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Amethi News: फ्लायर... बोर्ड परीक्षा के बाद कॉपियों को संकलन केंद्र पहुंचाने में लापरवाही
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जीजीआईसी मोड़ पर बाइक से काॅपी का बंडल संकलन केंद्र ले जाते शिक्षक।
- फोटो : जीजीआईसी मोड़ पर बाइक से काॅपी का बंडल संकलन केंद्र ले जाते शिक्षक।
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अमेठी सिटी। जिले के 85 केंद्रों पर चल रही यूपी बोर्ड परीक्षा में कक्षों के भीतर कड़ी निगरानी के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन परीक्षा खत्म होते ही व्यवस्थाएं ढीली पड़ती दिखीं। कोई बाइक से तो कोई पैदल ही कॉपियों का बंडल लेकर संकलन केंद्र पहुंचता नजर आया।
गौरीगंज से गुजरने वाले बांदा-टांडा हाईवे पर चौक मार्ग मोड़ के पास जीजीआईसी संकलन केंद्र के बाहर बुधवार दोपहर 12:30 से 1:20 बजे के बीच ऐसे कई दृश्य सामने आए, जिन्होंने सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए। जीजीआईसी मोड़ पर लगातार बाइक और मोपेड से कर्मचारी उत्तर पुस्तिकाओं के सील बंडल लाते दिखे। कुछ बंडल डिकी में रखे थे तो कुछ हैंडल में लटकाए गए थे। कई जगह एक ही व्यक्ति बाइक से बंडल लेकर आता दिखा। आसपास न तो कोई सुरक्षा कर्मी दिखा और न ही बंद वाहन की व्यवस्था नजर आई। परीक्षा केंद्रों के भीतर सीसीटीवी, स्टेटिक मजिस्ट्रेट और बाह्य केंद्र व्यवस्थापक तैनात हैं, लेकिन केंद्र से संकलन स्थल तक परिवहन में लापरवाही साफ दिखाई दी।
कुछ बाइक सवार तेज रफ्तार में पहुंचे और सीधे परिसर में दाखिल हो गए। बंडल उतरवाकर औपचारिकताएं पूरी की गईं। इस दौरान किसी प्रकार की जांच या सुरक्षा घेरा नजर नहीं आया। सवाल उठ रहा है कि जब परीक्षा कक्ष के अंदर इतनी सख्ती है तो उत्तर पुस्तिकाओं के सुरक्षित परिवहन में मानकों का पालन क्यों नहीं हो रहा। नियम है कि सील बंडल बंद गाड़ियों से संकलन केंद्र तक पहुंचाए जाएं। इसके बावजूद दोपहिया वाहनों का उपयोग किया गया। कई बंडलों के साथ कोई गार्ड भी नहीं दिखा।
20 रुपये में 40 किमी कैसे पहुंचें कॉपियां
सूत्रों के अनुसार, बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाएं संकलन केंद्र तक पहुंचाने के लिए सरकारी खर्च मात्र 20 रुपये मिलता है। यह धनराशि इतनी कम है कि इससे चार पहिया वाहन से पांच किलोमीटर या दोपहिया से 10 से 15 किलोमीटर की दूरी तय करना भी मुश्किल है। महंगाई बढ़ने के बावजूद अब भी केंद्रों से संकलन केंद्र तक उत्तर पुस्तिकाएं पहुंचाने के लिए मात्र 20 रुपये ही मिलते हैं।
नियमों की अनदेखी पर होगी कार्रवाई
डीआईओएस डॉ. राजेश कुमार द्विवेदी ने कहा कि संकलन केंद्र तक कापियों को पहुंचाने के नियमाें का पालन करने का सभी को निर्देश दिया गया है। निर्देशों के पालन नहीं करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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गौरीगंज से गुजरने वाले बांदा-टांडा हाईवे पर चौक मार्ग मोड़ के पास जीजीआईसी संकलन केंद्र के बाहर बुधवार दोपहर 12:30 से 1:20 बजे के बीच ऐसे कई दृश्य सामने आए, जिन्होंने सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए। जीजीआईसी मोड़ पर लगातार बाइक और मोपेड से कर्मचारी उत्तर पुस्तिकाओं के सील बंडल लाते दिखे। कुछ बंडल डिकी में रखे थे तो कुछ हैंडल में लटकाए गए थे। कई जगह एक ही व्यक्ति बाइक से बंडल लेकर आता दिखा। आसपास न तो कोई सुरक्षा कर्मी दिखा और न ही बंद वाहन की व्यवस्था नजर आई। परीक्षा केंद्रों के भीतर सीसीटीवी, स्टेटिक मजिस्ट्रेट और बाह्य केंद्र व्यवस्थापक तैनात हैं, लेकिन केंद्र से संकलन स्थल तक परिवहन में लापरवाही साफ दिखाई दी।
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कुछ बाइक सवार तेज रफ्तार में पहुंचे और सीधे परिसर में दाखिल हो गए। बंडल उतरवाकर औपचारिकताएं पूरी की गईं। इस दौरान किसी प्रकार की जांच या सुरक्षा घेरा नजर नहीं आया। सवाल उठ रहा है कि जब परीक्षा कक्ष के अंदर इतनी सख्ती है तो उत्तर पुस्तिकाओं के सुरक्षित परिवहन में मानकों का पालन क्यों नहीं हो रहा। नियम है कि सील बंडल बंद गाड़ियों से संकलन केंद्र तक पहुंचाए जाएं। इसके बावजूद दोपहिया वाहनों का उपयोग किया गया। कई बंडलों के साथ कोई गार्ड भी नहीं दिखा।
20 रुपये में 40 किमी कैसे पहुंचें कॉपियां
सूत्रों के अनुसार, बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाएं संकलन केंद्र तक पहुंचाने के लिए सरकारी खर्च मात्र 20 रुपये मिलता है। यह धनराशि इतनी कम है कि इससे चार पहिया वाहन से पांच किलोमीटर या दोपहिया से 10 से 15 किलोमीटर की दूरी तय करना भी मुश्किल है। महंगाई बढ़ने के बावजूद अब भी केंद्रों से संकलन केंद्र तक उत्तर पुस्तिकाएं पहुंचाने के लिए मात्र 20 रुपये ही मिलते हैं।
नियमों की अनदेखी पर होगी कार्रवाई
डीआईओएस डॉ. राजेश कुमार द्विवेदी ने कहा कि संकलन केंद्र तक कापियों को पहुंचाने के नियमाें का पालन करने का सभी को निर्देश दिया गया है। निर्देशों के पालन नहीं करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
