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Amethi News: नवाचार से बदली स्कूल की तस्वीर
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Tue, 13 Jan 2026 12:40 AM IST
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अमेठी सिटी। शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर परिश्रम, अनुशासन और नवाचार से पहचान बनाना आसान नहीं होता। इस कठिन राह पर चलते हुए अर्चना मौर्या ने संघर्ष को अपनी शक्ति बनाया और सफलता का मुकाम हासिल किया। वर्ष 2009 में सीतापुर में सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति के साथ उनका शैक्षिक सफर शुरू हुआ। वर्ष 2012 में जनपद अमेठी में स्थानांतरण के बाद उन्होंने बच्चों की सीखने की क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया।
अर्चना ने कक्षा शिक्षण में नए प्रयोग, अनुशासित वातावरण और विद्यार्थियों से संवाद पर जोर दिया। वर्ष 2016 में प्राथमिक विद्यालय मुसाफिरखाना द्वितीय में प्रधानाध्यापक पद पर पदोन्नति मिलने के बाद उनकी जिम्मेदारी और बढ़ी। विद्यालय की शैक्षिक गुणवत्ता, स्वच्छता और प्रबंधन में सुधार दिखाई देना लगा। उनके नेतृत्व में स्कूल का चयन पीएम श्री विद्यालय के रूप में हुआ। इसके बाद विद्यालय ने ब्लॉक स्तर पर अग्रणी स्थान बनाया।
बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन, महिला जागरूकता और सशक्तीकरण की दिशा में उनके प्रयास लगातार जारी हैं। अभिभावक और विद्यालय के बीच विश्वासपूर्ण संवाद स्थापित हुआ, जिससे शैक्षिक वातावरण मजबूत हुआ। पूर्व में अकादमिक रिसोर्स पर्सन की भूमिका निभाते समय उन्होंने शिक्षकों को नवीन शिक्षण विधियों से जोड़ा। वर्तमान में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग से विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा मिल रही है। उनका कार्य न केवल विद्यालय बल्कि ब्लॉक और जनपद स्तर पर शिक्षकों के लिए नजीर है। अर्चना की यह यात्रा नारी शक्ति, नेतृत्व क्षमता और शिक्षा के प्रति अटूट समर्पण का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करती है।
अर्चना का कहना है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा का बेहतर माहौल हो तो काफी कुछ बदला जा सकता है। मसलन अभिभावकों को निजी स्कूलों का रुख नहीं करना पड़़ेगा। उन पर भारी भरकम फीस भरने का दबाव खत्म होगा। सरकारी स्कूलों में बच्चे अच्छी शिक्षा ग्रहण कर अपना भविष्य गढ़ सकेंगे। बस इसी सोच के साथ वह शिक्षण कार्य कर रही हैं।
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अर्चना ने कक्षा शिक्षण में नए प्रयोग, अनुशासित वातावरण और विद्यार्थियों से संवाद पर जोर दिया। वर्ष 2016 में प्राथमिक विद्यालय मुसाफिरखाना द्वितीय में प्रधानाध्यापक पद पर पदोन्नति मिलने के बाद उनकी जिम्मेदारी और बढ़ी। विद्यालय की शैक्षिक गुणवत्ता, स्वच्छता और प्रबंधन में सुधार दिखाई देना लगा। उनके नेतृत्व में स्कूल का चयन पीएम श्री विद्यालय के रूप में हुआ। इसके बाद विद्यालय ने ब्लॉक स्तर पर अग्रणी स्थान बनाया।
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बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन, महिला जागरूकता और सशक्तीकरण की दिशा में उनके प्रयास लगातार जारी हैं। अभिभावक और विद्यालय के बीच विश्वासपूर्ण संवाद स्थापित हुआ, जिससे शैक्षिक वातावरण मजबूत हुआ। पूर्व में अकादमिक रिसोर्स पर्सन की भूमिका निभाते समय उन्होंने शिक्षकों को नवीन शिक्षण विधियों से जोड़ा। वर्तमान में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग से विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा मिल रही है। उनका कार्य न केवल विद्यालय बल्कि ब्लॉक और जनपद स्तर पर शिक्षकों के लिए नजीर है। अर्चना की यह यात्रा नारी शक्ति, नेतृत्व क्षमता और शिक्षा के प्रति अटूट समर्पण का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करती है।
अर्चना का कहना है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा का बेहतर माहौल हो तो काफी कुछ बदला जा सकता है। मसलन अभिभावकों को निजी स्कूलों का रुख नहीं करना पड़़ेगा। उन पर भारी भरकम फीस भरने का दबाव खत्म होगा। सरकारी स्कूलों में बच्चे अच्छी शिक्षा ग्रहण कर अपना भविष्य गढ़ सकेंगे। बस इसी सोच के साथ वह शिक्षण कार्य कर रही हैं।