और जांच कर आरोप पत्र काेर्ट में दाखिल कर दिया था। इस मामले की सुनवाई सीजेएम कोर्ट में चल रही है। मामला पुराना होने के कारण कोर्ट ने वारंट जारी कर पुलिस को आरोपी तत्कालीन प्रधान को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए थे। इस मामले में तत्कालीन प्रधान ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया, जिसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया।
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सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) टांडा की ओर से 20 मई 2016 को संबंधित थाना प्रभारी को भेजे गए पत्र के अनुसार, जिला पंचायत राज अधिकारी के निर्देश पर गठित जांच समिति ने ग्राम पंचायतरें में निर्मित शौचालयों का सत्यापन किया। जांच रिपोर्ट में पाया गया कि 818 शौचालयों के लक्ष्य के सापेक्ष केवल 388 शौचालयों का निर्माण हुआ, जबकि 430 शौचालयों के लिए जारी 51.60 लाख रुपये (प्रति शौचालय 12 हजार रुपये) का गबन कर लिया गया। इस मामले की शिकायत पूर्व प्रधान वंशराज वर्मा ने की थी।
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जांच रिपोर्ट में इस अनियमितता के लिए तत्कालीन ग्राम प्रधान रेखा वर्मा, सचिव जसवंत कुमार और विनोद कुमार गुप्ता को जिम्मेदार ठहराया गया। डीपीआरओ की ओर से संबंधित अधिकारियों को कई बार नोटिस जारी कर लाभार्थियों की सूची और अन्य अभिलेख प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।
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इसके बाद पुलिस ने प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की और जांच कर आरोप पत्र काेर्ट में दाखिल कर दिया था। इस मामले की सुनवाई सीजेएम कोर्ट में चल रही है। मामला पुराना होने के कारण कोर्ट ने वारंट जारी कर पुलिस को आरोपी तत्कालीन प्रधान को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए थे। इस मामले में तत्कालीन प्रधान ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया, जिसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया।