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Amethi News: तनाव नहीं, धैर्य व नियमित अभ्यास से बेहतर परिणाम
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Wed, 18 Feb 2026 12:44 AM IST
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अमेठी सिटी। यूपी बोर्ड परीक्षा बुधवार से शुरू हो रही है। परीक्षा को लेकर छात्र-छात्राओं में उत्साह के साथ तनाव भी देखा जा रहा है। ऐसे में जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. वीर विक्रम सिंह ने विद्यार्थियों और अभिभावकों को जरूरी सलाह दी है।
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para_count-1 उन्होंने कहा कि अभिभावक बच्चों पर अधिक अंक लाने का दबाव न बनाएं, बल्कि उनका उत्साहवर्धन करें। डॉ. सिंह ने बताया कि कई विद्यार्थी बेहतर परिणाम की चाह में दिन-रात पढ़ाई कर रहे हैं। कुछ बच्चे खाना-पीना और पर्याप्त नींद तक नहीं ले रहे हैं। para_count-1
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para_count-2 ऐसे में क्षमता से अधिक पढ़ाई का दबाव सिरदर्द, चिड़चिड़ापन और अनिद्रा जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है। जिला अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग में प्रतिदिन चार से पांच विद्यार्थी तनाव और नींद न आने की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। अत्यधिक चिंता का असर स्मरण शक्ति पर भी पड़ रहा है। गंभीर मामलों में दवा और विशेषज्ञ काउंसिलिंग की जरूरत पड़ रही है। para_count-2
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para_count-3 उन्होंने कहा कि परीक्षा जीवन का एक महत्वपूर्ण चरण है, पर इसे भय का कारण नहीं बनाना चाहिए। विद्यार्थी पूरे वर्ष जो पढ़ चुके हैं, उसका नियमित अभ्यास करें। पढ़ाई के बीच छोटे-छोटे अंतराल लें। संतुलित दिनचर्या बनाए रखना सफलता की कुंजी है। अभिभावकों को भी सलाह दी कि वे बच्चों के साथ मित्रवत व्यवहार करें, उनकी बातें ध्यान से सुनें और सकारात्मक वातावरण दें। para_count-3
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para_count-4 परीक्षा की टेंशन न लें, खुद पर भरोसा रखें। पढ़ाई का टाइम टेबल बनाएं, कठिन विषय अलग चिन्हित करें। कम से कम आठ घंटे की नींद लें।
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para_count-1 उन्होंने कहा कि अभिभावक बच्चों पर अधिक अंक लाने का दबाव न बनाएं, बल्कि उनका उत्साहवर्धन करें। डॉ. सिंह ने बताया कि कई विद्यार्थी बेहतर परिणाम की चाह में दिन-रात पढ़ाई कर रहे हैं। कुछ बच्चे खाना-पीना और पर्याप्त नींद तक नहीं ले रहे हैं। para_count-1
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para_count-2 ऐसे में क्षमता से अधिक पढ़ाई का दबाव सिरदर्द, चिड़चिड़ापन और अनिद्रा जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है। जिला अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग में प्रतिदिन चार से पांच विद्यार्थी तनाव और नींद न आने की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। अत्यधिक चिंता का असर स्मरण शक्ति पर भी पड़ रहा है। गंभीर मामलों में दवा और विशेषज्ञ काउंसिलिंग की जरूरत पड़ रही है। para_count-2
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para_count-3 उन्होंने कहा कि परीक्षा जीवन का एक महत्वपूर्ण चरण है, पर इसे भय का कारण नहीं बनाना चाहिए। विद्यार्थी पूरे वर्ष जो पढ़ चुके हैं, उसका नियमित अभ्यास करें। पढ़ाई के बीच छोटे-छोटे अंतराल लें। संतुलित दिनचर्या बनाए रखना सफलता की कुंजी है। अभिभावकों को भी सलाह दी कि वे बच्चों के साथ मित्रवत व्यवहार करें, उनकी बातें ध्यान से सुनें और सकारात्मक वातावरण दें। para_count-3
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para_count-4 परीक्षा की टेंशन न लें, खुद पर भरोसा रखें। पढ़ाई का टाइम टेबल बनाएं, कठिन विषय अलग चिन्हित करें। कम से कम आठ घंटे की नींद लें।