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Amethi News: आयुर्वेदिक अस्पतालों में दवाओं का संकट
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Fri, 20 Feb 2026 12:15 AM IST
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राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय अमेठी में मरीज का इलाज करते चिकित्सक। -संवाद
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अमेठी सिटी। जिले के आयुर्वेदिक व यूनानी अस्पतालों में दवाओं की कमी से मरीजों को भटकना पड़ रहा है। गंभीर बीमारियों के इलाज में आवश्यक दवाओं के अभाव में मरीजों को बाहर से निजी मेडिकल स्टोरों से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं, जिससे उन पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
जिले में संचालित 25 शैया वाले राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालयों के साथ-साथ 18 अन्य अस्पतालों में दवाओं की आपूर्ति ठप पड़ी है। वहीं नौ यूनानी अस्पतालों में भी दवाओं का टोटा हैं। इन आयुर्वेदिक अस्पतालों में गठिया, पेट संबंधी रोग और श्वास संबंधी बीमारियों के इलाज के लिए केवल चूर्ण औषधियां ही उपलब्ध हैं। गंभीर इलाज में उपयोग होने वाली गोलियां, काढ़ा, तेल, सिरप, गुग्गुल, और अन्य महत्वपूर्ण औषधियां समाप्त हो चुकी हैं।
दवाओं की यह किल्लत स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। मरीजों का कहना है कि वे सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने इसलिए आते हैं ताकि उनका खर्च कम हो सके, लेकिन दवाओं के अभाव में उन्हें निजी अस्पतालों की तरह ही खर्च करना पड़ रहा है। मरीजों के अनुसार, कई बार शिकायत के बावजूद अधिकारी इस समस्या पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
रामनगर निवासी रमेश कुमार को गठिया की गंभीर समस्या है। उन्हें नियमित रूप से गुग्गुल युक्त काढ़ा और विशेष गोलियों की आवश्यकता होती है। जब वे अमेठी के आयुर्वेदिक अस्पताल पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि ऐसी कोई दवा उपलब्ध नहीं है। उन्हें मजबूरी में बाहर से 500 रुपये की दवाएं खरीदनी पड़ीं। इसी तरह सुनीता देवी को पेट के गंभीर रोग के लिए आयुर्वेदिक सिरप की जरूरत थी, लेकिन अस्पताल में यह भी उपलब्ध नहीं था। उन्हें भी बाहर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ीं।
सुल्तानपुर अमेठी क्षेत्रीय आयुर्वेदिक यूनानी अधिकारी डॉ. अब्दुल बारी ने बताया कि आयुर्वेदिक और यूनानी अस्पतालों में फरवरी के अंत तक सभी दवाएं उपलब्ध करा दी जाएंगी। उन्होंने दवाओं के नहीं पहुंच पाने का कारण दवा निर्माण में कुछ बाधा आने को बताया।
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जिले में संचालित 25 शैया वाले राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालयों के साथ-साथ 18 अन्य अस्पतालों में दवाओं की आपूर्ति ठप पड़ी है। वहीं नौ यूनानी अस्पतालों में भी दवाओं का टोटा हैं। इन आयुर्वेदिक अस्पतालों में गठिया, पेट संबंधी रोग और श्वास संबंधी बीमारियों के इलाज के लिए केवल चूर्ण औषधियां ही उपलब्ध हैं। गंभीर इलाज में उपयोग होने वाली गोलियां, काढ़ा, तेल, सिरप, गुग्गुल, और अन्य महत्वपूर्ण औषधियां समाप्त हो चुकी हैं।
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दवाओं की यह किल्लत स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। मरीजों का कहना है कि वे सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने इसलिए आते हैं ताकि उनका खर्च कम हो सके, लेकिन दवाओं के अभाव में उन्हें निजी अस्पतालों की तरह ही खर्च करना पड़ रहा है। मरीजों के अनुसार, कई बार शिकायत के बावजूद अधिकारी इस समस्या पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
रामनगर निवासी रमेश कुमार को गठिया की गंभीर समस्या है। उन्हें नियमित रूप से गुग्गुल युक्त काढ़ा और विशेष गोलियों की आवश्यकता होती है। जब वे अमेठी के आयुर्वेदिक अस्पताल पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि ऐसी कोई दवा उपलब्ध नहीं है। उन्हें मजबूरी में बाहर से 500 रुपये की दवाएं खरीदनी पड़ीं। इसी तरह सुनीता देवी को पेट के गंभीर रोग के लिए आयुर्वेदिक सिरप की जरूरत थी, लेकिन अस्पताल में यह भी उपलब्ध नहीं था। उन्हें भी बाहर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ीं।
सुल्तानपुर अमेठी क्षेत्रीय आयुर्वेदिक यूनानी अधिकारी डॉ. अब्दुल बारी ने बताया कि आयुर्वेदिक और यूनानी अस्पतालों में फरवरी के अंत तक सभी दवाएं उपलब्ध करा दी जाएंगी। उन्होंने दवाओं के नहीं पहुंच पाने का कारण दवा निर्माण में कुछ बाधा आने को बताया।
