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Amethi News: मरीजों को लिखीं बाहर की महंगी दवाएं
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Wed, 18 Feb 2026 12:21 AM IST
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तिलोई। मेडिकल कॉलेज में मरीजों को बाहर की दवाएं लिखी जा रही हैं। अस्पताल प्रबंधन की चेतावनी के बावजूद सरकारी परचे पर महंगी दवाएं लिखने का क्रम जारी है। जरूरतमंद मरीज बाहर की महंगी दवाएं खरीदने को मजबूर हो रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज में जल्द आराम की चाह में मरीजों की भीड़ पहुंच रही है। यहां मुफ्त इलाज के साथ दवाएं भी मरीजों को मुहैया करा दी जाती हैं। प्रतिदिन करीब 1200 मरीजों का उपचार किया जाता है। गरीब तबके के लोग इलाज की आस में यहां परचा काउंटर से लेकर ओपीडी के बाहर लंबी लाइनाें में खड़े होकर इंतजार करते हैं।
मेडिकल कॉलेज में मंगलवार को मिले बाजारशुकुल के ऊंचगांव के सीताराम ने बताया कि उन्हें पेट संबंधी बीमारी है। डॉक्टर ने परचे पर जो दवाएं लिखीं, वह अस्पताल में नहीं मिलीं। मेडिकल स्टोर में 450 रुपये देकर दवाएं खरीदनी पड़ीं। असनी के सुखदीन ने बताया कि दो महीने से गले का इलाज करा रहे हैं। हर बार परचे पर बाहर की दवाएं लिख दी जाती हैं।
मरीजों का यह भी कहना है कि मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर के कक्ष में कई बाहरी लोग रहते हैं जो ओपीडी से निकलते ही अच्छी और सस्ती दवा दिलाने की बात कहकर मेडिकल स्टोर पर ले जाते हैं। मजबूरी में मरीजों व तीमारदारों को बाहर दवाओं की खरीदारी करनी पड़ती है। प्राचार्य डॉ. योगेश कुमार का कहना है कि मेडिकल कॉलेज में दवाएं पर्याप्त हैं। बाहर की दवाएं लिखे जाने पर रोक है। सख्त निर्देश है कि हर मरीज को मुफ्त दवाएं दी जाएं। मामले की जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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मेडिकल कॉलेज में जल्द आराम की चाह में मरीजों की भीड़ पहुंच रही है। यहां मुफ्त इलाज के साथ दवाएं भी मरीजों को मुहैया करा दी जाती हैं। प्रतिदिन करीब 1200 मरीजों का उपचार किया जाता है। गरीब तबके के लोग इलाज की आस में यहां परचा काउंटर से लेकर ओपीडी के बाहर लंबी लाइनाें में खड़े होकर इंतजार करते हैं।
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मेडिकल कॉलेज में मंगलवार को मिले बाजारशुकुल के ऊंचगांव के सीताराम ने बताया कि उन्हें पेट संबंधी बीमारी है। डॉक्टर ने परचे पर जो दवाएं लिखीं, वह अस्पताल में नहीं मिलीं। मेडिकल स्टोर में 450 रुपये देकर दवाएं खरीदनी पड़ीं। असनी के सुखदीन ने बताया कि दो महीने से गले का इलाज करा रहे हैं। हर बार परचे पर बाहर की दवाएं लिख दी जाती हैं।
मरीजों का यह भी कहना है कि मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर के कक्ष में कई बाहरी लोग रहते हैं जो ओपीडी से निकलते ही अच्छी और सस्ती दवा दिलाने की बात कहकर मेडिकल स्टोर पर ले जाते हैं। मजबूरी में मरीजों व तीमारदारों को बाहर दवाओं की खरीदारी करनी पड़ती है। प्राचार्य डॉ. योगेश कुमार का कहना है कि मेडिकल कॉलेज में दवाएं पर्याप्त हैं। बाहर की दवाएं लिखे जाने पर रोक है। सख्त निर्देश है कि हर मरीज को मुफ्त दवाएं दी जाएं। मामले की जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
