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Amethi News: रंग, राग व रील्स के संग बदली होली की तस्वीर
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sat, 28 Feb 2026 11:49 PM IST
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अमेठी सिटी। होली नजदीक आते ही शहर का माहौल रंगीन होने लगा है। चौक-चौराहों से लेकर बाजार तक चहल-पहल बढ़ गई है। युवा वर्ग में इस बार उत्साह अलग अंदाज में दिख रहा है। पारंपरिक रंगों के साथ डीजे, थीम पार्टी और सोशल मीडिया ट्रेंड ने उत्सव को नया रूप दिया है।
अभिषेक, उत्कर्ष, मनोज और ऋषभ मिश्र बताते हैं कि अब होली केवल रंग खेलने तक सीमित नहीं रही। मित्रों के साथ थीम पार्टी, कलर बैश और रेन डांस जैसे आयोजन तय किए जा रहे हैं। कई समूह पहले से स्थान बुक कर रहे हैं। साउंड सिस्टम और गीतों की सूची तैयार की जा चुकी है। लोकप्रिय होली गीतों पर समूह नृत्य की तैयारी भी चल रही है। खर्च साझा करने के लिए मोबाइल ग्रुप बनाए गए हैं, जिनमें सदस्य ऑनलाइन योगदान भेज रहे हैं।
बाजार में भी बदलती पसंद साफ दिख रही है। दुकानदार सिप्पू के अनुसार इस बार हर्बल और ऑर्गेनिक गुलाल की मांग बढ़ी है। फूलों और प्राकृतिक तत्वों से बने रंगों को प्राथमिकता मिल रही है। ग्राहक त्वचा सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन पर ध्यान दे रहे हैं। रंगों की दुकानों पर पैकिंग और गुणवत्ता के बारे में पूछताछ बढ़ी है। परिधान बाजार में होली स्पेशल टी-शर्ट, कुर्ते, गॉगल्स और कैप की नई शृंखला आई है। स्लोगन प्रिंटेड सफेद टी-शर्ट और समूह परिधान युवाओं को आकर्षित कर रहे हैं।
पिचकारी, रंगीन गुब्बारे और पार्टी सामग्री की दुकानों पर भी भीड़ बढ़ रही है। मिठाई की दुकानों पर गुझिया और नमकीन की तैयारी तेज हो गई है। सोशल मीडिया का प्रभाव भी है। युवा फोटो और वीडियो बनाने की योजना बना रहे हैं। रील्स, स्लो मोशन वीडियो और समूह चित्र साझा करने की तैयारी चल रही है। कई लोग पहले से लोकेशन तय कर रहे हैं ताकि रंगों के साथ बेहतर तस्वीरें ली जा सकें।
रसिक बिहारी बताते हैं कि पहले टेसू के फूलों से रंग तैयार होता था और फगुआ की धुन पर पूरा गांव झूमता था। शिल्पी मिश्र का कहना है कि विवाह के बाद पहली होली परिवार में अपनापन बढ़ाती है। बच्चों के लिए यह पर्व पिचकारी, रंग और मिठाइयों की खुशी लेकर आता है। परंपरा और आधुनिकता के संग इस बार होली नए रंगों में सजेगी।
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अभिषेक, उत्कर्ष, मनोज और ऋषभ मिश्र बताते हैं कि अब होली केवल रंग खेलने तक सीमित नहीं रही। मित्रों के साथ थीम पार्टी, कलर बैश और रेन डांस जैसे आयोजन तय किए जा रहे हैं। कई समूह पहले से स्थान बुक कर रहे हैं। साउंड सिस्टम और गीतों की सूची तैयार की जा चुकी है। लोकप्रिय होली गीतों पर समूह नृत्य की तैयारी भी चल रही है। खर्च साझा करने के लिए मोबाइल ग्रुप बनाए गए हैं, जिनमें सदस्य ऑनलाइन योगदान भेज रहे हैं।
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बाजार में भी बदलती पसंद साफ दिख रही है। दुकानदार सिप्पू के अनुसार इस बार हर्बल और ऑर्गेनिक गुलाल की मांग बढ़ी है। फूलों और प्राकृतिक तत्वों से बने रंगों को प्राथमिकता मिल रही है। ग्राहक त्वचा सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन पर ध्यान दे रहे हैं। रंगों की दुकानों पर पैकिंग और गुणवत्ता के बारे में पूछताछ बढ़ी है। परिधान बाजार में होली स्पेशल टी-शर्ट, कुर्ते, गॉगल्स और कैप की नई शृंखला आई है। स्लोगन प्रिंटेड सफेद टी-शर्ट और समूह परिधान युवाओं को आकर्षित कर रहे हैं।
पिचकारी, रंगीन गुब्बारे और पार्टी सामग्री की दुकानों पर भी भीड़ बढ़ रही है। मिठाई की दुकानों पर गुझिया और नमकीन की तैयारी तेज हो गई है। सोशल मीडिया का प्रभाव भी है। युवा फोटो और वीडियो बनाने की योजना बना रहे हैं। रील्स, स्लो मोशन वीडियो और समूह चित्र साझा करने की तैयारी चल रही है। कई लोग पहले से लोकेशन तय कर रहे हैं ताकि रंगों के साथ बेहतर तस्वीरें ली जा सकें।
रसिक बिहारी बताते हैं कि पहले टेसू के फूलों से रंग तैयार होता था और फगुआ की धुन पर पूरा गांव झूमता था। शिल्पी मिश्र का कहना है कि विवाह के बाद पहली होली परिवार में अपनापन बढ़ाती है। बच्चों के लिए यह पर्व पिचकारी, रंग और मिठाइयों की खुशी लेकर आता है। परंपरा और आधुनिकता के संग इस बार होली नए रंगों में सजेगी।
