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Amethi News: सरकारी परचे पर लिखी जा रहीं महंगी दवाएं
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Wed, 25 Feb 2026 12:45 AM IST
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दुर्गावती को सरकारी परचे पर लिखी गईं बाहर की दवाएं। - संवाद
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अमेठी सिटी। शासन के सख्त निर्देश के बाद भी जिला अस्पताल में मरीजों को बाजार में बिकने वाले महंगी ब्रांडेड दवाएं लिखी जा रही हैं। चिकित्सक कट बिजनेस में मिलने वाली कमीशन की मोटी राशि से अपनी जेब भर रहे हैं। जिससे एक रुपये के परचे में निशुल्क इलाज की आस लेकर पहुंचने वाले मरीजों को परेशानी उठाना पड़ रही है। कार्रवाई न होने से बेखौफ चिकित्सक सरकारी परचे पर ही मरीजों को अस्पताल से मिलने वाली मुफ्त दवाओं की जगह बाजार से मिलने वाली महंगी दवाएं धड़ल्ले से लिख रहे हैं।
प्रतापगढ़ के लालगंज से आई कांति देवी ने बताया कि मनोरोग विभाग में पिछली बार सभी दवाएं और जांच बाहर से कराने के लिए लिखा गया था। इस पर करीब 1500 से 2000 रुपये खर्च हुए थे। इस बार भी बाहर से जांच कराने के साथ दवा लेने के लिए कहा गया है। यह सिर्फ नाम का ही सरकारी अस्पताल रह गया है।
निजी अस्पताल की तरह यहां भी सबकुछ पैसा खर्च करने पर ही मिलता है। बरौलिया जोधनपुर गांव के मोहम्मद हाशिम ने बताया कि उनके परिवार की रेशमा बानो को ईएनटी विभाग में दिखाया है। चिकित्सक ने परचे पर चार दवाएं लिखीं, जिनमें से दो बाहर से खरीदनी पड़ी। गौरीगंज की दुर्गावती ने बताया कि पेट दर्द होने पर उन्होंने फिजिशियन को दिखाया। सरकारी परचे पर सात दवाएं लिखी गईं, जिसमें से तीन दवाएं बाहर से खरीदना पड़ीं। गोरियाबाद गांव निवासी राम भवन ने बेटी नैना को बाल रोग विभाग में दिखाया। इन्हें भी परचे पर बाहर की दवा लिखकर दी गई।
500 रुपये लगेंगे, तुरंत होगा सीटी स्कैन
प्रतापगढ़ के लालगंज निवासी रौनक गौतम ने बताया कि ओपीडी में एक शख्स मिला, जिसने 500 रुपये में तुरंत अस्पताल से सीटी स्कैन जांच कराकर रिपोर्ट देने की बात कही, जबकि यह जांच निशुल्क है।
पोस्टिंग सीएचसी में, ओपीडी जिला अस्पताल में
सीएचसी गौरीगंज में तैनात एक चिकित्सक जिला अस्पताल में ओपीडी करते हैं। इनके कक्ष में बाहरी लोगों का जमावड़ा लगा रहता है। यह लोग मरीजों को अपने साथ मेडिकल स्टोर तक लेकर जाते हैं और दवाएं खरीदवाते हैं। कुछ दिनों पहले ही बाहर से दवा खरीदने को लेकर विवाद भी हुआ था और मामला कोतवाली पहुंचा था, लेकिन बाद में प्रकरण को रफा-दफा कर दिया गया।
रोकथाम को लेकर होगी कार्रवाई
सीएमएस डॉ. बद्री प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि बाहर की दवाएं लिखना पूरी तरह प्रतिबंधित है। चिकित्सक बाहरी लोगों को ओपीडी कक्ष में बैठाते हैं तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। जो भी चिकित्सक बाहर की दवाएं लिख रहे हैं, उन्हें नोटिस देकर स्पष्टीकरण मांगने के साथ कार्रवाई के घेरे में लाया जाएगा।
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प्रतापगढ़ के लालगंज से आई कांति देवी ने बताया कि मनोरोग विभाग में पिछली बार सभी दवाएं और जांच बाहर से कराने के लिए लिखा गया था। इस पर करीब 1500 से 2000 रुपये खर्च हुए थे। इस बार भी बाहर से जांच कराने के साथ दवा लेने के लिए कहा गया है। यह सिर्फ नाम का ही सरकारी अस्पताल रह गया है।
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निजी अस्पताल की तरह यहां भी सबकुछ पैसा खर्च करने पर ही मिलता है। बरौलिया जोधनपुर गांव के मोहम्मद हाशिम ने बताया कि उनके परिवार की रेशमा बानो को ईएनटी विभाग में दिखाया है। चिकित्सक ने परचे पर चार दवाएं लिखीं, जिनमें से दो बाहर से खरीदनी पड़ी। गौरीगंज की दुर्गावती ने बताया कि पेट दर्द होने पर उन्होंने फिजिशियन को दिखाया। सरकारी परचे पर सात दवाएं लिखी गईं, जिसमें से तीन दवाएं बाहर से खरीदना पड़ीं। गोरियाबाद गांव निवासी राम भवन ने बेटी नैना को बाल रोग विभाग में दिखाया। इन्हें भी परचे पर बाहर की दवा लिखकर दी गई।
500 रुपये लगेंगे, तुरंत होगा सीटी स्कैन
प्रतापगढ़ के लालगंज निवासी रौनक गौतम ने बताया कि ओपीडी में एक शख्स मिला, जिसने 500 रुपये में तुरंत अस्पताल से सीटी स्कैन जांच कराकर रिपोर्ट देने की बात कही, जबकि यह जांच निशुल्क है।
पोस्टिंग सीएचसी में, ओपीडी जिला अस्पताल में
सीएचसी गौरीगंज में तैनात एक चिकित्सक जिला अस्पताल में ओपीडी करते हैं। इनके कक्ष में बाहरी लोगों का जमावड़ा लगा रहता है। यह लोग मरीजों को अपने साथ मेडिकल स्टोर तक लेकर जाते हैं और दवाएं खरीदवाते हैं। कुछ दिनों पहले ही बाहर से दवा खरीदने को लेकर विवाद भी हुआ था और मामला कोतवाली पहुंचा था, लेकिन बाद में प्रकरण को रफा-दफा कर दिया गया।
रोकथाम को लेकर होगी कार्रवाई
सीएमएस डॉ. बद्री प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि बाहर की दवाएं लिखना पूरी तरह प्रतिबंधित है। चिकित्सक बाहरी लोगों को ओपीडी कक्ष में बैठाते हैं तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। जो भी चिकित्सक बाहर की दवाएं लिख रहे हैं, उन्हें नोटिस देकर स्पष्टीकरण मांगने के साथ कार्रवाई के घेरे में लाया जाएगा।
